डब्ल्यूटीसी में क्या बुमराह तुरुप का इक्का साबित होंगे ?

टी 20 विश्व कप की जीत के बाद अब बीसीसीआई के राष्ट्रीय चयनकर्ताओं व टीम प्रबंधन का फोकस वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (डब्लूटीसी) और 2027 ओडीआई विश्व कप के लिए योजना बनाने पर हो गया है। इन योजनाओं के केन्द्र में एक कठिन प्रश्न है कि सुपरस्टार तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह के कार्यभार का प्रबंधन किस तरह से किया जाये? ध्यान रहे कि बुमराह का जो विशिष्ट एक्शन है उसके कारण उनके 32 वर्षीय शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे उनके कार्यभार प्रबंधन का सवाल खड़ा हो जाता है। बीसीसीआई चाहती है कि आगामी सत्र में डब्लूटीसी के जो 9 टेस्ट होने निर्धारित हैं, उन सबको बुमराह खेलें। बीसीसीआई की यह चाहत अकारण नहीं है। डब्लूटीसी 2023-25 के चक्र में जिन गेंदबाज़ों ने 50 या उससे अधिक विकेट लिए उनमें बुमराह का औसत, इकॉनमी रेट व स्ट्राइक रेट सबसे अच्छा था। बुमराह ने 15 मैचों में 77 विकेट 15.1 की औसत से लिए थे, जबकि उनका स्ट्राइक रेट 30.6 व इकॉनमी रेट 2.3 रहा था। उन्होंने एक पारी में 45 रन देकर 6 विकेट लिए और मैच में 91 रन देकर 9 विकेट लिए थे, जोकि उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इन 15 टेस्ट में से भारत ने 7 में जीत दर्ज की थी, जिनमें बुमराह ने 13.7 की औसत, 27 का स्ट्राइक रेट व 3 के इकॉनमी रेट से 40 विकेट लिए थे। इस डाटा से मालूम हुआ कि बुमराह ने जब बेहतर प्रदर्शन किया, तो भारत को जीत मिली। 
गौरतलब है कि भारत अब तक डब्लूटीसी के फाइनल में दो बार पहुंचा है, लेकिन जीत का मेस (गदा) न उठा सका क्योंकि पहली बार न्यूज़ीलैंड से और दूसरी बार ऑस्ट्रेलिया से वह पराजित हो गया था। इस समय विश्व चैंपियन दक्षिण अफ्रीका है, जिसने पिछले साल ऑस्ट्रेलिया को फाइनल में हराया था। अपने ही घर पर स्पिनिंग ट्रैक के होते हुए भारत दक्षिण अफ्रीका से 0-2 से पराजित हो गया था, जिससे डब्लूटीसी टेबल में उसकी स्थिति इस समय अच्छी नहीं है कि वह छठे पायदान पर है। हालांकि इस वक्त चर्चा ओडीआई विश्व कप की अधिक है, लेकिन टेस्ट फॉर्मेट को बचाये रखने के लिए आवश्यक है कि भारत डब्लूटीसी चक्र में भी अच्छा प्रदर्शन करे। इसलिए भी बीसीसीआई चाहती है कि बुमराह सीजन के सभी 9 टेस्ट खेले। भारत आगामी 6 जून से चंडीगढ़ में एक टेस्ट अफगानिस्तान के विरुद्ध खेलेगा, लेकिन वह डब्लूटीसी चक्र का हिस्सा नहीं है। चक्र के भारत के 9 टेस्ट इस प्रकार हैं- इस साल 2-2 टेस्ट श्रीलंका व न्यूज़ीलैंड के खिलाफ और फिर अगले साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया बॉर्डर-गावस्कर ट्राफी के 5 टेस्ट खेलने के लिए भारत आयेगी। इन टेस्ट्स में अच्छे प्रदर्शन से ही डब्लूटीसी चक्र में भारत की डूबती नैय्या पार लग सकेगी। अत: बीसीसीआई टेस्ट्स को प्राथमिकता दे रही है। 
बीसीसीआई सूत्रों का कहना है, ‘प्रयास यह है कि बुमराह को पर्याप्त फिट रखा जाये ताकि वह सीजन के सभी 9 टेस्ट खेले। उम्मीद यह है कि वह श्रीलंका व न्यूज़ीलैंड में सभी 4 टेस्ट खेलेंगे। चुनौती यह है कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पांचों घरेलू टेस्ट्स के लिए तरोताजा रखा जाये। इसलिए चयनकर्ता उन्हें कुछ ओडीआई श्रृंखलाओं में आराम दे सकते हैं। पिछले सितम्बर में उन्होंने दो वर्ष के फासले पर एशिया कप में टी-20 क्रिकेट खेली थी और उसके बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया।’ पिछले साल इंग्लैंड दौरे पर बुमराह 5 में से सिर्फ 3 टेस्ट के लिए उपलब्ध थे, लेकिन वह जिन टेस्ट्स में खेले उनमें से 2 भारत हारा, 1 ड्रा रहा, जबकि वह जिन 2 टेस्ट में नहीं थे, उनमें भारत ने शानदार जीत दर्ज की। इससे यह अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है कि बुमराह के बिना भी भारत की गेंदबाज़ी में जीत दिलाने का दमखम है, बशर्ते कि बल्लेबाज़ी में ऐसी चूक न हो जैसी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता 2025 टेस्ट में भारतीय बैटर्स 124 रन का लक्ष्य भी पार न कर सके और पूरी टीम मात्र 93 रन पर सिमट गई। इस पृष्ठभूमि में बोर्ड चाहता है कि बुमराह को क्लिनिकली फिट रखा जाये और वह सभी 9 टेस्ट खेलें। इंग्लैंड दौरे के बाद बुमराह ने घर पर वेस्टइंडीज व दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सभी 4 टेस्ट खेले थे। अनुमान यह है कि बुमराह अभी टी-20 इंटरनेशनल नहीं खेलेंगे; क्योंकि अगली महत्वपूर्ण टी-20 प्रतियोगिता 2 साल बाद है। 
इसमें शक नहीं है कि अगर भारत को डब्लूटीसी के फाइनल के लिए क्वालीफाई करना है तो भारत की घरेलू स्थितियों में बुमराह महत्वपूर्ण गेंदबाज़ होंगे। जब से गौतम गंभीर भारत के मुख्य कोच बने हैं, तब से भारत डब्लूटीसी फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया है। न्यूज़ीलैंड (3-0) व दक्षिण अफ्रीका (2-0) हमारे ही घर में आकर हमारा सूपड़ा साफ कर गये। भविष्य में इस शर्मनाक स्थिति से बचने के लिए बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर फिट हैं तो फर्स्ट-चॉइस टेस्ट खिलाड़ियों को ही मैदान में उतारा जाये। आईपीएल के खत्म होने के बाद खिलाड़ियों के कार्यभार की समीक्षा की जायेगी और उसके बाद ही अफगानिस्तान के खिलाफ उतरने वाली टीम की घोषणा की जायेगी। विचार टेस्ट्स के प्रति गंभीर होने का है। अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट भले ही डब्लूटीसी चक्र में शामिल न हो, लेकिन मैच प्रैक्टिस से बढ़कर कोई चीज़ नहीं होती है। टॉप खिलाड़ियों का मूल्यांकन होगा और उसी के आधार पर आगे की योजना बनायी जायेगी। सवाल यह है कि क्या डब्लूटीसी चक्र में बुमराह तुरुप का पत्ता साबित होंगे? जवाब तो समय ही देगा।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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