अमन-कानून बनाये रखना बड़ी चुनौती

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा प्रदेश में कानून के शासन एवं शांति व्यवस्था की स्थापना हेतु दिये गये निर्देशों के दृष्टिगत बेशक प्रशासन बड़ी सीमा तक सतर्क हुआ है। इसके तहत एक ओर जहां पुलिस ने चंडीगढ़ में प्रापर्टी डीलर हत्याकांड में शामिल दो कुख्यात गैंगस्टरों को एक संक्षिप्त मुकाबले के बाद गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है, वहीं फगवाड़ा में एक स्वीट्स शॉप पर फायरिंग करने वाले दो शूटरों को भी काबू कर लिया गया है, किन्तु इस सब कुछ के बावजूद प्रदेश में निरन्तर बढ़ती गोलीबारी की घटनाओं और गैंगस्टरों द्वारा फिरौती एवं रंगदारी वसूले जाने अथवा धमकी दिये जाने की घटनाओं ने प्रदेश के शांत माहौल में कंकड़ी मार कर हलचल भी पैदा की है। इसका प्रमाण पंजाब के राजधानी क्षेत्र चंडीगढ़ में गैंगस्टरों द्वारा, गैंगवार के अन्तर्गत दिन-दिहाड़े और सरेआम एक युवा कारोबारी की गोलियां मार कर हत्या कर दिये जाने की घटना ने प्रदेश की शांति-व्यवस्था पर मंडराते संकट को और घनीभूत किया है। इस घटना से यह भी पता चलता है कि आपराधिक तत्वों के हौसले बेहद बुलन्द हो चुके हैं। जिस  दीदा-दिलेरी से इस घटना की ज़िम्मेदारी ली गई है, वह भी प्रदेश का हित-चिन्तन करने वाले लोगों को चौंकाने वाली बात है। प्रदेश में एक मास के भीतर ही तीन-तीन सरपंचों की सरेआम गोलियां मार कर हत्या कर दिया जाना स्थितियों की गम्भीरता को साफ-साफ ज़ाहिर कर देने के लिए काफी है। 
जालन्धर के मॉडल टाऊन में भी कुछ समय पहले एक प्रापर्टी कारोबारी की इसी प्रकार भीड़-भाड़ वाले इलाके में दिन-दिहाड़े गोलियां मार कर हत्या कर दी गई थी, और इस मामले में पुलिस तंत्र के हाथ अभी तक खाली हैं। गैंगस्टरों द्वारा धनी-धनाढ्य लोगों को हत्या की धमकी देकर भारी-भरकम फिरौती अथवा रंगदारी मांगने की घटनाओं में भी निरन्तर इज़ाफा होता जा रहा है। एक चर्चित पंजाबी सिने कलाकर को फिरौती न देने पर हत्या की धमकी दिये जाने की घटना की तो अभी स्याही भी नहीं सूखी है। गुरदासपुर में एक परिवार को बंदी बना कर करोड़ों रुपये के आभूषण और नकदी लूट लिये जाने की घटना भी प्रदेश की शांति-व्यवस्था की सफेद चादर पर द़ाग लगाने के लिए काफी है। प्रदेश में स्वर्णकारों की लूट-पाट किये जाने की घटनाएं भी कानून-व्यवस्था को मुंह चिढ़ाये जाने के लिए काफी हैं।
स्नैचिंग और छीना-झपट की घटनाएं तो जैसे सर्व-मौसमी व्यवहार बन चुकी हैं। अब तो स्नैचर अपने घरों के बाहर बैठी अथवा खड़ी महिलाओं की बालियां-अंगूठियां तक जब्री झपटने लगे हैं। स्नैचिंग की वारदात का ही यह परिणाम है शायद कि प्रदेश में महिलाओं और पुरुषों ने सोने की चूड़ियां, अंगूठियां और कंगन आदि पहनना छोड़ दिया है। रात्रि-कालीन सेवाएं प्रदान करने वाले युवाओं ने आत्म-रक्षार्थ अपने पास लाठियां और हथियार रखना शुरू कर दिया है। स्नैचर अब सिर्फ लूटते ही नहीं, लूट हेतु सामान न मिलने पर लोगों को घायल भी कर देते हैं। प्रदेश में अपराध का डाटा यह है कि पिछले 6 मास में प्रदेश में 15 जगह गोलियां चली हैं। प्रदेश में अब तक 29 गैंगस्टर पकड़े अवश्य गये हैं किन्तु 64 अभी भी पकड़ से बाहर हैं। बाहरी राज्यों के गैंगस्टर भी साज़गार हालात देख कर प्रदेश में यदा-कदा सक्रिय होते रहते हैं। 
हम समझते हैं कि ऐसी स्थिति किसी भी देश के स्वस्थ समाज के लिए हितकर साबित नहीं हो सकती। पंजाब में भी मौजूदा स्थिति यहां के लोगों के लिए कदापि उचित नहीं है। नि:संदेह पंजाब की सरकार ने ऐसी स्थितियों पर अंकुश लगाने के लिए भरसक प्रयास किये हैं। पुलिस विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार बड़ी संख्या में गैंगस्टरों को पकड़ कर कानून की ज़द में लाया गया है। कानून को चुनौती देने वाले कई गैंगस्टर और आपराधिक तत्व पुलिस के साथ झड़पों में मारे भी गये हैं। सरकार के यत्नों से बड़ी संख्या में नशेड़ियों और नशा-तस्करों को पकड़ा गया है किन्तु इस सब के बावजूद यदि हिंसा, हत्या और गैंगवार जैसी घटनाएं बदस्तूर जारी हैं तो समझा जा सकता है, कि सरकार और प्रशासन को इससे भी कुछ अधिक किये जाने की आवश्यकता है। किसी भी देश, प्रदेश के समाज के लिए उन्नति और प्रगति के द्वार तभी खुलते हैं यदि वहां शांति-व्यवस्था और कानून का शासन कायम रहे। पंजाब की सरकार बेशक ऐसे यत्न कर रही है किन्तु ऐसा लगता है, कि अपराधियों के हाथ कानून के हाथों से लम्बे हो गये हैं। कभी कहा जाता था कि अपराधी कानून के लम्बे हाथों से बच नहीं सकते। आज भी, हम समझते हैं कि यदि सरकार और उसके पुलिस तंत्र ने ऐसे तत्वों को रोकना है, तो उसे अपने हाथ लम्बे करने होंगे। उसे ऐसी व्यवस्था भी करनी होगी, कि ऐसे तत्वों द्वारा अगला कदम उठाने से पूर्व ख़ौफ की लकीर उनके चेहरे पर दिखे। कुछ ऐसा करके ही पंजाब में मुख्यमंत्री के दावों के अनुसार सही रूप में शांति-व्यवस्था को सुनिश्चित किया जा सकता है।

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