विकसित भारत के सपने में हकीकत के रंग भरता गुजरात
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जिस धरती पर विकसित भारत का जो ख्वाब स्वयं देखा और समस्त देशवासियों को दिखाया, आज उसी धरती जैसा विकास का रंग पूरे भारत की सरज़मीं पर नज़र आ रहा है। हम खुशकिस्मत हैं, जो विकसित भारत के ख्वाब को बड़ी तेड़ी से साकार होते हुए अपनी आंखों से देख रही है। विकसित भारत का एक खूबसूरत उदाहरण है, ‘गुजरात’। गुजरात की धरती सिर्फ उद्योग, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, परिवहन, पर्यटन, डेयरी आदि क्षेत्रों में तज़ी से हो रहे विकास का ही नाम नहीं है, बल्कि इस विकास की गति में इस राज्य ने अपनी विरासत और संस्कारों का दामन कसकर थामे रखा है।
यह राज्य इस बात का गवाह है कि जो ख्वाब व्यक्तिगत हित से ऊपर उठकर लोक हित के लिए देखे जाते हैं, वे निश्चित रूप से साकार होते हैं। इसका एक उदाहरण गुजरात के एकता नगर का ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ है। यह सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इस प्रतिमा पर सरदार पटेल जी द्वारा पहनी गई जैकेट के दूसरे और तीसरे बटन के बीच बनी जगह में खड़े होकर जब कोई व्यक्ति बाहर की ओर देखता है, तो पहली नज़र में उसे सरदार वल्लभ भाई पटेल का सपना साकार होता हुआ दिखाई देता है। सरदार सरोवर बांध का पानी गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में लगभग 18 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई प्रदान करता है। इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 1,450 मेगावाट है, जो गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में समान रूप से साझा की जाती है।
‘विकास से आगे विकास’ की सोच के कारण इस इलाके के आस-पास के जंगल में मंगल का अनुभव हो रहा है। सरदार सरोवर बांध के निकट स्टैचू आफ यूनिटी सहित कई पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो इस इलाके को पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रहे हैं। इस क्षेत्र में लगभग 375 एकड़ में फैला सरदार पटेल जूलॉजिकल पार्क, फूलों की घाटी, आरोग्य वन, मियावाकी वन, कैक्टस गार्डन और एकता क्रूज़ जैसे करीब 27 से अधिक पर्यटन स्थल हैं। इन पर्यटन स्थलों में केवल स्थानीय निवासियों को ही रोज़गार दिया गया है। यहां जो ऑटो चालक हैं, वे केवल महिलाएं ही हैं।
एकता नगर से लगभग 200 किलोमीटर दूर अहमदाबाद में भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अपने आप में विकसित परिवहन प्रणाली की एक झलक प्रस्तुत करती है। लगभग 508 किलोमीटर लम्बी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना विकसित भारत की उस तस्वीर का प्रतिबिंब है। अहमदाबाद से सिर्फ 80 किलोमीटर की दूरी पर ‘लोथल हड़प्पाकालीन बंदरगाह नगर’ के दर्शन होते हैं।
इस स्थान से कुछ ही दूरी पर राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर परियोजना तेज़ गति से प्रगति कर रही है। इस परियोजना का विकास केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है। इस परिसर के केंद्र में एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय तैयार हो रहा है, जिसमें 14 विषय-आधारित दीर्घाएं बनाई जा रही हैं। इन दीर्घाओं में विभिन्न प्रभावशाली तरीकों से भारत की समुद्री ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। गांधीनगर स्थित ‘नेशनल फारेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी’ इसका एक उदाहरण है, जो विश्व की पहली और एकमात्र फारेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी है। इसमें स्थापित अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं देश में होने वाले अपराध को रोकने और अपराध की छानबीन करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही हैं। यहां अहमदाबाद में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के केंद्र की अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।
यदि गुजरात के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे विकास की बात की जाए तो वर्ष 1966 में राष्ट्र को समर्पित गुजरात के वडोदरा स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) रिपाइनरी न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को बढ़ावा दे रही है। वडोदरा के पास दुमाड़ में एक एक्रिलिक ऑक्सो अल्कोहल प्लांट स्थापित है, जो किब्यूटाइल एक्रिलेट और एन-ब्यूटेनॉल जैसे मूल्य वर्धित उत्पादों का उत्पादन करता है। यह प्लांट उच्च-मूल्य वाले पेट्रोकेमिकल बनाने के लिए रिफाइनरी उप-उत्पाद प्रोपीलीन का उपयोग करता है, जिससे पेंट, कोटिंग, गोंद और कपड़े के उपयोग के लिए आयात पर देश की निर्भरता कम होती है।
ऊर्जा के बाद यदि डेयरी उत्पादन की बात की जाए तो यहां आणंद की अमूल डेयरी का नाम केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। अमूल का जन्म 1946 में हुआ, जब स्थानीय किसानों ने अपने दूध की बेहतर कीमतें प्राप्त करने के लिए एक सहकारी संस्था बनाने का फैसला किया था। इस मॉडल से भारत में श्वेत क्रांति आई। आज यह महासंघ लगभग 36 लाख किसानों से सालाना लगभग 11 अरब लीटर दूध खरीदती है। आणंद डेयरी की विशाल प्रसंस्करण क्षमता ही इसे दुनिया की सबसे बड़ी डेयरियों में से एक बनाती है, जिसकी कुल दैनिक प्रसंस्करण क्षमता लगभग 5 करोड़ लीटर है। आणंद यूनियन से 1,278 ग्राम सहकारी समितियों के माध्यम से लगभग 8 लाख किसान जुड़े हुए हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में गुजरात देश के अग्रणी राज्यों में से एक है, जो इस क्षेत्र में भारत के कुल उत्पादन का लगभग 65 प्रतिशत योगदान देता है।
वास्तव में गुजरात भारत का वह राज्य है, जो विकसित भारत के स्वप्न को वास्तविकता का रंग दे रहा है। गुजरात की यह प्रगति रातोंरात नहीं हुई हैए इसमें सरकार के साथ-साथ यहां के लोगों की कड़ी मेहनत और देश के प्रति उनका समर्पण भी इसमें शामिल है। गुजरात देश को यह संदेश भी देता है कि सरकार के साथ-साथ देश के नागरिकों को भी अपना अपेक्षित योगदान देना होगा ताकि विकसित भारत के निर्माण की गति और बढ़ सके।
(लेखक भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी हैं।)
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