सरकार एलपीजी संकट से इन्कार क्यों कर रही है ?
देश में रसोई गैस सिलेंडर के लिए चौतरफा हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारें इसे स्वीकार नहीं कर रही हैं। केंद्र सरकार की एक वरिष्ठ महिला अधिकारी से प्रैस कॉन्फ्रैंस करके सब कुछ ठीक होने का दावा करते हुए कहा है कि लोग अफवाहें फैला रहे हैं, देश में एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी केरल और तमिलनाडु में चुनावी रैलियां और रोड शो करते हुए दावा कर रहे हैं कि देश में एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि यदि एलपीजी की कोई कमी नहीं है तो फिर लोग गर्मी में खड़े क्यों लड़ रहे हैं और कतारों में खड़े बेहोश हो रहे हैं?
अगर सब कुछ ठीक है सिलेंडर की कमी नहीं है और आपूर्ति शृंखला भी पूरी तरह से ठीक है तो अयोध्या में राम रसोई क्यों बंद हो गई? सुप्रीम कोर्ट की कैंटीन में मेन कोर्स का खाना क्यों बंद हुआ? होटल, रेस्तरां और ढाबे क्यों बंद हो रहे हैं? कांग्रेस मुख्यालय में कैंटीन क्यों बंद हुई? कांग्रेस मुख्यालय की कैंटीन क्यों बंद हो गई? भारतीय रेलवे अपनी कैटरिंग सर्विस क्यों सीमित करने की तैयारी कर रहा है? इन सवालों के जवाब सरकार के पास नहीं हैं और उनकी चुप्पी के कारण लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
राहुल और निलंबित सांसदों का क्या होगा?
स्पीकर ओम बिरला को अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब अपने दैनिक कामकाज के साथ दो अहम मसलों पर फैसला लेना पड़ेगा। उनके सामने राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव और विपक्ष के आठ सांसदों के निलंबन का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि बजट सत्र के पहले चरण में निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ बिना सबूत बयान देने, देश विरोधी ताकतों से संबंध रखने और कई अन्य आरोप लगाए थे। पहले ऐसे प्रस्तावों के आधार पर सांसदों को निष्कासित किया जा चुका है। हालांकि ऐसा लग नहीं रहा है कि सरकार राहुल गांधी को हटाना चाहेगी। लेकिन संभव है कि मामला मर्यादा कमेटी को भेज कर उसकी रिपोर्ट के आधार पर राहुल की निंदा हो। दूसरी ओर सदन से निलंबित आठ सांसद लगातार संसद के मकर द्वार की सीढ़ियों पर बैठ कर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके मामले में भी लग नहीं रहा है कि स्पीकर कोई तुरंत फैसला करेंगे। अगर कोई हल नहीं निकलता है तो आठ निलंबित सांसदों में से चार चुनाव प्रचार के लिए जा सकते हैं, क्योंकि उनके राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। दोनों मामलों में क्या होगा, यह सोमवार तक पता चलेगा।
राष्ट्रपति की नाराज़गी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपनी हाल ही की पश्चिम बंगाल यात्रा को लेकर बहुत नाराज़ हैं। उन्हें इस बात की नाराज़गी है कि उनकी पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल संबंधी कई खामियां रहीं और जिस अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में वह मुख्य अतिथि थीं, उसके लिए राज्य सरकार ने उचित जगह उपलब्ध नहीं कराई। हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं था कि राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर गई हों और वहां के मुख्यमंत्री ने उनकी अगवानी नहीं की। पिछले महीने ही 13 फरवरी को राष्ट्रपति मुर्मू प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी संस्थान के ओम शांति रिट्रीट सेंटर के रजत जयंती समारोह का उद्घाटन करने हरियाणा के गुरुग्राम गई थीं तो राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उनकी अगवानी करने नहीं पहुंचे थे। इसी इसी तरह तीन साल पहले 9 फरवरी, 2023 को भी राष्ट्रपति एक कार्यक्रम में गई थीं तब भी हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर वहां नहीं आए थे।
इसी तरह 4 अक्तूबर, 2024 को राष्ट्रपति माउंट आबू में एक समारोह में शामिल होने गई थीं, तब वहां भी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा मौजूद नहीं थे, लेकिन इनमें से किसी मौके पर राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री की गैर मौजूदगी पर सवाल नहीं उठाया था। अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पर सवाल उठाने को स्पष्ट रूप में राजनीतिक नज़रिये से देखा जा रहा है।
बदल रही है भारत की जनसंख्या नीति
देश में एक तरफ नई जनसंख्या नीति लाकर दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर रोक लगाने की मांग हो रही है तो दूसरी ओर कई राज्यों में सरकारें दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रही हैं। इस विरोधाभास की वजह से लगता नहीं कि सरकार कोई जनसंख्या नीति लाएगी। गौरतलब है कि भारत दुनिया का पहला देश है, जिसने जनसंख्या नीति बनाई। इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन चुका है। नई नीति बनाने की मांग के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत सहित कई बड़े हिंदुत्ववादी नेता हिंदुओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील करने लगे हें।
केंद्र सरकार ने जनगणना के बाद परिसीमन का संकेत दिया तो दक्षिण भारत के राज्य अपने लोगों से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील करने लगे और उन्हें प्रोत्साहित करने लगे। आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू ने दूसरा और तीसरा बच्चा पैदा करने वालों को नकद प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया है।
मणिपुर विधानसभा में अभिनव प्रयोग
मणिपुर विधानसभा ने एक अभिनव प्रयोग किया है। राज्य में विधानसभा का सत्र चल रहा है। नई सरकार के गठन और कुकी समुदाय से उप-मुख्यमंत्री बनाने के बावजूद अभी तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। कुकी और मैतेई समुदायों का टकराव खत्म नहीं हुआ है। इस टकराव के बीच विधानसभा सत्र में वर्चुअल तरीके से सदस्यों के शामिल होने का बंदोबस्त किया गया। विधानसभा के अंदर बड़ी स्क्रीन लगाई गई और विधायकों को अपने घर या कार्यालय से ही कार्यवाही में शामिल होने को कहा गया। इस प्रयोग में कुकी समुदाय के छह विधायकों ने वर्चुअल तरीके से सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया। दुनिया के अनेक विकसित देशों में यह व्यवस्था कई साल पहले शुरू हो गई थी। भारत में भी सुप्रीम कोर्ट तक में वर्चुअल सुनवाई और उसके लाइव प्रसारण की सुविधा शुरू हो गई है। अगर देश भर में अपनाया जाता है तो संसद और विधानमंडलों में सांसदों और विधायकों की उपस्थिति बेहतर होगी।





