भारत-कनाडा संबंधों में नया दौर
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ व्यापक स्तर पर हुई उनकी बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच सम्पन्न हुए अनेक समझौतों के दृष्टिगत आपसी संबंधों के एक नये दौर में प्रविष्ट होने की सम्भावनाएं प्रबल हुई हैं। कार्नी द्वारा अपने देश के प्रधानमंत्री का पद सम्भालने के बाद और विगत आठ वर्ष में कनाडा के किसी प्रधानमंत्री की भारत की यह पहली यात्रा है, और इस हेतु वह 27 फरवरी को मुम्बई पहुंच गये थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी बातचीत न केवल आपसी बहुपक्षीय संबंधों को व्यापक स्वरूप देने पर केंद्रित रही अपितु दोनों नेताओं ने परमाणु सहयोग, रक्षा क्षेत्र और द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को विस्तार देने पर भी विचार किया। दोनों देशों के बीच यूरेनियम आपूर्ति हेतु एक-दूसरे के साथ सहयोग सहमति बढ़ाए जाने हेतु सम्पन्न हुआ समझौता बहुत अहम बताया जा रहा है। इस समझौते के तहत कनाडा भारत को यूरेनियम की सप्लाई हेतु सहमत हुआ है, तथा दोनों देश परमाणु ऊर्जा हेतु उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकी पर भी मिल कर काम करेंगे। विद्युत ऊर्जा की आपूर्ति हेतु परमाणु आज विश्व की एक बड़ी अहम ज़रूरत बन गया है। इस हेतु दोनों नेता भारत-कनाडा रक्षा संवाद शुरू करने पर भी रज़ामंद हुए हैं।
दोनों देशों के दोनों शीर्ष नेताओं द्वारा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते हेतु सहमति जताना भी इस बातचीत की एक बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है। इस समझौते के तहत दोनों देश वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब डॉलर तक बढ़ाने हेतु सहमत हुए हैं। हम समझते हैं कि दुनिया आज एक विश्व-ग्राम के रूप में सिमट चुकी है, और प्रत्येक देश किसी न किसी रूप में दूसरे पर निर्भर होकर रह गया है। इसी कारण विश्व के अधिकतर देश आपस में व्यापार संधियां कर रहे हैं। अनेक बड़े देशों में मुक्त व्यापार संधियां भी सम्पन्न हुई हैं। भारत और कनाडा में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता भी कुछ-कुछ इसी पथ का वाहक है। दोनों नेताओं की बातचीत में इस व्यापक समझौते हेतु नियमों एवं शर्तों को अंतिम रूप देना भविष्य में दोनों देशों के बीच संबंधों को नि:संदेह और मज़बूत करेगा।
दोनों देश लोकतांत्रिक पद्धति पर आधारित राजनीति को अपनाये देश हैं। अत: विश्व मानचित्र पर घटित हो रहे घटनाक्रमों पर दोनों नेताओं का चिन्तित होना बहुत लाज़िमी है। आपसी बातचीत में श्री नरेन्द्र मोदी और मार्क कार्नी ने एक ओर जहां पश्चिम एशिया की विस्फोटक हो गई स्थिति पर खेद ज़ाहिर किया, वहीं उन्होंने आतंकवाद और कट्टरवाद पर सांझी चिन्ता व्यक्त की। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे देश में मौजूद नागरिकों की रक्षा और सुरक्षा को लेकर भी सुनिश्चित माहौल सृजित करने पर बल दिया।
दोनों देशों के बीच आपसी संबंध सदियों पुराने हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले भी दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी सम्पर्क रहा, किन्तु कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण बने चले आ रहे थे। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की भारत के प्रति निजी वैमनस्य पर आधारित नीतियों और उनके द्वारा कथित रूप से खालिस्तानी समर्थकों को प्रश्रय दिये जाने से इन संबंधों में निरन्तर कटुता भरी जा रही थी। जस्टिन ट्रूडो द्वारा कनाडा निवासी भारतीय मूल के एक खालिस्तानी नेता की हत्या में भारत का हाथ होने का सीधा आरोप लगाये जाने के बाद तो ये संबंध टूटने के कगार पर जा खड़े हुए थे।
किन्तु अब मार्क कार्नी द्वारा अधिकाधिक भारत समर्थक नीतियां अपनाये जाने और अतीत की कटुता को लेकर यू-टर्न लेने से दोनों देशों के बीच पन: मधुर संबंध बनने शुरू हुए हैं। मार्क कार्नी की भारत यात्रा और इस दौरान उनके द्वारा प्रदर्शित सद्भावना से नि:संदेह दोनों देशों के बीच एक नये युग की शुरुआत होने की सम्भावना उपजी है। मार्क कार्नी द्वारा अपनी भारत यात्रा से पहले ही, कनाडा की धरती पर अतीत में हुए किसी अपराध में भारत का हाथ होने संबंधी किसी आरोप से इन्कार करने की घोषणा ने तो सभी तरह की मैल को धो दिया है। अब मार्क कार्नी ने इन धुले हुए हाथों से आपसी संबंधों के धरातल पर जो नई इबारत लिखी है, भारत को भी उसके भीतरी अर्थों एवं भावना को समझते हुए, उसी प्रकार की प्रतिक्रिया अवश्य देनी चाहिए। वैसे भी, मध्य-पूर्व की घटनाओं और विश्व मानचित्र पर यत्र-तत्र युद्धों की छाया तले भारत-कनाडा संबंधों का यह नया दौर दोनों देशों खासकर भारत के लिए बहुत बेहतर रहने की सम्भावना है। दोनों देशों में सौहार्दपूर्ण संबंधों का असर कनाडा में शिक्षा एवं व्यवसाय हेतु जाने वाले युवाओं के लिए भी ठीक सिद्ध होगा।

