पश्चिम बंगाल में भी लागू होगा उत्तर प्रदेश वाला मॉडल
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने रामपुर लोकसभा सीट पर उप-चुनाव में हो मॉडल को लागू किया था, अब चुनाव आयोग ने वहां से सीख लेकर पश्चिम बंगाल में इसे लागू करने का फैसला किया है। इस मॉडल के तहत बुर्के वाली महिलाओं की जांच मतदान केंद्र के बाहर भी की जाएगी। ऐसे कह सकते हैं कि उनकी जांच दो बार या उससे ज्यादा बार भी हो सकती है। रामपुर लोकसभा सीट पर उप-चुनाव में पुलिस ने मतदान केंद्र से बहुत पहले ही बैरिकेड लगा दिए थे और बुर्के वाली महिलाओं की जांच मतदान केंद्र के बाहर ही की थी। इतनी जगह बैरिकेड लगाए गए थे और इतनी जांच हो रही थी कि बहुत-से लोग रास्ते से लौट गए। हालांकि, नियम के अनुसार बुर्के वाली महिला को मतदान केंद्र के भीतर जाकर ही अपना चेहरा दिखाना होता है। वहीं पर मतदाता सूची में लगी फोटो से उसके चेहरे का मिलान होने के बाद मतदान से पहले उसकी उंगली पर स्याही लगाई जाती है। लेकिन पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि मतदान केंद्र के बाहर ही उनकी जांच होगी। अब सवाल है कि सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए नया नियम क्यों बनाया गया? एक ही वजह समझ में आती है कि ऐसी जांच से बचने के लिए बहुत-सी महिलाएं मतदान के लिए जाएंगी ही नहीं, जिसका नुकसान तृणमूल कांग्रेस को होगा।
संदेशरा बंधुओं पर ही मेहरबानी क्यों?
गुजरात के संदेशरा बंधु का बैंकों के साथ दावों का निपटारा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष के अंत में इसकी मंजूरी दी थी। संदेशरा बंधुओं नितिन और चेतन संदेशरा तथा जांच एजेंसियों और कज़र् देने वाले बैंकों के बीच 5100 करोड़ रुपये जमा करने हेतु समझौता हुआ था। इस अंतिम निपटारे के तहत संदेशरा बंधुओं के खिलाफ सभी आपराधिक मामले—बैंक घोटाले, धोखाधड़ी या कज़र् डिफॉल्ट संबंधीमामले खारिज कर दिए जाएंगे। हैरानी की बात है कि संदेशरा बंधु की स्टर्लिंग बायोटेक पर बैंकों का लगभग 19,400 करोड़ रुपये बकाया था। उनके खिलाफ सभी आपराधिक मामले डिफाल्ट राशि के सिर्फ एक चौथाई हिस्से को अंतिम मानते हुए खारिज कर दिए गए हैं। दूसरी ओर विजय माल्या के खिलाफ 6000 करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा का डिफॉल्ट था। उन्होंने बैंकों से कोई धोखाधड़ी नहीं की थी। उनकी विमानन कंपनी घाटे में चल रही थी, जिससे वह समय पर कज़र् नहीं चुका सके। गिरफ्तारी के डर से वह भाग गए थे। उन्हें भगौड़ा कारोबारी घोषित करते हुए सरकारी जांच एजेंसियां उनसे 14000 करोड़ रुपये से ज्यादा वसूल चुकी है यानी मूल राशि के दोगुने से ज्यादा वसूली चाहती थीं। एक कारोबारी का 19000 करोड़ से ज्यादा का कज़र् अब 5000 करोड़ में निपटाया जा रहा है और दूसरे का 6000 करोड़ का कज़र् 14000 करोड़ रुपये में भी निपटाने से इंकार किया जा रहा है।
मोदी के साथ ही ऐसे ‘संयोग’ होते हैं!
ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार हो चुका है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाओं में कोई बच्चा या कोई व्यक्ति उनकी तस्वीर लेकर पहुंचता है और भारी भीड़ में भी मोदी उसे देख लेते हैं। बाद में उसे मोदी से मिलवाया जाता है। इसी तरह मोदी के काफिले के आगे एंबुलेंस आ जाने और उसे रास्ता दिए जाने का संयोग भी कई बार हो चुका है। अक्सर चुनाव आयोग मोदी जी के चुनाव वाले राज्यों को दौरे खत्म करने के ठीक अगले दिन चुनाव चुनावों की तारीखों की घोषणा कर देता है। देखिए कैसा संयोग है कि प्रधानमंत्री पिछले एक महीने से तमिलनाडु, केरल, बंगाल और असम के दौरे पर थे। उन्होंने 13 और 14 मार्च को असम व बंगाल में हज़ारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। वह 14 को वहां से लौटे और 15 मार्च को चुनाव आयोग ने मतदान की तारीखों का ऐलान कर दिया। यह एक रहस्य बना हुआ है कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को पहले अंतिम रूप दिया जाता है या चुनाव आयोग द्वारा चुनावों के बारे में घोषणा प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के अनुसार की जाती है।
कांग्रेसी सांसदों की इच्छा
केरल में विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस को एक विचित्र आंतरिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव की घोषणा हो गई है और कांग्रेस ने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा भी शुरू कर दी है, लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के कई सांसदों विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। कांग्रेस के लगभग आधा दर्जन सांसद विधानसभा चुनाव का टिकट चाहते हैं। वे अपने परिवार के किसी सदस्य या अपने रिश्तेदार के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए टिकट चाहते हैं। असल में पिछले दो चुनाव से केरल में कांग्रेस के लगभग सभी लोकसभा उम्मीदवार चुनाव जीत रहे हैं, लेकिन दिल्ली में उन्हें कुछ हासिल नहीं हो रहा है। दूसरी ओर इस बार कांग्रेस के ज़्यादातर नेता मान रहे हैं कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी। दो बार लगातार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा चुनाव जीत चुका है और पिनरायी विजयन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार चल रही है। कांग्रेस नेताओं को लग रहा है कि10 साल की सत्ता विरोधी लहर की वजह से वाम मोर्चा हारेगा और कांग्रेस की सरकार बनेगी। ऐसे में विधायक रहने पर राज्य सरकार में मंत्री बनने की संभावना रहेगी। इसीलिए कई सांसदों ने पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से इस बारे में बात की। हालांकि राहुल गांधी का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी सांसद को विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ाना है।
चुनाव हारने वाले फायदे में
यह कमाल का संयोग है कि पिछले 12 साल में भाजपा की टिकट पर जो भी नेता अमृतसर लोकसभा सीट से लड़ा, वह चुनाव हारा, लेकिन हारने के बाद उसे बहुत बड़ा फायदा हुआ। लगातार तीन नेताओं के साथ यह संयोग हुआ है। ताज़ा संयोग तरनजीत सिंह संधु का है, जिन्हें दिल्ली का उप-राज्यपाल बनाया गया है। वह 2024 में अमृतसर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़े थे और कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला से चुनाव हार गए थे। उनसे पहले 2019 में अमृतसर से लोकसभा चुनाव हरदीप सिंह पुरी लड़े थे। उन्हें भी कांग्रेस के औजला ने हरा दिया था और उसके बावजूद पुरी केंद्र में मंत्री बने। उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में लाया गया। वह शहरी विकास मंत्री रहे और अब पेट्रोलियम मंत्री बने हुए हैं। उनसे भी पहले भाजपा के बड़े नेता अरुण जेटली भी अमृतसर में चुनाव हारे थे। उस समय उन्हें कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हराया था। 2014 में अमृतसर सीट पर हारने के बाद अरुण जेटली देश के वित्त और रक्षा मंत्री बने।





