रंगों की मनभावन दुनिया
हमारे जीवन में रंगों का विशेष महत्व होता है। रंगों से हमारा अटूट रिश्ता है। यही कारण है कि रंगों की धार्मिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक महत्ता आज भी बरकरार है। रंगों का अपना ही एक अलग संसार है, जिसमें हर कोई गोता लगाकर रंग से सराबोर हो जाते हैं। यही नहीं रंगों का अपना मनमोहक जादू है, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। ऐसा कोई स्थान नहीं है, जहां रंगों का आकर्षण न हो। सारा संसार ही तो रंग-बिरंगा है। कुछ रंगों में ऐसा जादू होता है, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। चीन की युवतियां रंगों के जादू से भलीभांति परिचित हैं। वे रंगों के जादू से ही अपने प्रेमी को वशीभूत कर लेती हैं। हर किसी को अपनी ओर आकर्षित की क्षमता रंगों में पायी जाती है। प्राचीन मिस्र और यूनान के लोग अपने कुल देवता की पूजा एक विशिष्ट रंग से करते थे। हमारे देश में भगवा रंग का विशेष महत्व है। यह हमारे जीवन पद्धति का परिचायक है। मिस्र के लोगों को ‘लाल रंग’ से विशेष लगाव था। यही कारण है कि वे लोग लाल रंग को विशेष महत्व देते हैं।
रंगों के कारण केवल हमारे जीवन में खुशियां ही नहीं आती, वरन यह कई बीमारियों में अपना अचूक प्रभाव डालती है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार-‘कुछ लोगों पर रंग अपना विशेष प्रभाव डालते हैं। भावुक महिलाएं यदि नीले-हरे रंग की साड़ी पहने, तो उनका मन प्रसन्नचित रहता है। यदि आपको किसी अन्य रंग की साड़ी पहनने से मन में भारीपन लगता है, तो फौरन आप वैसी रंग की साड़ी न पहने और जो रंग आपके तन-मन को प्रफुल्लित कर दें, वैसे ही रंग की साड़ी पहने।
वैज्ञानिकों के शोध से यह भी पता चला है कि यदि आपको शोर से कान बंद करने पड़ते हों, तो अपने घर को हल्का नीला या हरा रंग से पुतवा दीजिए। हल्का नीला या हरा रंग ध्वनि का सबसे उपयुक्त अवरोधक है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि रंग हमारे स्वास्थ्य का खास ख्याल रखते हुए हमें स्वस्थ रखने में अपनी अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पश्चिमी विद्वान डा. बब्विटन ने कलर डिस्क का आविष्कार किया है, जिसके क्रोमो लेंस द्वारा प्रतिबिंवित किरणों के माध्यम से किसी भी बीमारी का इलाज किया जा सकता है। वैज्ञानिक शोधों से यह स्पष्ट हो चुका है कि रंग के द्वारा कई असाध्य रोगों का इलाज किया जा सकता है। ठंड जनित बीमारी में लाल रंग हमारे शरीर को उष्मा प्रदान करते हैं, तो वही चर्म रोग या खून में किसी प्रकार की गड़बड़ी को दूर करने में यह सफल साबित हुआ है। वही घोर निराशा में डूबे या किसी के द्वारा सताये गये लोगों में लाल रंग मानसिक ऊर्जा प्रदान करता है। लीवर से संबंधित रोगों को पीला या नारंगी रंग नियंत्रित करने में सक्षम है। नींबू का पीला रंग महिलाओं के स्वस्थ्य के लिए काफी लाभदायक है। रीढ़ की हड्डी, अमाशय अथवा शरीर के किसी भी अंग में जलन को कम करने में नीला या हल्का जामुनी रंग विशेष लाभदायक सिद्ध होता है। घाव या चर्म रोग में हरा रंग अपनी छाया मात्र से ही रोगी को काफी आराम देता है। सर्दी-जुकाम होने पर सफेद वस्त्र पहनकर प्रात: काल धूप में घूमने से बहुत लाभ होता है। जर्मनी के प्रख्यात विद्वान मैक्स मूलर ने अपनी पुस्तक ‘द लूथर कलर टैस्ट’ में रंगों के महत्व को बताते हुए कहा है- ‘नीला रंग पूर्ण शांति का प्रतीक है। हरा रंग राजसी और निरंकुश प्रवृति द्योतक है। लाल रंग शक्ति और ताजगी का प्रतीक है तथा पीले रंग का वर्णन करते हुए कहा है कि यह पूर्ण संतुष्टि का प्रतीक है। उन्होंने रंगों पर काफी शोध किया है और विभिन्न रंगों के बारे में विस्तार से चर्चा की है।’
इस प्रकार रंगों का हमारे जीवन से अटूट संबंध रहा है। मन भावन रंग हमारे दिलों को छू ही नहीं जाते हैं अपितु हमारे तन-मन को प्रफुल्लित कर देते हैं। जिस जीवन में रंग नहीं, वह जीवन क्या? धरती-आकाश तो रंग-बिरंगा है, तो हमारा जीवन इससे कैसे अछूता रह सकता है। रंग विहीन जीवन नीरस है। जीवन का सच्चा आनंद तो रंगों में है।
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