केजरीवाल को राहत, कांग्रेस के लिए आफत

शराब घोटाले में ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को बरी कर दिया है। इसके बाद केजरीवाल सारे देश को बता रहे हैं कि वह कट्टर ईमानदार हैं, भाजपा ने उन्हें फंसाया था। वैसे देखा जाए तो अदालत ने उन्हें बरी इसलिए किया है, क्योंकि जांच एजेंसी सीबीआई उनके खिलाफ लगे आरोप सिद्ध नहीं कर पाई। सीबीआई का मुख्य आरोप यह था कि शराब व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए उनके पक्ष में नीतियां बनाई गई थीं और इससे राजस्व की हानि हुई। यह आरोप भी भाजपा या कांग्रेस ने नहीं लगाया था, बल्कि कैग द्वारा लगाया गया था। कैग की रिपोर्ट आने के बाद जब विपक्षी दलों ने शोर मचाया तो केजरीवाल सरकार ने शराब नीति वापिस ले ली। 
सवाल यह है कि अगर केजरीवाल सरकार को अपनी नीतियों पर भरोसा था तो उसने इन नीतियों को वापस क्यों लिया? अदालत में  अपराध साबित न हो पाना जांच एजेंसी की नाकामी होती है, इसलिए इस मामले ने सीबीआई की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर केजरीवाल के खिलाफ कोई सबूत नहीं था तो अदालतों द्वारा उन्हें जेल क्यों भेजा गया? अब केजरीवाल मोदी सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि उसने उन्हें जेल भेजा था। किसी भी व्यक्ति को जेल भेजने या ज़मानत देने का अधिकार सिर्फ इस देश की अदालतों के पास ही है। 
 जहां तक केजरीवाल के खिलाफ राजनीति करने की बात है तो भाजपा और कांग्रेस ने उन्हें इस मामले में कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। कांग्रेस कई बार अपनी राजनीति के कारण उनके साथ खड़ी हुई है लेकिन विरोध भी करती रही है। यही कारण है कि केजरीवाल बरी होने के बाद भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के खिलाफ भी बयान दे रहे हैं। कांग्रेस का भाजपा पर हमलावर होना समझ आता है, लेकिन कांग्रेस केजरीवाल के खिलाफ भी हमलावर है। कांग्रेस आरोप लगा रही है कि केजरीवाल और भाजपा मिलकर उसके खिलाफ साज़िश कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि बिल्कुल चुनाव के वक्त केजरीवाल का बरी होना महज संयोग नहीं हो सकता। कहीं न कहीं दोनों दलों की इसमें मिलीभगत है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा उसके खिलाफ आम आदमी पार्टी को खड़ा कर रही है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों में उसे नुकसान पहुंचाया जा सके।
अगले साल पंजाब, गोआ और गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जहां आम आदमी पार्टी (आप) गंभीरता से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। केजरीवाल और सिसोदिया के बरी होने के बाद पार्टी में नई जान आ गई है। ‘आप’ के कार्यकर्ताओं में नया जोश आ गया है। देखा जाए तो अब पार्टी कार्यकर्ता और नेता नए जोश के साथ काम शुरू कर सकते हैं। केजरीवाल बोल रहे हैं कि भाजपा में हिम्मत है तो वह दिल्ली में चुनाव करवा लें, उसे दस सीटें भी नहीं मिलेंगी। वह यह जानते हैं कि दिल्ली में सरकार बने हुए एक साल हुआ है, ऐसा कुछ होने वाला नहीं है। वास्तव में वह कांग्रेस को इशारा कर रहे हैं। 2027 में जिन तीन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, वहां ‘आप’ भाजपा के लिए नहीं बल्कि कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। आम आदमी पार्टी के मजबूत होने से भाजपा को नुकसान की अपेक्षा फायदा होने की उम्मीद ज्यादा है।
गोआ और गुजरात में भी आम आदमी पार्टी कांग्रेस के लिए समस्या खड़ी कर सकती है। गुजरात में दशकों से कांग्रेस सत्ता में वापसी की राह देख रही है जिसमें ‘आप’ नई बाधा बन कर खड़ी हो गई है। ‘आप’ के कारण ही पिछले चुनाव में कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। यही हालत गोवा में भी है, जहां कांग्रेस को इस बार सत्ता में आने की उम्मीद है। गुजरात से कहीं ज्यादा उम्मीद कांग्रेस को गोवा से है, लेकिन यहां भी ‘आप’ उसकी उम्मीदों पर पानी फेर सकती है। भाजपा चाहती है कि चुनाव त्रिकोणीय बन जाएं, क्योंकि इससे उसे ही लाभ होता है। अगर ‘आप’ गोवा में गंभीरता से चुनाव लड़ती है तो वो कांग्रेस के ही वोट लेगी। इससे भाजपा को बड़ा फायदा हो सकता है। (युवराज)

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