स्वाद और स्वास्थ्य के राजा आम की कायम है बादशाहत
महान साहित्यकार हैमिल्टन ने 18वीं शताब्दी में कहा था कि गोवा का आम फलों का राजा है। लेकिन बात सिर्फ गोवा की नहीं है, हकीकत ये है कि समूचे हिंदुस्तान के आम स्वाद में फलों के राजा हैं। अल्फानसो, लंगड़ा, दशहरी, ये नाम भले आम हों, लेकिन जब जीभ में इनके स्वाद का एहसास होता है तो इनकी बादशाहत का खुद ब खुद अंदाज लग जाता है। सिर्फ भारत के लोगों को ही नहीं पूरी दुनिया के लोगों को आम पसंद है। बात सिर्फ स्वाद की क्यों की जाए, आम सेहत के मामले में भी राजा है। इसमें विटामिन ए,बी,सी,ई और के जैसे पोषक तत्व पाये जाते हैं। आम में मैग्नीशियम, पौटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट मैंगिफेरिन होते हैं, जो दिल के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। आम खाने से पाचन शक्ति में भी सुधार होता है। यह कब्ज दूर करता है और कई तरह की बीमारियों से दूर रखते हुए हमारे हृदय को मजबूत बनाता है। इसके खाने से त्वचा चमकदार रहती है और मधुमेह से लड़ने में भी मदद मिलती है।
आम पूरी दुनिया में किस तरह पसंद किया जाता है, इसका अंदाजा इसी बात से चलता है कि भारत से निर्यात होने वाला शायद आम एकमात्र ऐसा फल है, जिसका सबसे ज्यादा देशों को निर्यात किया जाता है। दो साल पहले भारत ने 176 देशों को आम का निर्यात किया था। किसी भी दूसरे फल का इतने ज्यादा देशों में निर्यात नहीं होता। वास्तव में इसलिए भी आम को फलों का राजा कहा जाता है। आम की मुरीद पूरी दुनिया है। क्या उत्तरी गोलार्ध, क्या दक्षिणी गोलार्ध। क्या विकसित देश, क्या विकासशील देश। लेकिन आम की जड़ें विशुद्ध भारतीय हैं। अंग्रेजी में आम का नाम मैंगो मलयालम से पड़ा है। मलयालम में आम को मंगा कहा जाता है। गौरतलब है कि वास्कोडिगामा सबसे पहले वर्ष 1498 में केरल के मालाबार तट पर ही पहुंचा था। यहीं पर उसका और उसके जरिये यूरोपीय दुनिया का आम से परिचय हुआ था। इसके बाद ही यूरोप के एक बड़े हिस्से तक आम पहुंचा और मलयाली मंगा, मैंगो बन गया।
ऐसा नहीं है कि दुनिया में आम सिर्फ भारत में ही होता है। लेकिन आम फल कि जो लज्जत है, जिस कारण आम फलों की दुनिया का सिरमौर बना है, उस गुणवत्ता वाला आम सिर्फ भारत में पाया जाता है। इसीलिये दुनिया के बाजार में ब्राजील या दक्षिण अफ्रीका के आम भारतीय आमों के सामने फीके साबित होते है। अमरीका में जो छिले और कटे हुए आम बिकते हैं वो मैक्सिकन आम होते हैं। लेकिन जो जनरल स्टोर से बड़ी नजाकत से खरीदकर घर लाये जाते हैं, वे भारतीय आम होते हैं। भारत में पूरे विश्व की कुल पैदावार का तकरीबन 50 से 52 प्रतिशत आम पैदा होता है। दुनिया में भारत को महात्मा गांधी, साधुओं और हाथियों के साथ-साथ आम से भी जाना जाता है। आम भारत का राष्ट्रीय फल है। हालांकि आम का उत्पादन पाकिस्तान, बंग्लादेश, नेपाल, अमरीका, फिलीपीन्स, संयुक्त अरब, अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, जाबिया, माले, ब्राजील, पेरू, केन्या, जमैका, तंजानिया, मेडागास्कर, हेती, आइवरी, कोस्ट, थाईलैंड, इण्डोनेशिया, श्रीलंका, सहित और कई देशों में होता है। लेकिन इन सब देशों के आमों में वो बात नहीं है जो हमारे आम में होती है।
जहां तक देश में आम उगाने वाले प्रांतों का सवाल है तो सबसे ज्यादा आम की खेती उत्तर प्रदेश में होती है। लेकिन उत्पादन सबसे ज्यादा आंध्रप्रदेश में होता है। आम एक ऐसा फल है जो अपनी हर अवस्था में खाया जाता है। आम की दुनिया में कोई 1200 किस्में या प्रजातियां पायी जाती है, जिसमें 90 प्रतिशत से ज्यादा प्रजातियां भारत में ही पायी जाती हैं। आम को अगर फलों के राजा होने का मान मिला है तो यूं ही नहीं मिला। आम एक ऐसा फल है जो शायद ही किसी को नापसंद हो। वेदों में आम को विलास का प्रतीक कहा गया है, तो इसका कारण इसका अद्भुत स्वाद है। आम पर हजारों कविताएं लिखी गयी हैं। हजारों कलाकारों ने अलग-अलग ढंग से आम को अपने कैनवास पर उतारा है। देश में आम को लेकर लाखों लोकगीत-लोक कहानियां मौजूद हैं। हिन्दुओं का शायद ही कोई धार्मिक संस्कार हो जिसमें आम की उपस्थिति न हो। शादी-ब्याह, हवन, यज्ञ, पूजा, कथा, त्योहार तथा सभी मंगलकार्यों में आम की लकड़ी, पत्ती, फूल, फल या कोई न कोई हिस्सा इस्तेमाल ही होता है।
आम के कच्चे फल से चटनी, खटाई, अचार, मुरब्बा आदि बनाये जाते हैं तो वहीं पके आमों से आम्र रस के साथ-साथ आम का जूस व दर्जनों दूसरे उत्पाद बनाये जाते हैं। इन सबके साथ ही पके आम खाना सबसे सुखदायक तो है ही। आम पाचक, रेचक और बलप्रद होता है। पके आम के गूदे को तरह-तरह से सुरक्षित करके भी रखते हैं। देश में हर साल कोई सवा से डेढ़ करोड़ टन आम पैदा होता है जो कि दुनिया के कुल उत्पादन का 52 प्रतिशत है। भारतीय प्रायद्वीप में आम की कृषि हजारों वर्षों से हो रही है। ईसा पूर्व चौथी या 5वीं सदी में यह पूर्वी एशिया पहुंचा। जबकि पूर्वी अफ्रीका दसवीं शताब्दी के बाद पहुंचा। आम की प्रजातियों का निर्धारण मूलत: उनकी अपनी एक विशिष्ट महक और स्वाद से तय होती है। प्रजातियों के हिसाब से हापुस या अलफांसो देश का सबसे सुंदर और स्वादिष्ट आम है। इसकी विदेशों में बहुत मांग है इस कारण भी यह बहुत महंगा होता है। मार्च में आ जाने वाला हापुस शुरू में 800 से 1200 रूपये दर्जन तक बिकता है। इसके अलावा देश की और कई मशहूर आम प्रजातियों में से नीलम, बादाम, तोतापरी, लंगड़ा, सिंदूरी, दशहरी, रत्नागिरी केसरिया, लालपत्ता आदि हैं।
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