प्रत्येक क्षेत्र में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हुए हम न सिर्फ भारत की महिलाओं की उपलब्धियों, बल्कि उनकी दृढ़ता, पालन-पोषणकारी, दृढ़ निश्चयी और परिवर्तनकारी अदम्य भावनाओं का भी सम्मान करते हैं। महिला दिवस महज कैलेंडर की एक तारीख भर नहीं है, बल्कि यह इस बात की पुष्टि है कि भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भूमिका परिधि में नहीं, बल्कि केंद्र में रही है। हमारी महिलाएं केवल संस्थानों और बोर्डरूम तक सीमित नहीं हैं, वे आंगनों, खेतों, प्रयोगशालाओं, कक्षाओं, सुरक्षा बलों और प्रशासनिक तंत्र में नेतृत्व का एक नया अध्याय रच रही हैं। उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्र में वे नई पहचान गढ़ रही हैं। रक्षा सेवाओं में महिला अधिकारी विशिष्ट सेवाएं दे रही हैं। लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने तक वे नए क्षितिज का विस्तार कर रही हैं।
समूचे ग्रामीण भारत में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करोड़ों महिलाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही हैं। वे आर्थिक स्वतन्त्रता की नींव पर सामूहिक समृद्धि का सृजन कर रही हैं। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित कर रहा है। यह साबित करता है कि जमीनी स्तर का नेतृत्व समावेशी और प्रभावशाली दोनों ही है। वैश्विक खेल मंच पर उत्कृष्टता और दृढ़ता का प्रदर्शन करते हुए भारतीय महिलाएं लगातार देश को गौरवान्वित कर रही हैं।
इतिहास साक्षी है कि भारतीय नारी का सामर्थ्य कोई नई बात नहीं है। रानी लक्ष्मीबाई ने निडर होकर अपने देश की रक्षा की। सावित्रीबाई फुले ने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देकर बेटियों की शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई। देवी अहिल्याबाई होलकर ने बुद्धिमत्ता एवं करुणा से जन कल्याण को शासन के केन्द्र में रखा। नीतिगत सुधार और दृढ़ संकल्प की उनकी विरासत आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रही है। आज,यह अमिट विरासत सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को मज़बूत करने के निरंतर प्रयासों में परिलक्षित होती है। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि विकास की अग्रदूत के रूप में मान्यता दी गई है। ‘महिला नेतृत्व वाला विकास’ आज एक सशक्त नीतिगत दृष्टि है, जो बजट, कार्यक्रमों और संस्थागत सुधारों में परिलक्षित होती है। महिला दिवस हमें याद दिलाता है कि उत्सव को बदलाव के रूप में साकार करना होगा। प्रत्येक महिला, चाहे वह किसी निगम का नेतृत्व करती हो, वर्दी में सेवा करती हो, खेत में पसीना बहाती हो, छोटा उद्यम चलाती हो या घर पर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हो, मोदी सरकार उसका अभिनंदन करती है।
हमारी प्राचीन सभ्यतागत परम्परा में नारी शक्ति का सम्मान केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, यह हमारे अस्तित्व का मूल आधार है। वह परम्परा की धरोहर को सहेजती है और बदलाव की बयार को नेतृत्व देती है। उसके व्यक्तित्व में करुणा का सागर भी है और साहस का अडिग शिखर भी। वह जहां एक ओर नैतिक मूल्यों की मर्यादा में बंधी है, वहीं दूसरी ओर अपने सपनों को उड़ान देने के लिए उतनी ही महत्ववाकांक्षी भी है। बहुआयामी भूमिकाओं को एक साथ साधने का उसका कौशल सदियों से भारतीय नारी की जीवन-शैली का अभिन्न हिस्सा रहा है। भारत में महिला श्रम शक्ति सहभागिता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 41.7 प्रतिशत हो गई। यह आंकड़ा भारतीय महिलाओं की बढ़ती आकांक्षाओं और आर्थिक गतिविधियों में उनके बढ़ते प्रभुत्व का सूचक है।
आर्थिक सर्वेक्षण इस वास्तविकता को रेखांकित करता है कि यदि हम ‘अवैतनिक देखभाल’ के बोझ को कम कर सकें और इन सेवाओं को एक व्यावसायिक स्वरूप प्रदान करें, तो महिला रोज़गार के परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा। भारतीय केयर इकोनॉमी वर्तमान में ही लाखों लोगों की आजीविका का संबल है और आने वाले दशक में इसमें रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं। हमारी सरकार महिलाओं और बच्चों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के केन्द्र में रखती है, जो देश की कुल जनसंख्या का 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। देखभाल की अर्थव्यवस्था में निवेश एक साथ कई राष्ट्रीय लक्ष्यों को मज़बूत करता है। इससे महिला श्रमशक्ति की भागीदारी बढ़ती है, बाल विकास के परिणाम सुधरते हैं, बुजुर्गों का कल्याण सुनिश्चित होता है और गरिमापूर्ण रोज़गार के नए अवसर सृजित होते हैं। देखभाल प्रणालियों के संस्थागत और पेशेवर होने से महिलाएं सशक्त होती हैं, परिवारों को स्थिरता मिलती है और संपूर्ण अर्थव्यवस्था को गति प्राप्त होती है।
जैसे-जैसे भारत ‘अमृतकाल’ से ‘विकसित भारत-2047’ की ओर बढ़ रहा है, हम इस परिवर्तनकारी सत्य को स्वीकार कर रहे हैं कि सामाजिक बुनियाद को सुदृढ़ किए बिना विकास को दीर्घकालिक नहीं बनाया जा सकता और देखभाल की अर्थव्यवस्था ही वह अनिवार्य आधार है। इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हम देखभाल के अदृश्य श्रम को सम्मान देने और उसे संस्थागत रूप से सशक्त करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। ‘महिलाओं के नेतृत्व वाले विकसित भारत’ का हमारा दृष्टिकोण केवल बोर्डरूम एवं संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सशक्त देखभाल प्रणालियों पर आधारित है, जो महिलाओं के विकल्पों, गरिमा और आर्थिक सामर्थ्य का विस्तार करती हैं।
(लेखक भारत सरकार की केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं)



