चंपक वन में घुसपैठिया
चेतन चीता गर्मी की छुट्टियां बिताने अपनी नानी के घर ‘हरमन जंगल’ आया हुआ था। चेतन चीते की अपनी गुफा चंपक वन में काली पहाड़ी के पास थी। चेतन के माता-पिता काली पहाड़ी के पीछे बहने वाली कल-कल नदी के दूसरी ओर एक पार्क में अपनी कपड़ों की दुकान चलाते थे। स्कूल से आने के बाद चेतन अक्सर अपनी गुफा में अकेला ही रहता था। अब छुट्टियां हुईं, तो वह हरमन जंगल अपनी नानी के घर पहुंच गया।
चेतन को अपने नाना-नानी के घर आकर बहुत आनंद आता था। यहां खाने-पीने की पूरी आजादी थी और कोई रोक-टोक भी नहीं थी। हरमन जंगल की हरी-भरी वादियों में उसका मन बहुत प्रसन्न रहता था। वह दिन भर खूब खेलता और रात को अपने नाना-नानी से ढेरों कहानियां सुनता। इस बार ननिहाल आने पर उसके नाना ने उसे एक नया और महंगा ‘स्मार्टफोन’ भी खरीद कर दिया था। नाना-नानी चेतन को बहुत प्यार करते थे और चेतन भी जैसे ही दो-चार छुट्टियां मिलतीं, उनका प्यार पाने हरमन जंगल पहुंच जाता था। अब तो उसके पास स्मार्टफोन भी था, जिससे वह जब चाहे नाना-नानी से बातें कर सकता था। इंटरनेट के जरिए वह पूरी दुनिया से जुड़ गया था और उसने अपनी डायरी के सभी दोस्तों के नंबर फोन में सेव कर लिए थे।
अब उसकी छुट्टियां खत्म होने वाली थीं। अगले दिन उसे चंपक वन अपनी गुफा में वापस जाना था। उसने अपने सभी दोस्तों को फोन करके अपने वापस आने की सूचना दे दी थी।
अगले दिन सुबह वह चंपक वन के लिए निकल पड़ा और शाम तक अपनी गुफा पहुंच गया। जैसे ही उसने गुफा में प्रवेश किया, अंदर से एक बहुत ही भयानक आवाज़ आई-‘मियांऊँ... ऊँ.... ऊँ!’ ...वह डरकर तुरंत गुफा से बाहर भाग आया। चेतन के दिल की धड़कन तेज हो गई थी और उसके कानों में वह भयानक आवाज़ गूंज रही थी। ‘गुफा के अंदर कौन हो सकता है?’ वह सोचने लगा। कुछ देर बाद जब वह थोड़ा शांत हुआ, तो उसे लगा कि शायद यह उसका वहम हो। उसने हौसला जुटाया और दोबारा गुफा में गया। इस बार तो और भी ज्यादा गरजने वाली ‘मियांऊं’ की आवाज़ आई जिससे वह कांप गया। वह डर के मारे तेजी से बाहर भागा।
एक शहतूत के पेड़ के नीचे बैठकर उसने खुद को संभाला। उसने सोचा कि भागकर दुकान पर अपने माता-पिता के पास चला जाए और उन्हें बताए कि गुफा में खतरा है, शायद कोई भयानक भूत आ गया है और उन्हें अब यह जगह छोड़ देनी चाहिए। पर फिर उसे याद आया कि नानी की कहानियों में तो भूत काल्पनिक होते हैं, तो फिर यह इतना खतरनाक कैसे हो सकता है? इसका हल निकालने के लिए उसने अपने दोस्तों को मैसेज भेजकर बुला लिया। उसका दोस्त मोटू शेर तुरंत आ गया। भोला हाथी भी धीरे-धीरे चलते हुए वहां पहुंच गया। मिकल मंकी और हीरा खरगोश भी अपने साथियों के साथ आ गए। जंगल का ‘सूचना अधिकारी’ लंबू लंगूर भी वहां पहुंच चुका था, जिसने यह खबर महाराज बब्बर शेर तक पहुंचा दी थी।
चेतन की गुफा के बाहर जानवरों का तांता लग गया। चेतन ने सबको आवाज़ वाली बात सुनाई। वहां लूसी लोमड़ी भी थी, जो खुद को बहुत चालाक समझती थी। उसने चेतन का मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘अरे चेतन! तुम तो चीता हो, एक ‘मियांऊं’ की आवाज़ से डर गए? लगता है नानी के घर जाकर तुम शिकार करना भूल गए हो!’
चेतन ने शांति से जवाब दिया, ‘मौसी, डर आवाज़ का नहीं, अनजाने खतरे का है। समझदारी इसी में है कि पहले दुश्मन की ताकत का पता लगाया जाए।’ चेतन का जवाब सुनकर लूसी शर्मिंदा होकर एक तरफ खड़ी हो गई।
भोला हाथी कुछ देर सोचता रहा, फिर बोला, ‘डरने की ज़रूरत नहीं है, यह आवाज़ जानी-पहचानी लग रही है। मुझे लगता है यह आवाज़ ‘बाघड़-बिल्ले’ उर्फ बिल्लू बदमाश की है! वह अपने सुकड़ू जंगल को छोड़कर हमारे चंपक वन में दहशत फैलाने आया है। उसे पकड़कर सबक सिखाने का वक्त आ गया है।’
भोले हाथी ने अपनी सूंड गुफा के अंदर डाली और उसे पकड़ लिया। हालांकि बिल्लू बदमाश ने हाथी की सूंड पर नाखून मारे, लेकिन बहादुर हाथी उसे खींचकर बाहर ले आया। बाहर आते ही सबने उसे दबोच लिया। थोड़ी मरम्मत के बाद उसे महाराज बब्बर शेर के सामने पेश किया गया। महाराज के मांगने पर वह अपना ‘पासपोर्ट’ भी नहीं दिखा सका। बिना पासपोर्ट के अपने देश में घुसपैठिया देखकर महाराज को बहुत गुस्सा आया। वे गरजे, ‘चंपक वन में शरारत और गुंडागर्दी के लिए कोई जगह नहीं है। बिल्लू बदमाश ने न सिर्फ घुसपैठ की बल्कि हमारे होनहार चेतन को डराया भी है।’ महाराज बब्बर शेर ने उसे बिना पासपोर्ट चंपक वन प्रवेश करने और गुंडागर्दी करने के जुर्म में दो साल की जेल की सजा सुना दी।
-मो. 9654036080



