ट्रम्प की मनमानी का विरोध
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दक्षिणी (लातीनी) अमरीका के एक छोटे देश वेनेजुएला पर आक्रमण कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बनाकर अमरीका ले गये। इस घटना की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी आलोचना हो रही है। रूस और चीन ने खुलेआम ट्रम्प के इस कृत्य के लिए आलोचना की है। भारत की भी असहमति है। वहीं यूरोपियन संघ के अधिकांश देश उसकी आलोचना कर रहे हैं। अमरीका में भी विरोध का स्वर उठ रहा है। वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा और मैक्सिको को भी ट्रम्प ने धमकी देते कहा है कि अमरीका के पड़ोसी क्यूबा, मैक्सिको और दक्षिण अमरीका के देश कोलंबिया के नेताओं का मादुरो जैसा हश्र हो सकता है। ये सभी देश अमरीका के लिए परेशानियां पैदा कर रहे हैं। मादुरो-सिलिया को न्यूयॉर्क की सबसे बदनाम जेल में रखा गया है।
जब विश्वनाथ प्रताप सिंह की अनिश्चित भविष्य वाली सरकार थी और इन्द्र कुमार गुजराल विदेश मंत्री थे। सरकार ज्यादा लम्बी नहीं चल सकी परन्तु दमखम वाली थी। 1989 में पनामा के राष्ट्रपति मैनुअल नोरिएगा को भी इसी तरह बंधक बनाकर अमरीका ले जाया गया था तब विदेश मंत्री गुजराल ने संसद में अमरीकी हस्तक्षेप की खुलकर निंदा की थी। यह कार्य भाजपा सरकार करने में हिचकिचाहट में रही। जो ग्यारह महीने नहीं ग्यारह साल से केन्द्र में है।
वेनेजुएला पर अमरीकी कार्रवाई की दो बड़ी वजह बताई जा रही हैं तेल का भंडार और डॉलर। वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल, दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। यह सऊदी अरब से भी अधिक है। देश ने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर अमरीकी कम्पनियों के प्रभाव को कम कर दिया। बताया गया है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे कुछ बॉडीगार्ड्स को अमरीकी खुफिया एजेंसियों ने एक साल से अधिक सम्पर्क में रखा और करोड़ों डॉलर, परिवार की सुरक्षा और नई पहचान का लालच दिया। फिर एक सुरक्षित ठिकाने पर छापा मारा जहां बॉडीगार्ड्स ने प्रतिरोध नहीं किया। मादुरो को 12 मिनट में वहां से निकाल लिया। लेकिन धर पकड़ लूट का यह तरीका जायज़ नहीं कहा जा सकता। ऐसे तो छोटे देश मरने के लिए तैयार रहें। कमला हैरिस पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरीका ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा-यह तरीका अवैध और असमझदारी भरा बताया है। इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्र अस्थिर हो सकता है। हमें इतिहास से सीखना चाहिए कि ‘तेल या शासन परिवर्तन’ के नाम पर हस्तक्षेप अराजकता लाता है न कि शांति। इस पर भी ट्रम्प अपने आपको नोबेल शांति पुरस्कार के पहले हकदार मानते हैं।
ट्रम्प पहले कार्यकाल में भी मादुरो से नाराज़ रहे थे बाद में उनकी गिरफ्तारी का इनाम बढ़ाते हुए 5 करोड़ डॉलर कर दिया। मादुरो ने इसकी प्रतिक्रिया में चीन से तेल और रूस से हथियार खरीद की नीति अपनाई जिससे ट्रम्प की नाराज़गी और बढ़ गई। माना जा रहा है वेनेजुएला सरकार के अंदर के लोगों ने ही बड़ी इनामी राशि के लालच में अमरीकी सेना को मादुरो के महल तक पहुंचा दिया। लेकिन अगर ड्रग का धंधा चलाने की यह सज़ा है तो जिस पाकिस्तान को सबूत सहित यू.एन. से लेकर स्वयं अमरीका ने आतंकी पनाहगार माना है, उसके सबसे मुखर चेहरे मुनीर को किस जेल में होना चाहिए।
मुनीर को पाकिस्तान का अघोषित तानाशाह बनने में मदद किस प्रजातांत्रिक मूल्य की रक्षा कही जाएगी? दूसरे अब आप रूस के यूक्रेन पर हमले या चीन के ताइवान पर दावे को कैसे गलत ठहरा सकते हैं। ज़ाहिर सी बात है कि ट्रम्प के इस कदम की विश्व भर में निंदा होने लगी है। ट्रम्प इस पर विचार भी नहीं कर रहे।



