यह संसार एक आईना है
दो युवक थे। दोनों आपस में गहरे दोस्त थे और एक ही शहर में रहते थे। वे दोनों ही शहर छोड़कर कहीं दूर जाना चाहते थे, लेकिन जाने का कारण दोनों का अलग-अलग था।
बहरहाल, एक दिन दोनों ने एक साथ अपना शहर छोड़ दिया। सुबह का समय था। वह शहर से बाहर निकले और पैदल ही चलते रहे। रास्ते में वह एक जंगल से गुज़रे। जंगल में उन्हें एक संत की कुटिया दिखायी दी। उन्होंने सोचा क्यों न आगे बढ़ने से पहले संत से सफलता के लिए आशीर्वाद ले लिया जाये। वह संत के पास पहुंच गये, जो उस वक्त अपनी कुटिया में ही बैठे हुए थे।
वे प्रणाम करने के बाद संत के सामने बैठ गये, संत की अनुमति मिलने पर और मार्गदर्शन की भी प्रार्थना की। संत ने पहले युवक से मालूम किया, ‘अपना गृह नगर छोड़ने का तुम्हारा क्या मकसद था?’
‘मुझे शहर की ज़िंदगी रास नहीं आ रही थी। शहर में हर कोई स्वार्थी है और मुझे ऐसे लोगों के साथ रहने में मुश्किल हो रही थी। मैं बेहतर अवसरों के लिए कहीं और जाना चाहता हूं,’ युवक ने जवाब दिया।
संत ने कहा, ‘दुनिया में तुम्हें ऐसी कोई जगह नहीं मिलेगी जहां लोग स्वार्थी न हों।’
‘तो फिर मैं क्या करूं?’ युवक ने सवाल किया।
‘अपनी यात्रा यहीं रोक दो,’ यह कहकर संत ने दूसरे युवक की तरफ देखा और उससे भी वही सवाल किया, ‘अपना गृह नगर छोड़ने का तुम्हारा क्या मकसद था?’
दूसरे युवक ने जवाब दिया, ‘गुरुदेव! मुझे अपने गृह नगर से बहुत प्यार है। मैंने उसे छोड़ने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि मैं नई-नई जगह देखना चाहता हूं ताकि अपने अनुभव व जानकारी में इज़ाफा कर सकूं और कुछ नयी चीज़ें करना सीख सकूं,’ दूसरे युवक ने जवाब दिया।
संत ने उससे कहा, ‘तुम्हें अपनी यात्रा जारी रखनी चाहिए, क्योंकि तुम जहां भी जाओगे, वहां तुम्हें अपने जीवन का उद्देश्य मिल जायेगा।’
संत ने दोनों युवकों को आशीर्वाद दिया। पहला युवक अपने गृह नगर लौट गया और दूसरा युवक अपनी यात्रा जारी रखता हुआ आगे बढ़ गया।
इस कहानी से हमें यह सबक मिलता है कि दुनिया हमारे लिए आईना है। अगर हम चीज़ों को नकारात्मक रोशनी में देखेंगे, तो हमें सिर्फ नकारात्मकता मिलेगी। अगर सकारात्मक दृष्टि से देखेंगे, तो संसार हमारे लिए सकारात्मक जगह बन जायेगी और हम अपने विकास के लिए बहुत कुछ सीख सकेंगे।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



