सचेत पहरेदारी की ज़रूरत
विगत दिवस राजपुरा के निकट शम्भू-अम्बाला रेल मार्ग पर हुआ धमाका, जिसमें एक व्यक्ति जो घटना को अंजाम दे रहा था, भी मारा गया। नि:संदेह पंजाब और समूचे क्षेत्र के लिए पैदा हुईं गम्भीर सुरक्षा चुनौतियों की ओर एक बार फिर से ध्यान केन्द्रित होता है। उस व्यक्ति की पहचान से जुड़ी कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने पूरी सतर्कता से आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे मिली सूचनाओं के अनुसार इसके तार विदेशों में बैठे आतंकवादी तत्वों के साथ जुड़े हुए हैं। अब तक की प्राप्त जानकारी के अनुसार इस घटनाक्रम को भी मलेशिया में बैठे आतंकवादी तत्वों द्वारा अंजाम दिया गया है, जिनका उद्देश्य पंजाब और देश का माहौल खराब करना है। पंजाब में सक्रिय कुछ ऐसे तत्वों के तार पाकिस्तान, मलेशिया और अन्य अनेक देशों के साथ जुड़े हुए हैं, जहां ये लोग सक्रिय हैं और उन्हें प्रत्येक तरह की सहायता पाकिस्तान से मिल रही है।
ये संगठन पंजाब में बैठे ज़रूरतमंद युवाओं को किसी न किसी तरह के लालच देकर भ्रमित करके ऐसे कार्यों के लिए इस्तेमाल करते हैं। जहां तक हथियार और गोली-सिक्के का संबंध है, पिछले वर्षों में पड़ोसी देश से इनकी बड़ी खेप आने के समाचार मिल रहे हैं। ऐसे संगठन लगातार प्रदेश के माहौल को खौफज़दा बनाने की योजनाएं बनाते रहते हैं। पिछले कई वर्षों से स्कूलों से लेकर अस्पतालों और अन्य अहम संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकियां मिलती रही हैं, जो आज भी जारी हैं। जिससे माहौल में अस्थिरता और अनिश्चितता पैदा होती है। पिछले वर्षों से इन संगठनों की योजना रेल पटरियों को निशाना बना कर भारी जान-माल का नुकसान करने की रही है। इसी वर्ष जनवरी के महीने में सरहिन्द के निकट रेलवे ट्रैक पर धमाका हुआ था, जिससे 60 फुट तक रेल लाइन को नुकसान पहुंचा था। इसी तरह रेल यातायात में रुकावट डालने के लिए लाइनों पर अलग-अलग तरह के अवरोध लगाने का यत्न किया जाता रहा है, ताकि रेलवे में असुरक्षा पैदा की जा सके। 24 अप्रैल को भी पटियाला, बठिंडा, लुधियाना और अमृतसर में भेजी गई ई-मेल द्वारा बम से रेल ट्रैक उखाड़ने की धमकियां दी गई थीं और अब ऐसी घटना घटित भी हो गई है। बड़ी चिन्ताजनक बात यह है कि पिछले महीनों से ड्रोनों द्वारा ग्रेनेड भेजने की घटनाएं भी लगातार बढ़ती गई हैं। इसका पक्ष-पोषण पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. करती आ रही है। रेल ट्रैकों के साथ-साथ वर्ष 2024 से अनेक ही पुलिस स्टेशनों पर ग्रेनेड हमले भी किए गए, जिनमें अजनाला, घणीए के, बांगर, अमृतसर में इस्लामाबाद पुलिस स्टेशन, वडाला बांगर, फतेहगढ़ चूड़ियां आदि कई थाने शामिल हैं। इनके साथ-साथ राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाने के यत्न किए जाते रहे हैं। पिछले 2 वर्षों से लगभग 5 दर्जन ग्रेनेड पकड़े गए हैं। पिछले 6 महीने से ऐसी घटनाओं में बहुत वृद्धि हुई है। इन 2 वर्षों में ही कम से कम 30 कार्रवाइयां ग्रेनेड से की गई हैं। लगातार भेजे जाने वाले ड्रोनों की संख्या भी बढ़ गई है, जिनसे हथियारों और नशे की खेप भेजी जाती है।
चाहे पुलिस के साथ-साथ अलग-अलग एजेंसियां इन घटनाओं का पता लगाने के पूरे यत्न कर रही हैं, परन्तु इसके बावजूद ऐसी सप्लाई लगातार जारी है, जिसने प्रदेश सरकार की चिन्ताओं में भारी वृद्धि कर दी है। यह बात सुनिश्चित बनती जा रही है कि पड़ोसी देश किए जाते ऐसे कारनामों से पीछे हटने वाला नहीं है। ऐसा वहां की सेना की योजनाबद्ध नीति है, जिसका सरकार और सुरक्षा बलों को पूरी तरह सचेत होकर मुकाबला करना होगा। क्योंकि बुरे दोस्तों व साथियों को तो बदला जा सकता है परन्तु बुरे पड़ोसी को नहीं बदला जा सकता। उसका मुकाबला करने के लिए प्रदेश और देश को प्रत्येक स्थिति में तथा प्रत्येक पक्ष से अपनी सतर्कता को और बढ़ाने की ज़रूरत होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

