लाखों के झुंड में विचरने वाली नली नासिका मछली
नली नासिका को अंग्रेजी में ट्यूब नोज़ फिश कहते हैं। नली नासिका मछली का थूथन नली के समान लंबा होता है अत: इसे यह नाम दिया गया है। विश्व में लगभग आधा दर्जन ऐसी मछलियां पायी जाती हैं, जिनका थूथुन नली (ट्यूब) जैसा लंबा होता है। इस प्रकार की मछलियां में नली नासिका मछली प्रमुख है।
यह उत्तर अमरीका के प्रशांत महासागर के तटों पर अलास्का से लेकर कैलीफोर्निया तक बहुत बड़ी संख्या में पाई जाती है। यह सामान्यतया सागर में 9 मीटर से लेकर 12 मीटर तक गहराई वाले भागों में मिलती है, किन्तु कभी-कभी इसे 30 मीटर तक की गहराई पर भी देखा जा सकता है। यह हमेशा झुंड में रहती है। इसके झुंड बहुत बड़े-बड़े होते हैं। झुंड में कभी-कभी इसकी संख्या लाखों, करोड़ों में होती है।
इसका शरीर दुबला-पतला और लंबा होता है तथा देखने में यह भाले अथवा बरछी की तरह दिखाई देती है। इसका शरीर लगभग 16-17 सेंटीमीटर लंबा होता है। इसके सिर की लंबाई 3 सेंटीमीटर होती है। इसकी पीठ और शरीर के ऊपर का भाग जैतूनी हरा होता है तथा पेट और शरीर के नीचे का भाग सफेदी लिए हुए हल्के रंग का होता है। नली नासिका मछली के शरीर के मांसल भागों का रंग चांदी की तरह रूपहला होता है। इसकी पूंछ बहुत पतली और लंबी होती है तथा इसके अंत में एक छोटा सा पीठ का मीनपंख होता है। यह एक मांसाहारी मछली है, यह छोटे-छोटे जीवों का शिकार करती है। यह एम्फीपॉड, ओपोसम श्रिम्प, केकड़े तथा मछलियों के लारवे खाती है।
यह घोंसला बनाने और घोंसले में अंडे देने वाली मछली है। नली नासिका मछली में बाह्य निषेचन पाया जाता है। इसमें मादा घाेंसले में अंडे देती है और नर उन पर शुक्राणु डालकर उन्हें निषेचित करता है। नली नासिका मछली की एक अन्य विशेषता यह है कि इसका प्रजनन वर्ष भर चलता है, अर्थात मादा नली नासिका वर्ष भर अंडे देती है। प्रजनन के कुछ समय पूर्व सर्वप्रथम नर घोंसला तैयार करता है। नर के गुर्दे से एक विशेष प्रकार के चिपचिपे धागे निकलते हैं। इन्हीं धागों की सहायता से यह इसी प्रकार का घोंसला बनाती है।
नली नासिका मछली के अंडे अर्ध पारदर्शक होते हैं तथा इनका रंग हल्का नारंगी होता है। मादा अंडे देने के बाद चली जाती है, किन्तु नर घोंसले के पास ही रहता है और अंडों की सुरक्षा करता है। नली नासिका मछली के अंडे दो से तीन सप्ताह के मध्य परिपक्व होकर फूटते हैं और इनसे छोटे-छोटे बच्चे निकल आते हैं। नर अंडों के समान बच्चों की भी रक्षा करता है। कुछ समय बाद बच्चे बड़े हो जाते हैं और अच्छी तरह तैरने लगते हैं। अब ये घोंसले से बाहर निकलने लगते हैं, किन्तु अभी भी ये एक छोटे से झुंड में ही रहते हैं। धीरे-धीरे बच्चों के नली जैसा एक थूथन विकसित हो जाता है तथा ये प्लेकटन में पाए जाने वाले एम्फीपॉड जैसे छोटे-छोटे जीवों को अपना आहार बनाने लगते हैं। इससे इनका तेजी से विकास होता है और ये चट्टानों अथवा सागर तल के पास पहले की अपेक्षा कुछ बड़े झुंड बनाने लगते हैं। अब नर अपने बच्चों से अलग हो जाता है और बच्चों को स्वतंत्र रूप से झुंड बनाने के लिए मुक्त कर देता है। नली नासिका मछली के बच्चे बहुत अधिक भोजन करते हैं, जिससे इनका और अधिक तेजी से विकास होता है तथा ये एक वर्ष में वयस्क हो जाते हैं और प्रजनन करने लगते हैं।
नली नासिका मछली के सागर में अनेक शत्रु हैं, किन्तु इसकी सबसे बड़ी शत्रु हैं, मांसाहारी मछलियां। मांसाहारी मछलियां प्रति वर्ष लारवों की संख्या में नली नासिका मछलियों और इनके बच्चों का शिकार करती हैं तथा इन्हें अपना आहार बनाती हैं।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



