अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटके बाद बढ़ी ट्रंप की मुश्किलें, अब 133 अरब डॉलर लौटाने की चुनौती

वाशिंगटन, डी.सी, 21 फरवरी - अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे बड़े टैरिफ वाले फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रंप ने जिस आपातकालीन कानून का इस्तेमाल करके दुनिया भर के देशों पर आयात टैक्स लगाया था, वह कानूनी रूप से सही नहीं था। कोर्ट का कहना है कि आयात पर टैक्स लगाने का अधिकार राष्ट्रपति नहीं बल्कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के पास होता है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि सरकार ने जो करीब 133 अरब डॉलर (लगभग 11 लाख करोड़ रुपये) टैरिफ के रूप में पहले ही वसूल कर लिए हैं, उनका क्या होगा। बड़ी-बड़ी कंपनियां अब अपने पैसे वापस मांग रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आखिरकार कंपनियों को रिफंड मिल सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया बहुत लंबी, जटिल और विवादों से भरी रहने वाली है।

जानकारों के मुताबिक, रिफंड का फैसला अमेरिकी कस्टम विभाग, इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट और अन्य अदालतों के जरिए तय होगा। इसमें 12 से 18 महीने या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। कई कंपनियों ने तो पहले ही केस कर दिए हैं ताकि वे रिफंड की लाइन में सबसे आगे रह सकें। हालांकि आम लोगों को इस फैसले से सीधे पैसे वापस मिलने की उम्मीद नहीं है। वजह यह है कि टैरिफ का बोझ कंपनियों ने बढ़ी कीमतों के रूप में ग्राहकों पर डाल दिया था और यह साबित करना मुश्किल होगा कि किसी ग्राहक ने कितना अतिरिक्त पैसा दिया।

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