भारतीय नेताओं का नया कारनामा
दावोस जाकर अपनी कम्पनियों से ही समझौते
दावोस स्विट्ज़रलैंड में विश्व आर्थिक मंच की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल कई वजहों से मजाक का विषय बना। इस प्रतिनिधिमंडल में चार केंद्रीय मंत्री, छह मुख्यमंत्री और उनके भारी भरकम लाव-लश्कर के साथ ही सौ से ज्यादा बड़े कारोबारी भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा मजाक इस बात को लेकर हो रहा है कि भारत से पहुंचे केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और कारोबारियों ने वहां आपस में ही निवेश के करार किए हैं। न तो सरकारों का करार विदेशी कंपनियों के साथ होता दिखा है और न देसी कंपनियों का करार दुनिया के दूसरे देशों के साथ करार हुआ है। दावोस से जो तस्वीरें आई हैं उनमें दो की बड़ी चर्चा है। एक तस्वीर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की लोढ़ा समूह के साथ करार करने की है तो दूसरी तस्वीर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की टाटा समूह के साथ करार की है। इसमें फड़नवीस और लोढा समूह का मामला बेहद दिलचस्प है। गौरतलब है कि लोढ़ा समूह के प्रमोटर मंगल प्रभात लोढ़ा भाजपा नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं और मुंबई में ही मुख्यमंत्री के निवास से कुछ दूरी पर रहते हैं। इसीलिए सोशल मीडिया में लोग पूछ रहे हैं कि क्या मुंबई का ट्रैफिक इतना ज्यादा है कि मुख्यमंत्री और लोढ़ा के बेटे को दावोस जाकर समझौता करना पड़ा। महाराष्ट्र सरकार ने वहां अदाणी समूह के साथ भी छह लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स के एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। उधर झारखंड सरकार ने टाटा समूह के साथ 11 हजार करोड़ रुपये का एक एमओयू साइन किया है। सोचने वाली बात है कि टाटा समूह की सबसे बड़ी इस्पात फैक्टरी झारखंड में है लेकिन झारखंड सरकार दावोस जाकर करार कर रही है।
छोटे देशों पर दबाव
विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपनी रील्स के लिए बहुत चर्चित रहे हैं। आंखों से लेजर लाइट निकलने वाली उनकी रील्स भाजपा इकोसिस्टम के लोग खूब शेयर करते हैं लेकिन जयशंकर अपने तेवर दिखाने के लिए बड़ी सावधानी से देशों का चयन करते है। अभी उन्होंने पोलैंड के सामने तेवर दिखाए। पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री भारत के दौरे पर थे तो जयशंकर ने उनसे कहा कि उनका देश पाकिस्तान के साथ ज्यादा नज़दीकी दिखा रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवादियों के इकोसिस्टम को प्रमोट करता है और भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियां चलवाता है। उन्होंने पोलैंड को इससे दूर रहने को है लेकिन ऐसे ही तेवर जयशंकर अमरीका, रूस और चीन के सामने नहीं दिखाते हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान से इन दिनों सबसे ज्यादा करीबी अमरीका दिखा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को बुला कर व्हाइट हाउस में सम्मानित किया। मुनीर को ट्रम्प ने लंच कराया और महान जनरल बताया। चीन और रूस से भी पाकिस्तान की दोस्ती खूब बड़ी हुई है। चीन तो पाकिस्तान को अपना ऑल वेदर फ्रेंड बताता है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उसने खुल कर पाकिस्तान की मदद की थी लेकिन भारत की ओर से जिस तरह की चेतावनी पोलैंड को दी गई वैसी चेतावनी कभी भी अमरीका चीन और रूस को नहीं दी जाती है। भारत द्वारा नहीं कहा जाता है कि ऐसा मत करो क्योंकि पाकिस्तान आतंकवादी देश है। हमारे विदेश मंत्री के सारे तेवर छोटे देशों के लिए आरक्षित हैं।
राज्यपाल की अलग राजनीति
