दुखद हादसा
उत्तर प्रदेश के बड़े तीर्थ स्थल मथुरा के निकट वृंदावन में हुआ नाव हादसा बेहद दुखदायी है, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई है और अभी कुछ लापता भी हैं। वृंदावन एक ऐसा तीर्थ स्थल है, जहां लाखों ही लोग जाते हैं। यहां भगवान कृष्ण जी ने अपना बचपन गुज़ारा। उनका जन्म मथुरा में हुआ। वृंदावन में सैकड़ों मंदिर हैं। यमुना के किनारे बसा होने के कारण यहां अनेक ही घाट हैं। यहां भगवान कृष्ण की याद में बना बांके बिहारी मंदिर लगातार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बना रहता है। पंजाब से भी कुछ दर्जन श्रद्धालु यहां गए थे और लुधियाना, मुक्तसर एवं जगराओं के लगभग 37 श्रद्धालु यमुना में एक मोटर बोट पर सवारी कर रहे थे।
गहरे पानी में बने पाटून पुल जिसे अब हटाया जा रहा था, से श्रद्धालुओं की नाव टकरा गई, जिस कारण यह हादसा हो गया, परन्तु नज़दीक के नाव वालों और गोताखोरों ने इनमें से कई व्यक्तियों को बचा लिया। इससे पहले भी देश भर में ज्यादातर धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए पूरे प्रबन्ध न किये जाने के कारण अक्सर हादसे हो जाते हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग शिकार हो जाते हैं। इस तरह के प्रत्येक बड़े हादसे के बाद विशेष रूप से मेलों और धार्मिक स्थलों पर एकत्रित हुए श्रद्धालओं संबंधी पुख्ता प्रबन्ध करने की योजनाएं बनाई जाती हैं। इन प्रबन्धों का कुछ प्रभाव भी पड़ता है। फिर भी स्थानीय प्रशासन द्वारा इन प्रबन्धों में त्रुटियां रह जाने के कारण या प्रबन्धकों की लापरवाही के कारण ऐसे दुखद हादसे घटित हो जाते हैं। ऐसा कुछ न घटित हो, इसकी ज़िम्मेदारी संबंधित राज्यों पर भी आती है। उनकी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वे प्रत्येक पक्ष से सचेत होकर प्रबन्ध करें, जिनसे श्रद्धालुओं की बड़ी से बड़ी संख्या को भी नियंत्रित किया जा सके, ताकि ऐसे हादसे न घटित हों। यमुना नदी की सैर करते हुए अथवा यहां एक से दूसरे स्थान पर नावों द्वारा जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन को सचेत होने की ज़रूरत है। जिस समय यह हादसा घटित हुआ, उस समय मोटर बोट में 31 श्रद्धालु थे, जिनमें से किसी ने भी लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। यह बात सुनिश्चित है कि यदि मोटर बोट के प्रबन्धकों या प्रशासन की ओर से नाव में बैठने वालों के लिए लाइफ जैकेट पहनना ज़रूरी किया जाता तो मरने वालों में ज्यादातर का बचाव होने की बड़ी सम्भावना थी।
इस संबंध में केन्द्र सरकार का भी यह फज़र् बनता है कि वह किसी भी धार्मिक या अन्य त्यौहार पर अथवा यदि किसी स्थान पर भारी जनसमूह जमा होने की सम्भावना हो, तो वह विशेष प्रबंध किए जाने के निर्देश दे और स्थानीय सरकारों द्वारा किए गए प्रबन्धों संबंधी भी केन्द्र सरकार से संबंधित अधिकारियों द्वारा सम्पर्क बनाए रखना ज़रूरी होना चाहिए। चाहे प्रधानमंत्री द्वारा और पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा भी प्रभावित परिवारों के लिए राहत की घोषणा की गई है परन्तु ऐसे हादसों के कारण लम्बी अवधि तक संबंधित परिवारों को बड़ी त्रासदी भोगनी पड़ती है। समाज के सभी वर्गों और प्रशासनों को यह सुनिश्चित बनाना चाहिए कि भविष्य में ऐसा कुछ घटित न हो।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

