स्मृति व जेमिमा ने लिखी जीत की नई पटकथा
भारत की महिला क्रिकेट टीम निरंतरता के साथ अपना दबदबा स्थापित करती जा रही है, चाहे मैच देश में खेले जा रहे हों या विदेशी धरती पर। इंग्लैंड में इंग्लैंड को हराना, अपने घर में ओडीआई विश्व कप जीतना दक्षिण अफ्रीका को हराकर और अब ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में पराजित करना। कामयाबी का एक लम्बा सिलसिला है और सफलता की इस पटकथा में स्मृति मंधना, जेमिमा रोड्रिग्स व गेंदबाज़ बार-बार मुख्य किरदारों के रूप में उभरती हैं। एडिलेड में द्विपक्षी टी-20 श्रृंखला का तीसरा मैच 21 फरवरी 2026 को था, जो इस लिहाज़ से निर्णायक था कि श्रृंखला 1-1 की बराबरी पर थी। स्मृति व जेमिमा ने दूसरे विकेट के लिए साहस व मनोरंजन से भरी रिकॉर्ड शतकीय साझेदारी की और ऑस्ट्रेलिया के समक्ष 177 रन का लक्ष्य रखा, लेकिन उसकी मज़बूत बल्लेबाज़ी ने भारतीय गेंदबाज़ों के सामने घुटने टेक दिये और भारत ने 17 रन से मैच जीतते हुए श्रृंखला पर 2-1 से कब्जा किया।
भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए अपने निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 176 रन बनाये थे और जवाब में ऑस्ट्रेलिया 9 विकेट पर 159 रन ही बना सकी। स्पिनर्स श्रेयंका पाटिल (3/22) व श्रीचरणी (3/32) ने 3-3 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया की कमर तोड़ दी। द्विपक्षी टी-20 श्रृंखला में ऑस्ट्रेलिया पर ऑस्ट्रेलिया में यह केवल दूसरी श्रृंखला जीत है। इससे पहले 2-1 के अंतर से ही भारत को 2015-16 में भी कामयाबी मिली थी। भारत की इस शानदार सफलता की सूत्रधार रहीं स्मृति व जेमिमा, जिन्होंने दूसरे विकेट के लिए 121 रन की रिकॉर्ड साझेदारी की। इससे पहले टी-20 में दूसरे विकेट के लिए साझेदारी का रिकॉर्ड मिथाली राज व पूनम राउत के नाम था, जिन्होंने 9 मार्च 2014 को कॉक्स बाज़ार में बांग्लादेश के खिलाफ नाबाद 98 रन की साझेदारी की थी। स्मृति ने 55 गेंदों में 82 रन बनाये, जबकि जेमिमा ने 40 गेंदों में 59 रन का योगदान दिया।
मैच के बाद भारत की उप-कप्तान स्मृति ने जेमिमा की जमकर तारीफ की। हालांकि फाइनल टी-20 की आर्किटेक्ट स्मृति ही थीं, अपनी लयात्मक बल्लेबाज़ी की वजह से, लेकिन शेफाली वर्मा के जल्द आउट होने के बाद जेमिमा ने ही अपनी निडर विस्फोटक बल्लेबाज़ी से पारी को गति दी और ड्रेसिंग रूम में तनाव कम करने में मदद की। दरअसल, जब जेमिमा विकेट पर आयीं तब स्मृति 10 गेंदों में 6 रन बनाकर भी स्थितियों से जूझ रहीं थीं व अपनी रिद्म की तलाश कर रही थीं। जेमिमा ने आते ही मुकाबले का टेम्पो बदल दिया। स्मृति के शब्दों में, ‘जब जेमिमा विकेट पर आयीं तब मैं अपनी टाइमिंग की तलाश कर रही थी। उन्होंने आते ही 3-4 चौके लगाये और मैच को दिशा प्रदान की। इससे मुझे जमने के लिए कुछ समय मिल गया। ये छोटी-छोटी बातें अक्सर नोटिस नहीं की जातीं, लेकिन मुझे लगता है कि इससे मुझे बहुत मदद मिली। इसलिए जेमिमा को बधाई कि वह आयीं और इतना शानदार खेला।’
इस जीत के बारे में स्मृति ने कहा, ‘मैं समझती हूं कि ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना बहुत खास होता है। मैं टीम के लिए वास्तव में बहुत खुश हूं और खुशी इस बात की भी है कि मैंने भी इस कामयाबी में अपना योगदान दिया।’ कप्तान हरमनप्रीत कौर ने इस जीत को सामूहिक प्रयास का नतीजा बताया। उनके अनुसार, ‘यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह पूर्णत: टीम प्रयास है। हमारे लिए हर पार्टनरशिप की बहुत अहमियत थी। हमने इसी विषय पर टीम मीटिंग में चर्चा की थी कि हर कोई अपनी ज़िम्मेदारी समझे और टीम के लिए मौजूद रहे।’ भारत ने बहुत लम्बे समय बाद ऑस्ट्रेलिया में टी-20 क्रिकेट खेला है और अब वह ओडीआई श्रृंखला की तैयारी में लग गया है। बहरहाल, हरमनप्रीत की इस बात में दम है कि टीम के सामूहिक प्रयास से ही कामयाबी की कहानियां लिखी जा रही हैं; वैसे भी क्रिकेट टीम गेम है बावजूद इसके कि कुछ खिलाड़ियों को अपने असाधारण प्रदर्शन से अलग से सितारा बनकर चमकने का अवसर मिल जाता है। हालांकि मीडिया में अधिक कवरेज हमेशा बैटर्स को ही मिलती है, उन्हें ही हीरो या हीरोइन बनाकर पेश किया जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि क्रिकेट में फॉर्मेट चाहे जो हो, जीत गेंदबाज़ ही दिलाते हैं।
एडिलेड की बेजान सपाट पिच पर 177 रन का लक्ष्य कुछ खास बड़ा न था, विशेषकर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि आजकल बैटर्स आउट होने की परवाह किये बगैर विस्फोटक बल्लेबाज़ी करते हैं और वह ऐसा इसलिए भी कर पाते हैं क्योंकि वाइट बॉल क्रिकेट में फील्ड रिस्ट्रिक्शंस के साथ ही गेंदबाज़ों पर भांति-भांति की पाबंदियां व ‘जुर्माने’ हैं। इस पृष्ठभूमि में भारतीय गेंदबाज़ों ने कमाल किया। श्रेयंका व रेणुका सिंह (1/29) ने ऑस्ट्रेलिया के टॉप आर्डर को धराशायी कर दिया और मात्र 32 रन पर 3 विकेट खोने के बाद उसके लिए संभल पाना मुश्किल हो गया था। हालांकि गार्डनर ने 57 रन की तेज़ पारी से ऑस्ट्रेलिया के लिए उम्मीद की एक किरण अवश्य जगायी, लेकिन श्रीचरणी की लेफ्ट-आर्म फिरकी ने भारत की जीत पर मोहर लगा दी। भारत की वर्तमान महिला टीम वास्तव में इस समय विश्व में सर्वश्रेष्ठ है और नई प्रतिभाएं निरंतर अपने दावे पेश कर रही हैं, जिससे भविष्य भी उज्जवल प्रतीत हो रहा है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर




