भारत का संगीत शहर कौन-सा है ?

‘दीदी, हर देश की अपनी अपनी अलग भाषा है बल्कि कुछ देशों में तो अनेक भाषाएं भी हैं, जैसे हमारा अपना देश। लेकिन क्या कोई यूनिवर्सल भाषा भी है?’
‘वैसे तो अंग्रेज़ी को अधिकतर देशों में समझा जाता है, लेकिन यूनिवर्सल भाषा तो वास्तव में सिर्फ संगीत ही है।’ 
‘हां, यह बात तो है।’
‘लेकिन क्या तुम्हें मालूम है कि भारत में एक शहर ऐसा भी है जिसे संगीत शहर कहा जाता है।’ 
‘नहीं, मुझे नहीं मालूम।’ 
‘हालांकि हमारे देश में अनेक शहर ऐसे हैं, जो अपनी संगीत परम्परा के लिए विख्यात हैं जैसे चेर्न्न, कोलकाता, मुंबई आदि लेकिन इनमें से कोई भी संगीत शहर नहीं कहलाता है।’
‘चेन्नई तो कर्नाटक संगीत के लिए विख्यात है, विशेषकर अपने वार्षिक संगीत सीजन की वजह से।’
‘हां, मैं जानती हूं और कोलकाता में भी शास्त्रीय व लोक संगीत की लम्बी व मज़बूत परम्परा है और मुंबई आधुनिक व फिल्म संगीत के साथ क्लासिकल परफॉर्मेंस को भी प्रोत्साहित करता है। लेकिन यह भारत का संगीत शहर नहीं है।’
‘फिर संगीत शहर कौन सा है?’
‘भारत का सबसे प्राचीन शहर ही संगीत शहर है।’
‘वाराणसी यानी बनारस।’ 
‘हां। ..और वाराणसी को यूनेस्को ने भी संगीत के रचनात्मक शहर के रूप में मान्यता दी है, जिससे मालूम होता है कि इस शहर की शास्त्रीय संगीत परम्पराओं को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका है।’
‘वैसे वाराणसी संगीत शहर क्यों है?’
‘दरअसल, यह संसार के उन प्राचीन शहरों में से एक है, जहां इंसानी आबादी निरंतर रही है। इसके लम्बे इतिहास के कारण संगीत व कला के परम्परागत रूपों को सुरक्षित रखा गया। यहां क्लासिकल संगीत की शिक्षा देने की सदियों पुरानी परम्परा है और संगीत परफॉर्मेंस की भी। वाराणसी में धार्मिक समारोहों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में संगीत की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां से अनेक महान संगीतकार निकले हैं।’
‘जैसे?’
‘अरे भारत रत्न से सम्मानित शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को भूल गये क्या।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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