पंजाब के लिए चुनौतीपूर्ण ही रहेगा वर्ष 2026
खुदा करे कि नया साल खुश ़़िखयाम आए,
लिये ़खुशी का मोहब्बत का इक पैगाम आए।
-नौशा असरार
आज वर्ष 2026 के पहले दिन ये सरगोशियां लिख रहा हूं। इसलिए अजीत समाचार के प्रमुख पाठकों को, समूह पंजाबियों तथा विश्व के प्रत्येक बशर को नववर्ष मुबारक। वर्ष 2025 तो विश्व स्तर पर बड़ी सीमा तक निराशाजनक ही रहा कहा जा सकता है, क्योंकि इस वर्ष में अच्छी घटनाएं कम हुई हैं, बुरी अधिक। पूरा वर्ष तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनते ही गुज़रा है। रूस-यूक्रेन युद्ध जारी रहा, इज़रायल-हमास युद्ध जारी रहा। हज़ारों निर्दोष तथा गुनहगार मारे गए। सूडान की घरेलू जंग में हज़ारों की मौत, ईरान-इज़रायल में टकराव भी जारी है, म्यांमार, कांगो, मैक्सिको, बांग्लादेश के आंतरिक हालात, गैंगवारों, टकराव तथा बगावतों का दौर, थाईलैंड-कम्बोडिया युद्ध तथा विश्व के कई अन्य देशों में आपसी टकराव, कैलिफोर्निया में जंगल की आग, भारत में भीषण बाढ़ ने पंजाब, हिमाचल, दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों तथा इंडोनेशिया को हिला कर रख दिया। पहलगाम का आतंकवादी हमला, भारत-पाक युद्ध, हवाई दुर्घटनाएं, अमरीका से भारतीयों तथा अन्य लोगों को देश निकाला, भारत तथा कई अन्य देशों से अमरीका का टैरिफ युद्ध। कई अन्य देशों में युद्ध के आसार जैसे चीन-ताइवान, दोनों करियाई देशों में तनाव आदि तथा बढ़ती महंगाई के साथ-साथ विश्व-मंदी का आहट कुछ ऐसी घटनाएं हैं जो वर्ष 2025 में उदास ही करती रहीं। चाहे कुछ अच्छे काम भी हुए हैं, जैसे नए वैज्ञानिक अनुसंधान, ए.आई. की तेज़-तरार उन्नति, दवाइयों की खोजें, कुछ देशों में नए समझौते, परन्तु मुख्य रूप में यह वर्ष उदासी तथा निराशा भरा ही रहा। पंजाब के लिए भी वर्ष 2025 खुशियों से निराशा अधिक लाया था। जहां बाढ़ ने पंजाब का हज़ारों करोड़ का नुकसान किया, वहीं केन्द्र सरकार इसका मुआवज़ा देने तथा समय पर सहायता पहुंचाने में विफल रही। नि:संदेह यह अच्छी बात है कि लोगों ने स्वयं अपने भाइयों की खूब मदद की। भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंध भी उदासी तथा निराशा का ही सबब बने हैं। बांग्लदेश, पाकिस्तान तथा चीन का गठजोड़ भारत के लिए बड़ा खतरा है। फिर जब तक भारत के पाकिस्तान के साथ संबंध सामान्य नहीं होते, पाकिस्तान से व्यापार हेतु सीमा नहीं खुल सकती। और भारत-पाक सीमा के ज़रिये व्यापार न होना पंजाब के लिए किसी श्राप से कम नहीं है। नि:संदेह गुरुपर्व पर सिख श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान गया, परन्तु श्री करतारपुर साहिब गलियारा बंद रहना भी उदासी तथा निराशा का प्रतीक है। केन्द्र ने 2025 में भी पंजाब की परम्परागत मांगों पर कोई हमदर्दी वाला रवैया नहीं अपनाया, अपितु कई नये शिगूफे छोड़ कर पंजाबियों को निराश ही किया। चंडीगढ़ को सदैव के लिए केन्द्रीय प्रदेश बनाने के यत्न, पंजाब यूनिवर्सिटी का मामला तथा अन्य कई ऐसे मामले हैं जहां सरकार को पंजाबियों के दबाव के कारण पीछे हटना पड़ा। पंजाब सरकार द्वारा पहले लैंड पूलिंग नीति, फिर पंचायती ज़मीनों की बिक्री के यत्नों ने पंजाबियों को निराश ही किया है। केन्द्र के बीज बिल, बिजली बिल तथा ‘वीबी-जी आर.ए.एम. जी’ बिल भी जनहितों तथा संघात्मक ढांचे को कमज़ोर करने के प्रयासों का हिस्सा ही है। नि:संदेह भारत तथा पंजाब में अच्छी बातें भी हुईं, परन्तु जब बुरा प्रभाव अधिक हो तो अच्छी बातों का ज़िक्र स्वाभाविक रूप में दब जाता है। अच्छी बातों में से केन्द्र सरकार तथा अन्य भाजपा सरकारों द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी शताब्दी तथा साहिबज़ादों के संबंध में देश तथा विश्व भर में आयोजित किए गए समारोहों ने सिख इतिहास को प्रचारित करने का जो कार्य किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। चाहे ‘वीर बाल दिवस’ के नाम पर टकराव जारी है, चाहे इसकी आशा नहीं, परन्तु फिर भी दुआ है कि वर्ष 2026 वर्ष 2025 की तरह निराशा तथा उदासी भरा न हो, अपितु विश्व में युद्धों, आर्थिक लड़ाइयों, भुखमरी, ज़ुल्म तथा अन्य मुश्किलों से लोगों को निजात दोने वाला वर्ष हो। काश! नया वर्ष केन्द्र को पंजाब की लम्बित मांगों के लिए ईमानदारी से चलने का ढंग लेकर जाए तथा सरकार संघवाद के खात्मे तथा एकात्मकवाद की सोच से पीछे हटे। सबको न्याय मिले—आमीन।