एक तरफ तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि हैं जो अभिभाषण पढ़े बगैर ही विधानसभा से निकल जाते हैं तो इस बार केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने अलग ही कमाल किया। उन्होंने अभिभाषण पढ़ा लेकिन उसके दो हिस्से छोड़ दिए और चले गए। उनके चले जाने के बाद सरकार की ओर से बताया गया कि राज्यपाल ने पैरा नंबर 12 का शुरुआती हिस्सा और पैरा नंबर 15 का आखिरी हिस्सा नहीं पढ़ा है। इन दोनों पैराग्राफ में केंद्र सरकार की और उनकी खुद की आलोचना की गई है। उनके चले जाने के बाद इसे पढ़ा गया और सदन की कार्यवाही में शामिल किया गया। सोचने वाली बात है कि इस तरह की बातों से क्या हासिल होता है? बहरहाल, पैराग्राफ नंबर 12 में सरकार ने लिखा है कि केरल में कई तरह के नीतिगत सुधार हुए हैं लेकिन तमाम नीतिगत और संस्थागत उपलब्धियों के बावजूद केंद्र सरकार के विपरीत कदमों से केरल को वित्तीय मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं। इसमें आगे कहा गया है कि केंद्र सरकार का रवैया संघवाद के खिलाफ है। इसके बाद पैरा 15 में विधानसभा में पारित हुए विधेयकों को रोके जाने का जिक्र है। गौरतलब है कि केरल में कई बार इसको लेकर टकराव हुआ है। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची है। पिछले राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के समय से ऐसा हो रहा है कि विधानसभा से पारित हुए कई विधेयक राजभवन में अटक जाते हैं। केरल सरकार का कहना है कि इससे जन कल्याण के काम प्रभावित होते हैं।
ईडी बनाम पुलिस
हाल के दिनों की दो घटनाएं और उन पर दो अदालतों का निर्देश यह संकेत देता है कि केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी पवित्र गाय है। वह जो चाहे करे, उसे करने की इजाजत है लेकिन अगर कोई उसके खिलाफ कुछ करेगा तो उसकी खैर नही है। एक मामला पश्चिम बंगाल का है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने और दूसरा मामला झारखंड का है, जिसमें हाईकोर्ट ने आदेश दिया है। असल में झारखंड में ईडी की टीम ने राज्य सरकार के एक कर्मचारी को पूछताछ के लिए बुलाया। बाद में कर्मचारी ने ईडी पर मारपीट करने का आरोप लगाया, जिसे लेकर राज्य की पुलिस ने केस दर्ज किया। वह व्यक्ति सचमुच घायल हुआ था लेकिन ईडी के वकील की याचिका पर हाईकोर्ट ने एफआईआर पर रोक लगा दी और झारखंड पुलिस को फटकार भी लगाई। ऐसे ही कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रबंधक के कार्यालय पर ईडी की छापेमारी के दौरान हुए घटनाक्रम का मामला है। उस मामले में राज्य की पुलिस ने ईडी के अधिकारियों, कर्मचारियों पर केस दर्ज किया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस एफआईआर पर भी रोक लगा दी है। पहले भी इस तरह के मामले जब भी आए हैं और तब अदालतों ने ईडी को दूसरी एजेंसियों के ऊपर प्राथमिकता दी है। हालांकि ईडी को लेकर कई बार अदालतों ने सख्त रुख दिखाया है और उसके कामकाज पर सवाल उठाए हैं लेकिन दूसरी एजेंसियों के साथ विवाद की स्थिति में हमेशा ईडी को प्राथमिकता मिली है।
नेताओं की सड़कछाप भाषा
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की स्तरहीन भाषा से तो दुनिया वाकिफ ही है। वेनेजुएला के बंधक बनाए गए राष्ट्रपति का भी उन्होंने सड़कछाप भाषा में मजाक उड़ाया है। दुनिया के दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों के लिए भी वे अपमानजनक और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल करते ही रहते हैं। अब उन्हें दूसरे देशों के नेता भी उनकी ही भाषा में जवाब देने लगे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प को परोक्ष रूप से गुंडा कहा है। ग्रीनलैंड पर कब्जा करने संबंधी ट्रम्प के धमकी भरे बयानों के संदर्भ में मैक्रों ने कहा है कि दुनिया अब गुंडा युग की ओर बढ़ रही है और फ्रांस इस गुंडागर्दी का मुकाबला करेगा। इसी तरह यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लियेन ने थोड़ी सभ्य भाषा में कहा कि वे कसम खाती हैं कि यूरोप की प्रतिक्रिया बिना डरे बराबरी की होगी। उन्होंने कहा है कि ये सब जो बढ़-चढ़ कर बयानबाजी कर रहे हैं, थोड़े दिन बाद सबके सब अपने मालिक यानी ट्रम्प की प्रशंसा करते दिखेंगे। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ‘घर में घुस कर मारूंगा’, या ‘मिट्टी में मिला दूंगा’ जैसे डायलॉग बोलते रहते हैं। जो अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं।





