आज भी मौजूद है 1853 में बने सांडर्स तालाब की निशानियां


अमृतसर, 21 सितम्बर (सुरिन्द्र कोछड़) : सन् 1853 में अमृतसर के पहले डिप्टी कमिश्नर मि.सी.बी. सांडर्स द्वारा बनवाया खूबसूरत विशाल तालाब तो आज पूरी तरह लुप्त हो चुका है, पर उसकी बहुत सी निशानियां आज भी मौजूद हैं। सांडर्स टैंक (तालाब) और चुंगी टैंक के साथ जाना जाता यह तालाब सांडर्स ने चुंगी फंड में 24 हज़ार रुपये खर्च कर स्थानीय दरवाज़ा राम बाग के बाहर बनवाया था। सन् 1896 में तालाब को मिट्टी से भरकर वहां बगीचा बनाया गया और बाद में उस बगीचे में नंदन सिनेमा का निर्माण किया गया। कुछ वर्ष पहले घाटे में चल रहे उक्त सिनेमा की ईमारत को ज़मीनदोज़ कर वहां पार्किंग बना दी गई। सिनेमा घर की जगह पर बनाई गई पार्किंग की छोटी ईटों के साथ बनी पुरानी चार दीवारी, सरोवर के किनारे बनाए गए बुर्ज आज भी सुरक्षित हैं। छोटी ईंटों के साथ बनी यह सुरक्षित बुर्ज आज भी ऐलीवेटिड रोड के ऊपर से सामने दिखाई देती है, पर इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि या अस्तित्व से बहुत कम लोग जानते हैं। वर्णनीय है कि 1852 में अस्तित्व में आए अमृतसर मिशन ने इस तालाब के सामने कोई 20 कदम की दूरी पर स्थानीय इसाईयों के लिए डब्ल्यू कीरने ने 8000 रुपये चंदा इकट्ठा करके बेत अल मसीह (यिशू का निवास) चर्च का निर्माण करवाया, जिससे अब क्राइस्ट चर्च कैथेड्रिल कहा जाता है। पहले इस चर्च को शहर के बाहर बनाने की योजना बनाई गई थी, पर बाद में अमृतसर के स्थानीय इसाइयों की सुविधा को देखते हुए मौजूदा स्थान पर ही इसका निर्माण कर दिया गया।