ना कोई रंज का लम्हा किसी के पास आए,
़खुदा करे कि नया साल सब को रास आए।
—फरियाद आज़र
वर्ष 2026 में पंजाब के लिए चुनौतियां
यहां आवाज़ को अपनी उठाना भी चुनौती है,
कि हक कहने की हिम्मत को जुटाना भी चुनौती है।
—मनोज झा
वर्ष 2026 पंजाब के लिए कोई आसान वर्ष नहीं रहेगा। चलो, पंजाब की बात नहीं करते, अपितु पंजाब सरकार तथा सत्तारूढ़ पार्टी को दरपेश चुनौतियों की बात करते हैं। इस समय गम्भीर आर्थिक, पर्यावरणीय, सामाजिक तथा राजनीतिक चुनौतियां हैं। राज्य पर ऋण तेज़ी से बढ़ रहा है। मुफ्त बिजली तथा अन्य सब्सिडियां पंजाब की आर्थिकता की कमर तोड़ रही हैं। कृषि क्षेत्र संकट में है, परन्तु पंजाब में गेहूं-धान के फसली चक्र में बदलाव की कोई सम्भावना नहीं दिखाई देती। भू-जल का अंधाधुंध इस्तेमाल पंजाब को धीरे-धीरे रेगिस्तान बनने की ओर धकेल रहा है।
पंजाब का वित्तीय घाटा तथा ऋण सबसे भयावह दौर में प्रवेश कर चुका है। 1980-81 में सिर्फ 1009 करोड़ का ऋण 2026 में 4 लाख, 17 हज़ार करोड़ पर पहुंच जाने के आसार हैं। पंजाब ऋण की राशि के लिहाज़ से ऊपर से छठे-सातवें स्थान पर है, परन्तु जी.एस.डी.पी. के समान ऋण के लिहाज़ से देश में दूसरा सबसे बड़ा ऋणी राज्य है। इस लिहाज़ से अरुणाचल प्रदेश पहले स्थान पर है। पंजाब पर ऋण उसकी जी.एस.डी.पी. का 45 से 46 प्रतिशत के मध्य है जो खतरे की घंटी जैसा है।
केन्द्र द्वारा फंड रोकने के कारण भी पंजाब का वित्तीय संकट बढ़ रहा है। आर.डी.एफ. तथा एच.आर. एम. के पैसे भी पंजाब को नहीं मिल रहे। नि:संदेह पंजाब सरकार शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में अच्छा काम कर रही है, परन्तु अभी भी यह कार्य बहुत कम है। विशेषकर पंजाब में 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा करना अच्छी बात है, परन्तु यह सबको पता है कि इसमें कितने चोर रास्ते रोकने की ज़रूरत है। दूसरा यह सिर्फ रजिस्टर्ड किए गए अस्पतालों के लिए नहीं अपितु राज्य के प्रत्येक अस्पताल के लिए ही इस स्वास्थ्य बीमा को मानना ज़रूरी करार दिया जाए तभी इसका कोई वास्तव तथा क्रियात्मक लाभ होगा। पंजाब में आई बाढ़ ने एक और डर पैदा कर दिया है कि जिस प्रकार जलवायु में परिवर्तन हो रहा है, कहीं यह बाढ़ आना भी प्रत्येक वर्ष का घटनाक्रम न बन जाए। इसलिए सरकार को अभी से ही इस बारे में व्यापक नीति बनाने की ज़रूरत है जबकि पहले आई बाढ़ से हुई तबाही से राहत देने तथा पुनर्निर्माण का कार्य भी अभी अधूरा ही है जबकि विदेशों में रहते भारतीयों में आपसी टकराव के समाचार भी चिन्ताजनक हैं। एक ओर हिन्दू-सिखों में सद्भाव कम हो रहा है और दूसरी ओर उन देशों में भी कथित राष्ट्रवाद की भावना बढ़ रही है। पंजाब में सिखों के लिए एक और चुनौती भी सामने है कि यदि 2026 में जनगणना हुई तो इस बात की आशा बहुत ज़्यादा है कि पंजाब में सिख समुदाय 56 प्रतिशत से काफी नीचे आ सकता है और यह ग्राफ लगातार गिर रहा है। हालांकि केन्द्र सरकार सिख धर्म तथा इतिहास के प्रति विशेष रूप में प्रेम दिखा रही है, परन्तु देश स्तर पर उच्च नौकरियों तथा नियुक्तियों में सिखों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। पंजाब की हालत पर नश्तर खानकाही का यह शे’अर बिल्कुल सही चरितार्थ होता है :
चुनौती देने लगती हैं नई दुश्वारियां हम को,
स़फर जब ज़िन्दगी का हम पे आसां होने लगता है।
-1044, गुरु नानक स्ट्रीट, समराला रोड, खन्ना
-मो. 92168-60000



