बलोचिस्तानी जनता का विद्रोह विस्फोटक हो सकता है

पाकिस्तान में बलोचिस्तान के हालात ़खतरनाक बन चुके हैं। बलोचिस्तान को पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत माना जाता है। हालात इतने अनियंत्रित होते जा रहे हैं कि अब लगने लगा है कि पाकिस्तान ज्यादा देर तक उसे अपने साथ नहीं रख पाएगा। बलोच नेता मीर यार ने संयुक्त राष्ट्र को एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि बलोचों के घरों को गिराना बंद करे पाक सेना। इस पत्र में पाकिस्तान को बलोचिस्तान का ‘पड़ोसी देश’ बताया गया है। पत्र कुछ इस तरह था, ‘बलोचिस्तान गणराज्य अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीयन यूनियन तथा क्षेत्र के सभी देशों को पारम्परिक तौर पर सूचित करना चाहता है कि हमारे पड़ोसी आतंकवादी राज पाकिस्तान व इसकी कट्टरपंथी ताकतों ने बलोचिस्तान के आम लोगों के विरुद्ध अपनी मुहिम तेज़ कर दी है। बलोचिस्तान के स्रोतों की चल रही लूट, नसलकुशी, आर्थिक शोषण व बलोच भाषा के योजनाबद्ध हाशिए पर धकेलने के अलावा कब्ज़ा करने वाली ताकतों ने अब आज़ादी पक्षीय बलोच नागरिकों के घरों को प्रत्यक्ष तौर पर गिराना शुरू कर दिया है।’
यह भी बताया गया है कि ये कार्रवाइयां चीन की पीपल्ज़ लिबरेशन आर्मी और विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय कार्पोरेशनों के लिए ज़मीन खाली करने के लिए की जा रही हैं। यह बिल्कुल बर्दाश्त योग्य नहीं है और बलोचिस्तान गणराज्य में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। उसने कहा कि गवादर के साथ-साथ और बलोचिस्तान के 300 किलोमीटर तट रेखा के बार दर्जनों बलोच गावों को तबाह किया जा रहा है। उसने कहा कि पाक और चीन के मध्य राजनीतिक गठबंधन के चलते दोनों देशों की तालमेल वाली बलोच विरोधी नीतियों द्वारा बलोचिस्तान की व्यवस्था बनतर को बदला जा रहा है और बलोच लोगों को उनके अपने देश में अल्पसंख्यक साबित किया जा रहा है। मीर यार बलोच ने डर पैदा करने के लिए गवादर क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना ने देर रात्रि नूर बख्श कलमाती बलोच का घर गिरा दिया।
पिछले दिनों पाकिस्तान के महत्त्वपूर्ण शहर तथा पंजाब की राजधानी लाहौर में सम्बोधित करते हुए बलोचिस्तान के एक पूर्व मुख्यमंत्री अख्तर मैंगल ने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि अब बलोचिस्तान का पाकिस्तान से अलग होना ही एकमात्र हल है। ये दोनों अब किसी भी तरह इकट्ठे नहीं रह सकते। उन्होंने यह भी कहा कि बलोचिस्तान पाकिस्तान के साथ पड़ोसी देश के रूप में तो शांतिपूर्ण ढंग से रह सकता है परन्तु उसका प्रांत बनकर रहना इसे स्वीकार नहीं है। इसके साथ ही अख्तर मैंगल ने पाकिस्तान की राष्ट्रीय असैम्बली से त्याग-पत्र देने की घोषणा कर दी है।
समाचारों से विदित होता रहता है कि पाकिस्तान बलोच के लोगों के स्वाभिमान को ब़गावत का दर्जा देता है और बगावत को रोकने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने टैंकों और तोपों से कई क्षेत्रों पर हमला किया है। इस बगावत को दबाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी किया है। कुछ क्षेत्रों में हवाई हमले भी जारी रखे हैं। ज्यादातर क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा कर दमन की नीति अपनाई है। 
बलोच 25 वर्षों से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं परन्तु पिछले कुछ वर्षों में यह संघर्ष सामूहिक भावनाओं का संघर्ष बनता चला गया है। कोई भी वर्ग लम्बे समय तक गुलामी की जंजीरें बर्दाश्त नहीं कर सकता। पाकिस्तानी प्रशासन जिस तरह से बलोच लोगों की अस्मिता की अवहेलना कर रहा है वह तनाव अब अभिव्यक्ति बन रहा है। अगर पाकिस्तानी प्रशासन अपने व्यवहार में आधारभूत बदलाव नहीं लाता तो इस बगावत को सम्भाल पाना उनके बस का नहीं रहेगा।

#बलोचिस्तानी जनता का विद्रोह विस्फोटक हो सकता है