बच्चों की फाइनल परीक्षा के दौरान पेरेंट्स भी ध्यान दें

बच्चों की परीक्षा की तैयारी बच्चों के लिए ही नहीं पैरेंट्स के लिए भी एक बड़ी चुनौती होती है। परीक्षा का नाम सुनकर बच्चों का ही नहीं मां का भी हाल बेहाल हो जाता है। हर पैरेंट्स की दिली तमन्ना होती है कि बच्चे हर परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करें। अब तो यह वार्षिक परीक्षा का सवाल है। वक्त गुजरने के साथ पढ़ाई के तौर तरीके भी बदल चुके हैं। फाइनल परीक्षा में अभी कुछ ही दिन बाकी हैं। बच्चे को बेहतर ढंग से इस परीक्षा के लिए कैसे तैयार कराएं आइये जानें।
टाइम टेबल बनाएं
टाइम टेबल बनाकर पढ़ना और इस टाइम टेबल पर सख्ती से अमल करना, यह कोई नई बात नहीं है। आप एक मां हैं, आपने भी अपनी पढ़ाई इसी तरीके से की होगी। टाइम टेबल सिर्फ पढ़ने के समय का ही नहीं दिन की दूसरी गतिविधियों का भी होना चाहिए। कब कौन सा विषय पढ़ना है, उसकी तैयारी कैसे करनी है, इसके लिए बच्चे को गाइड करें। उसे गणित, इंग्लिश, ग्रामर, का नियमित अभ्यास कराएं। आपको पता ही होगा कि किन विषयों में वह कमजोर है, उसे टाइम टेबल में ज्यादा बार पढ़ने के लिए ज्यादा समय दें। पढ़ाई के लिए दो घंटे का समय तय करके उन दो घंटों में दो विषय पढ़ने को दें। लगातार दो घंटे एक ही विषय पढ़ने से उसे बोरियत हो सकती है। थोड़ी-थोड़ी लेकिन पक्की तैयारी कराएं। उसके टाइम टेबल में खेलकूद का भी समय रखें। उसके मनोरंजन के लिए टीवी या मोबाइल देखने के लिए भी उसके लिए थोड़ा समय रखें ताकि उसके दिमाग को तरोताजा होने का मौका मिले।
घर का पॉजीटिव माहौल
बच्चा छोटा हो या बड़ा, उसकी तुलना किसी से न करें, यदि वह किसी विषय विशेष में कमजोर है तो स्वयं उसके विषय को पढ़कर उसे समझाकर उस विषय को उसके लिए सरल बनाने की कोशिश करें। उसका मनोबल ऊंचा बनाकर रखें। घर का पॉजीटिव माहौल रखें और जिन दिनों बच्चे की परीक्षा हो, उन दिनों अपनी सोशल एक्टिविटीज कम कर दें। घर का माहौल जितना शांत और खुशनुमा होगा, बच्चे का पढ़ाई में उतना ही ज्यादा मन लगेगा। 
बच्चे की क्षमताओं को समझें
बच्चों पर खुद की राय थोपने की जगह उनकी क्षमताओं, योग्यता, प्रतिभा को समझें और इसी के अनुरूप उनसे उम्मीद लगाएं। किसी भी विषय को उन पर हावी न करें। उसके रूझान वाले विषयों को मजबूती से तैयार कराएं और जिन विषयों में वह कमजोर है, जिनको पढ़ने से वो कतराता है, उनकी तैयारी कराने के लिए नये नये तरीके अपनाएं। खुद भी बच्चे की कमजोरी को स्वीकारें और उससे ज्यादा उम्मीद न करें। 
टेक्नोसेवी बनें
आज के दौर में पढ़ाई के तरीकों में बदलाव आ गया है। स्कूलों में भी अब ऑडियो विजुअल मैथड द्वारा बच्चों को पढ़ाया जाता है। अपने मोबाइल पर हर समय इधर-उधर बेकार की चीजें देखने की बजाय उसे यूट्यूब के माध्यम से पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। आजकल यूट्यूब पर हर किस्म की पढ़ाई, कोर्सेस के ऑप्शन मौजूद हैं। उनके लिए वर्कशीट और परीक्षा से जुड़े दूसरे संभावित प्रश्नपत्र होते हैं, जिन्हें आप डाउन लोड करके बच्चों को पै्रक्ट्सि के लिए दे सकते हैं। इसके लिए आप बच्चे की क्लास के दूसरे बच्चो के पैरेंट्स से भी इस बारे में सलाह कर सकती हैं। उनके साथ व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर अपने बच्चे की पढ़ाई से संबंधित सलाह मशविरा फोन के जरिये ले सकती हैं।
अपना पूरा समय दें
बच्चा छोटा हो या बड़ा उनको मां के सानिध्य से सबसे ज्यादा सुख मिलता है। उन्हें सिर्फ परीक्षा की तैयारी करने का आदेश देकर इधर-उधर की गतिविधियों में अगर खुद को संलग्न करती हैं तो बच्चे भी पढ़ाई के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। आप उन्हें अपना पूरा समय दें। जब आप उनके आसपास होते हैं तो उनमें अपने प्रति विश्वास जागृत होता है। जिस समय उसे पढ़ने के लिए बिठाएं, उसके साथ खुद भी बैठें। भले ही आपने घर पर ट्यूटर रखा है, इसके बावजूद उसकी पढ़ाई के प्रति जरा भी लापरवाही न बरतें। उसकी परीक्षा की तैयारी का पूरा जायजा लें और उसके पढ़ने में मदद करें ताकि वह परीक्षा में अच्छे नंबरों से पास हो सके। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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