भारत औद्योगिक विकास योजना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले लम्बे समय से ‘मेक इन इंडिया’ का नारा दिया हुआ है। इसे वह प्रत्येक स्थान पर प्रचारित भी करते रहे हैं और सरकार द्वारा अब इस भावना को क्रियात्मक रूप देने का यत्न भी किया जा रहा है। यदि अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग तरह का अधिक उत्पादन देश में होने लगे तो इससे एक तो देश की अन्य देशों पर निर्भरता कम हो जाएगी, दूसरा इससे रोज़गार के अधिक स्रोत भी उपलब्ध हो जाएंगे। हज़ारों वर्ष पहले अलग-अलग स्थानों पर सभ्यताओं के विकसित होने से कृषि को प्राथमिकता और गति देने का यत्न किया गया था। इससे गांवों की इकाइयां बनीं, जिसमें प्रत्येक प्रकार की ज़रूरतें पूरी करने के लिए अलग-अलग व्यवसायों के कारीगर बनने शुरू हुए। इसके साथ ही मंडियों के रूप में भी इकाइयां बनने लगीं। उस समय प्रत्येक तरह के जीवन निर्वाह का बड़ा आधार गांव की इकाई ही होती थी।
सभ्यताओं के विकास से आपसी व्यापार की भावना भी बढ़ी। यह व्यापार पहले धरती पर बसते एक राज्य के भीतर-भीतर होता था और फिर धीरे-धीरे दूर-दराज़ स्थानों और विदेशों के साथ भी व्यापारिक आदान-प्रदान बढ़ने लगा। आज हालात ये हो गए हैं कि विश्व एक बड़ी मंडी बनती जा रही है। आपसी ज़रूरतों की पूर्ति के लिए विश्व भर के देशों के बीच प्रतिदिन अरबों-खरबों रुपये का व्यापार हो रहा है। भारत एक बड़ी जनसंख्या वाला देश है। यहां की जनसंख्या एक साधारण रूप से नहीं, अपितु  बहुत तेज़ी से बढ़ी है। आज़ादी के बाद भारत की सरकारें लगातार बढ़ती इस जनसंख्या में योजनाबद्ध ढंग से अनुशासन लाने में असमर्थ रही हैं। चाहे यह गम्भीर और चिन्ताजनक मामला बन चुका है परन्तु अब तक के प्रशासनों ने इसे गम्भीरता के साथ नहीं लिया प्रतीत होता। बढ़ रही इस जनसंख्या में लगातार बेरोज़गारों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है। बेरोज़गारी स्वयं में एक समस्या भी है और इसे नियमबद्ध न किये जाने के कारण यह श्राप भी बनती दिखाई दे रही है। ऐसी स्थितियों में सरकारों का यह फज़र् बन जाता है कि वे अधिक से अधिक रोज़गार पैदा करने के लिए यत्नशील रहें।
पूर्व सरकारों की भांति मोदी सरकार ने भी वर्ष में 2 करोड़ रोज़गार पैदा करने का लक्ष्य घोषित किया था परन्तु अब तक अपनी इस घोषणा में उनकी सरकार बुरी तरह विफल रही है, जिससे बेरोज़गारी का संकट और भी बढ़ता जा रहा है। इसी दिशा में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के बजट में देश के लिए औद्योगिक विकास योजना शुरू करने की घोषणा की थी। अब इसी रोशनी में केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश भर में औद्योगिक पार्क स्थापित करने की घोषणा की है, जिसे ‘भारत औद्योगिक विकास योजना’ का नाम दिया गया है। इसके लिए 33,660 करोड़ रुपये आरक्षित किए गए हैं। दिए गए विस्तार के अनुसार इस योजना के तहत प्रत्येक तरह के औद्योगिक उत्पादन को उत्साहित किया जाएगा और आगामी 6 वर्ष में लगभग 34 हज़ार एकड़ ज़मीन पर यह औद्योगिक पार्क बनाए जाएंगे, जिनसे 15 लाख से अधिक कर्मियों के लिए सीधे रोज़गार पैदा होने की सम्भावना है। ऐसे प्रयोग चीन और वियतनाम जैसे देशों ने भी किए हैं, जहां उन्हें क्रियात्मक रूप में बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। इन औद्योगिक पार्कों में सड़कें, ज़मींदोज़ सुविधाएं, साझे ट्रीटमैंट प्लांट, इंटरनेट कनैक्शन और डिजीटल प्रशासनिक प्रणाली की सुविधा होगी। इसके अतिरिक्त तैयार माल की फैक्टरियों में टैस्टिंग, लैबोरेटरियां, गोदाम और श्रमिकों के रहने के लिए प्रबंध होने के साथ-साथ वहां उत्पादन शुरू करने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों से लाइसैंस लेने, बिजली और पानी कनैक्शन जैसे काम आसानी से पूर्ण करने की व्यवस्था भी होगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस संबंध में कहा है कि ‘भारत औद्योगिक विकास योजना’ देश के औद्योगिक विकास को तेज़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगी। इससे देश में अलग-अलग तरह के निर्माण, निवेश और रोज़गार को उत्साह मिलेगा। सिंगल विंडो सिस्टम से कारोबार करना बेहद आसान हो जाएगा। हम इस योजना को सरकार द्वारा एक उचित दिशा में उठाया गया बड़ा कदम समझते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह निर्धारित समय में इस योजना को प्रत्येक पक्ष से सफल बनाने का पूरा यत्न करेगी, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को और भी संबल मिल सकेगा।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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