हस्त शिल्पियों का अनूठा संगम है सूरजकुंड का मेला

देश ही नहीं दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर भी अपना अलहदा स्थान बना चुका है हरियाणा का सूरजकुंड का हस्तशिल्प मेला। इसी वजह से आज यह मेला अंतर्राष्ट्रीय ख्याति अर्जित कर चुका है।
सूरजकुंड का भी अपना रोचक इतिहास रहा है। बारदिक परम्परा के अनुसार यहां तोमर वंश के राजाओं का राज्य रहा है जो अरावली पर्वतमाला के समीप रहते थे। बाद में वे लालकोट के नज़दीक सूरजकुंड में आकर बस गए। इतिहासविदों का मानना है कि राजा सूरजमल के नाम से ही सूरजकुंड ने अपनी पहचान बनाई। यहां स्थिति पानी की झील राजा ने अपनी बेटी हेतु बनवाई थी, जिसे बाद में फिरोजशाह तुगलक ने सरोवर की सीढ़ियों व छतों को बनाकर इसे खूबसूरती प्रदान की थी। यह सरोवर अर्द्धगोलाकार आकृति का है। यहां पूर्व दिशा में सूर्य मंदिर भी है। सूरजकुंड मेले में देश के कौन-कौने से हस्तशिल्पी यहां आकर अपने हुनर को दर्शकों के बीच प्रदर्शित करते हैं। यहां न केवल भारत से ही नहीं बल्कि सार्क देशों की भी हस्तशिल्प कला के दर्शन होते हैं।
इस भव्य मेले के सौन्दर्य को बढ़ाने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से हस्तशिल्पी साड़ियां, सूरत से बने उत्पाद, तरह-तरह की बनी कलाकृतियां, मधुबनी पेंटिग्स, सीप व मोतियों तथा झालरों से बनी कांस्य व पीतल की नक्काशी दार मूर्तियां, गुजरात के कच्छ भुज की टाई एण्ड डाई, गुजराती शॉल, लेडीज सूट व सोफा कवर, राजस्थान के जोधपुर व जयपुर की बंधेज साड़ियां, खान-पान की लजीज वस्तुएं भी यहां आसानी से उपलब्ध हो जाती है। काष्ठकला के लिए मशहूर सहारनपुर का काम कश्मीर की कशीदाकारी किये हुए ऊनी वस्त्रों के अलावा दक्षिण भारत की हस्त कलाएं भी अब मेले में दिखती है। जोधपुर की विश्व प्रसिद्ध मोजड़ियां भी यहां मिलती है।
इस बार पहली मर्तबा सूरजकुंड मेले में पूर्वर्वोत्तर भारत की कला संस्कृति को विशेष तौर पर प्रदर्शित किया जायेगा। अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ, असम के कामाख्या मंदिर, मेघालय की खासी हिल्स जैसे पर्यटक स्थलों की झलक के साथ-साथ पूर्वोत्तर के आठ राज्यों की कला-संस्कृति, वेशभूषा, खानपान तथा लोककला, विशेष आकर्षण के केंद्र होंगे। प्रतिवर्ष मेले में पर्यटकों की संख्या 10 लाख से ऊपर पहुंच जाती है। इस अंतर्राष्ट्रीय मेले में 45 देशों के कलाकार शामिल होंगे, जिसमे मिस्त्र कंट्री पार्टनर भी होंगे। उप-राष्ट्रपति मेले का शुभारम्भ करेंगे। 
पंद्रह दिवसीय सूरजकुंड मेले में जैसलमेर व बाड़मेर की कशीदाकारी से बने वस्त्रों की सुनहरी व रूपहली सज्जा भी मन मोह लेती है। हाट बाज़ार की वस्तुओं से सजा-धजा व हस्तकला वस्तुओं के प्रदर्शन से सराबोर मेला देशी-विदेशी हस्तशिप्लियों व शिल्पकारों के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंच का रूप ले चुका है। जहां न केवल कला-संस्कृति को ही बढ़ावा मिलता है अपितु प्रेम व भाईचारे का भी संदेश मिलता है। मेले का आयोजन पर्यटन विभाग व मेला प्राधिकरण द्वारा किया जाता है।

मो. 82094.74266 

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