वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे साइबर अपराधी
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक वरिष्ठ नागरिकों (बुज़ुर्गों) के साथ साइबर अपराध के मामलों में 80 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है। हाल ही में ऑनलाइन घोटालों में सेवा-मुक्त लोगों की जीवन भर की बचत गंवाने के मामले में वृद्धि होने के साथ वरिष्ठ नागरिक साइबर अपराधियों का मुख्य निशाना बन रहे हैं। हाल ही में जनवरी माह में मैसूर शहर में 5.5 करोड़ रुपये से अधिक के ठगी का मामला सामने आया है। 2026 के पहले महीने में ही कुल साइबर ठगी के 18 मामलों में 4 मामले वरिष्ठ नागरिक के थे। इन मामलों से पता चला कि सेवा-मुक्त, शिक्षक, डॉक्टर, व्यवसायी, गृहिणि और दूसरे कर्मचारी किस तरह साइबर अपराधियों के जाल में फंसकर अपने जीवनभर की बचत ही गंवा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों को तकनीक की कम समझ होने के कारण ऑनलाइन ठगी का शिकार सबसे ज्यादा हो रहे हैं। हाल में ही हुई घटनाओं से पता चलता है कि ऑनलाइन नौकरी धोखाधड़ी, डिजिटल गिरफ्तारी, निवेश धोखाधड़ी आदि का लालच देकर उन्हें ठगा जाता है।
साइबर ठग अफसर बनकर फोन करते हैं। पेंशन या केवाईसी के नाम पर दस्तावेज़ों की मांग करते हैं। बिजली या गैस का कनेक्शन पेंमेंट न हो पाने के कारण काटने का डर दिखाकर जानकारी मिलते स्कैम करके खाते से पैसे निकाल लेते हैं। घर के किसी सदस्य के नाम पर फोन करते हैं और किसी मुसीबत में उनके फंसे होने की झूठी बात कहते हैं और पैसों की मांग करते हैं। उन्हें किसी तरह से डरा धमकाकर या भावनात्मक ब्लैकमेल करके उनकी बैंकिंग डिटेल और निजी जानकारी ले लेते हैं और इस तरह उनके बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं। डिजिटल अरेस्ट के तहत पुलिस या कस्टम अधिकारी बनकर फोन करते हैं। धन शोधन, ड्रग्स जैसे आरोप में उनके शामिल होने का डर दिखाकर बचने के लिए अपने खाते में पैसे डलवाते हैं। लगातार वीडियो कॉल के ज़रिये अरेस्ट करते हैं।
वरिष्ठ नागरिक ही निशाने पर क्यों : ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार वरिष्ठ नागरिकों को बनाने की सबसे बड़ी वजह है, कई बुज़ुर्ग डिजिटल प्लेटफॉर्मों से अपरिचित होते हैं और वे खुद को कैसे ऑनलाइन सुरक्षित रखकर अपने काम डिजिटली कर सकते हैं, इसके बारे में उनका ज्ञान सीमित होता है। वे किसी पर भी सहजता से विश्वास कर लेते हैं। पुलिस, बैंक प्रबंधक, सरकारी एजेंसी के अधिकारियों के नाम पर जब उनसे झूठ बोला जाता है तो वे उन अपराधियों की मंशा नहीं भाप पाते और उनके द्वारा बिना वेरिफिकेशन के वे जैसा कहते हैं, उनके आदेशानुसार ही कार्य करने लगते हैं।
ठगी से बचने के तरीके : ऐसे एप का उपयोग करें जो स्पैम या अनचाहे कॉल से बचने के लिए कॉल ब्लॉक का विकल्प तो देते ही हैं, कॉल करने वाले को पहचानकर यदि वह संदिग्ध कॉल है तो आप उसको न उठाएं। पैसे पर रिटर्न या लॉटरी जीतने के लालच में न फंसें। नोटिफिकेशन अधिकृत वेबसाइट एप के माध्यम से अपने लेन-देन व लॉग इन एक्टिविटी पर पूरी नज़र रखें। समय-समय पर अपना एकाउंट बैलेंस देखते रहें। यदि आपने किसी को भुगतान किया है तो उसके संदेश को भी जांच लें। टेक्स्ट मैसेज, ई-मेल या व्हाटसएप पर कोई अनजान या संदिग्ध लिंक आए, तो उस पर क्लिक न करें। यदि कोई अनजान खुद को पुलिस या बैंक अधिकारी बातकर डरा-धमकाकर आपको निजी जानकारी पूछे तो डिटेल न दें। अनजान नंबर से फोन करने वाले व्यक्ति के साथ बैंकिंग डिटेल आदि शेयर न करें। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



