भारत में सोने की नदी कहां है ?
‘दीदी, हमारे जीवन में नदियों का महत्व क्या है?’
‘नदियां हमेशा से ही सभ्यताओं की जीवन रेखा रही हैं। वह पीने के लिए पानी देती हैं और खेतों की सिंचाई करती हैं। कुछ नदियां अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विख्यात हैं, जबकि अन्य उपजाऊ ज़मीनों और अपने संग ले चलने वाले संसाधनों के लिए जानी जाती हैं। वह संस्कृति को आकार देती हैं, कृषि में सहयोग करती हैं और लोगों को इतिहास से जोड़ती हैं, जिससे कुछ नदियां जिस क्षेत्र में बहती हैं उसके जीवन व अर्थव्यवस्था के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती हैं। लेकिन क्या तुम्हें मालूम है कि भारत में एक नदी ऐसी भी है जिसे सोने की नदी कहते हैं?’
‘सोननदी।’
‘नहीं। यह तो तुमने सोने से सोन का तुक्का मार दिया।’
‘फिर?’
‘सुवर्णरेखा नदी।’
‘यह कहां बहती है?’
‘यह रांची के निकट नागरी गांव से शुरू होती है, वैसे इसका असल स्रोत रानी चुअन है जो झारखंड में रांची से लगभग 15 किमी की दूरी पर है। छोटा नागपुर पठार से निकलने वाली नदी में पानी मुख्यत: बारिश से आता है यानी ग्लेशियरों से नहीं आता है।’
‘सुवर्णरेखा रांची से फिर किधर को बहती है?’
‘सुवर्णरेखा पूर्वी भारत में लगभग 474 किमी बहती है। रास्ते में यह सुंदर लैंडस्केप से गुज़रती है, जिसमें हुंडरू झरना भी शामिल है, जहां यह नदी 98 मीटर से नीचे गिरती है। यह नदी तीन राज्यों झारखंड, पश्चिम बंगाल व ओडिशा में बहती है। अन्य नदियों के विपरीत जो बड़ी नदियों में समा जाती हैं, सुवर्णरेखा स्वतंत्र बहती है और ओडिशा में तल्सारी के निकट बंगाल की खाड़ी में सीधे गिर जाती है।’
‘सुवर्णरेखा को सोने की नदी क्यों कहते हैं?’
‘दरअसल, स्वर्ण से सुवर्ण शब्द बनाया गया है, जिसका अर्थ है सोना। सुवर्णरेखा औरिफेरस है।’
‘मतलब।’
‘प्राकृतिक रूप से इसके रिवरबेड (नदी का ताल) में सोना मौजूद है। इसका अधिकतर सोना प्लेसर गोल्ड के रूप में है जोकि सूक्ष्म दाने होते हैं, अक्सर चावल के दाने से भी छोटे। नदी की कुछ शाखाएं जैसे कारकरी नदी भी सोने के अंश लेकर बहती है, जो पास की पहाड़ियों से बहकर आती हैं।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



