बच्चों के साथ करें अच्छा व्यवहार
भले ही आप अपने बच्चों पर हाथ नहीं उठातीं लेकिन आप एक कठोर मां हैं। याद रखिए, बच्चों के साथ किया गया आपका सख्त व्यवहार उन्हें जो नुकसान पहुंचाता है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो पाती। सोशल साइंस एंड मेडिसन में छपे एक नए शोध के मुताबिक, ऐसी स्थिति में किसी एक पेरेंट का अच्छा व्यवहार भी बच्चों को हुए नुकसान को पूरा नहीं कर पाता।
12 से 20 साल की उम्र के बच्चों पर एक शोध किया गया जिसमें बच्चों की सेहत पर माता-पिता के व्यवहार का असर देखा गया। शोधकर्ताआें ने 451 ऐसे परिवारों में माता-पिता के व्यवहार की वीडियो टेपिंग की जिसमें घर में कोई अन्य बुजुर्ग नहीं था। सख्त व्यवहार में मारपीट, बच्चों के साथ डांट-फटकार और उनसे न बोलने को शामिल किया गया।
असल में किसी भी एक पेरेंट की डांट-फटकार का असर बच्चाें के दिमाग पर होता है। खासकर अगर यह डांट-फटकार उनके बचपन और किशोरावस्था के शुरूआती चरण में हो तो बच्चे इससे बहुत ज्यादा स्ट्रेस में आ जाते हैं। इसका सीधा असर उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है। भले ही दूसरा पेरेंट बच्चों से कितना ही प्यार से बोलें, बच्चे उस स्टे्रस से निकल
नहीं पाते। यहां तक कि वे पढ़ाई में भी पिछड़ने लगते हैं। शोध के नतीजे चौंकाने वाले थे। जो माता-पिता अपने बच्चों से सख्त व्यवहार करते थे, उनका शारीरिक स्वास्थ्य कमजोर था। वे बच्चे मोटे थे। यहां तक कि जिन पेरेंट्स में एक का व्यवहार बच्चों के साथ नर्म था और एक का सख्त (जैसा कि उनका पेरेंटिग पैटर्न था), उन बच्चों पर भी प्रभाव पहले वाले बच्चों के समान ही था। शोधकर्ता थॉमस शोफील्ड के मुताबिक, हमारे पेरेंट्स ने हमें इसी तरह से पाला है, इसलिए हम उन्हीं का मॉडल अपना रहे हैं लेकिन अब हमें स्वीकार करना होगा कि बच्चाें से सख्त व्यवहार उनके लिए बहुत ही नुकसानदायक है। आखिरकार हम अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं और उनके लिए सर्वश्रेष्ठ करना चाहते हैं। (उर्वशी)