बेहद गम्भीर है लोगों के निरन्तर लापता होने का मामला
देश की राजधानी दिल्ली में साल 2026 की शुरुआत बेहद चिंताजनक रही है। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 1 से 15 जनवरी, 2026 के बीच 800 से ज्यादा लोग लापता हुए हैं। यानी लगभग प्रतिदिन 54 लोग गायब हो रहे हैं। इन लापता लोगों में सबसे ज्यादा 509 महिलाएं और लड़कियां हैं। आंकड़ों के अनुसार राजधानी में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है। यह स्थिति उस शहर के लिए बेहद गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां पहले से ही कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार अब तक केवल 235 लोगों का ही पता लगाया जा सका है जबकि 3 फरवरी तक 572 लोग ऐसे थे, जिनके बारे में पुलिस के पास कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
दिल्ली पुलिस में दर्ज रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि नाबालिगों में किशोरियों (12-18 वर्ष) का अनुपात बहुत अधिक होता जा रहा है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो गई है कि ये केवल प्रतिदिन के खो जाने के मामले ही नहीं हैं, कुछ मामलों में अपहरण या अन्य अपराधी गतिविधियों का भी खतरा हो सकता है। देश की राजधानी में रोज़ाना 50 से ऊपर लोग लापता होना सिर्फ आकड़ों का खेल नहीं है बल्कि यह लोगों की सुरक्षा, सामाजिक जागरूकता और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी पर बड़े सवाल खड़े करता है। ये आंकडे स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि दिल्ली में सुरक्षा की चुनौतियां गम्भीर रूप ले चुकी हैं।
दिल्ली पुलिस आंकड़ों के अनुसार कुल 2026 के शुरुआती 15 दिनों में 807 लोग लापता दर्ज किए गए। वयस्कों के मामलों में 616 लोग लापता हुए, जिनमें 181 का पता चला (90 पुरुष और 91 महिलाएं) जबकि 435 वयस्क अभी भी लापता हैं। वहीं नाबालिगों के 191 मामले सामने आए, जिनमें से 48 बच्चों को ट्रेस किया गया (29 लड़कियां और 19 लड़के) जबकि 143 नाबालिग अब तक नहीं मिले हैं।
गायब होने वालों में महिलाओं और बच्चों की बढ़ती संख्या ने मानव तस्करी, अपहरण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकटों की आशंका को गहरा कर दिया है। ये आंकड़े केवल सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के असहनीय दर्द और समाज में बढ़ती असुरक्षा की परतों को भी उजागर करते हैं। यह स्थिति हालात की गंभीरता को उजागर करती है। दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी लापता लोगों से जुड़ी जानकारी सालाना आधार पर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट से मिलती रही है। अब तकनीक और केंद्रीकृत रिपोर्टिंग प्रणालियों के चलते ये आंकड़े तेज़ी से उपलब्ध हो रहे हैं। दिल्ली में लापता लोगों की समस्या कई वर्षों से चिंता का विषय बनी हुई है। वर्ष 2025 में दिल्ली से कुल 24,508 लोग लापता हुए थे। इनमें 14,870 यानी 60 फीसदी से अधिक महिलाएं थीं। विगत दस वर्षों में दिल्ली से लगभग 2.51 लाख लोग गायब हुए हैं और इनमें से करीब 52,000 लोगों का आज तक कोई पता नहीं चल सका है। बता दें कि एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2023 में पूरे भारत में लगभग 8.68 लाख लोग लापता हुए थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली जैसे बड़े शहरी केंद्रों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है। वर्ष 2024 में दिल्ली में लापता नाबालिगों की संख्या 5,846 थी, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 6,284 रहा था।
पुलिस अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत करने पर इसके पीछे कई कारण सामने आते हैं। इनके अनुसार मौसमी पलायन, आर्थिक दबाव, बेरोज़गारी, पारिवारिक विवाद, घरेलू शोषण, मानव तस्करी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं गुमशुदगी के मामलों को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कैलेंडर वर्ष और वित्तीय वर्ष की शुरुआत में हमने देखा है कि परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है, कई लोगों की नौकरियां छूटती हैं, फिर कज़र् और पारिवारिक कलह जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं। महिलाओं और लड़कियों के मामले में घरेलू हिंसा, प्रेम प्रसंग और ट्रैफिकिंग बड़ा कारण है।
एनसीआरबी की 2023 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में लापता महिलाओं में से लगभग 20 से 25 प्रतिशत महिलाएं मानव तस्करी का शिकार होती हैं। दिल्ली में प्रवासी आबादी बड़ी संख्या में रहती है और इन्हीं समुदायों से गुमशुदगी के मामले अधिक दर्ज होते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार नेपाल और बांग्लादेश से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क दिल्ली को अपना हब बनाते हैं, जिससे हालात और जटिल हो जाते हैं।
इतनी स्पष्ट जानकारी होने के बावजूद पुलिस इन मामलों को प्रभावी ढंग से रोक क्यों नहीं पा रही? इस पर पुलिस अधिकारी का कहना है, ‘आबादी के हिसाब से प्रभावी पुलिसिंग के लिए हमारे पास संसाधन नहीं हैं। इसके बावजूद पुलिस इस दिशा में अच्छा काम कर रही है। साल के शुरुआती 15 दिनों में लोगों के गायब होने के जिन आंकड़ों का हवाला दिया गया है, उनमें से तकरीबन 30 प्रतिशत का पता दिल्ली पुलिस ने लगा लिया।
दिल्ली में लापता होते लोग केवल एक प्रशासनिक चुनौती नहीं हैं, बल्कि यह संकट शहरी असमानता, सामाजिक असुरक्षा, अपर्याप्त संसाधनों, कमजोर कानून व्यवस्था को भी उजागर कर रहा है। खासकर नाबालिग लड़किओं की बड़ी तादाद में गायब होना उनके पीछे लवजेहाद, अवैध मानव तस्करी का अंदेशा है। इस ओर गंभीर ध्यान देना होगा वरना असामाजिक तत्वों का बुना जाल नाबालिग बालक-बालिकाओं के जीवन को अंधेरे में धकेलता रहेगा।
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