लम्बी होती दुश्मनी की दास्तान

भारत के आज़ादी संघर्ष के बाद देश का विभाजन उस समय बने किस तरह के माहौल और किस हालात में हुआ, इस संबंध में अब तक बहुत कुछ बोला और लिखा गया है, जो सैकड़ों ही किताबों में दर्ज हो चुका है परन्तु 1947 के इस विभाजन के बाद कश्मीर के मामले पर दोनों देशों की दुश्मनी की वार्ता पिछले सभी दशकों में जारी रही है। इस मामले पर अब तक दोनों देशों के अरबों-खरबों रुपये खर्च हो चुके हैं। लाखों ही ज़िन्दगियां इसकी बलि चढ़ चुकी हैं। दोनों देशों को कई विनाशकारी युद्धों से गुज़रना पड़ा है, परन्तु यह दु:खद दास्तान लम्बी ही होती गई है।
इस संबंध में भी निश्चित रूप में कुछ नहीं कहा जा सकता कि आगामी कितने समय तक यह स्थिति जारी रहेगी और दोनों देशों को और कितने नुकसान का सामना करना पड़ेगा। दोनों देशों में आज करोड़ों लोग ऐसे हैं, जो निम्न स्तरीय जीवन व्यतीत कर रहे हैं और गरीबी के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। पाकिस्तान ऐसा बदनसीब देश है जो लम्बे समय तक सैन्य तानाशाही के कदमों से कुचला जाता रहा है। समय-समय पर इसमें पैदा हुए हालातों के कारण आज यह आतंकवादी संगठनों का गढ़ बन गया है। अनिश्चित राजनीति और बेकाबू सेना की नीतियों के कारण यह आज विश्व भर में झोली फैलाने के लिए विवश हो चुका है। सैन्य तानाशाहों की नीतियों ने भारत के साथ इसकी दुश्मनी को लगातार बढ़ाया है, जब से अपनी शरण में आए और पक्ष-पोषित आतंकवादी संगठनों को इसने भारत के विरुद्ध इस्तेमाल करके इसे लगातार रक्त-रंजित करना जारी रखा हुआ है, उसी समय से ही न सिर्फ दोनों में आपसी खिचाव बढ़ता गया, अपितु इन नीतियों के कारण दोनों में सैन्य टकराव भी पैदा हुए हैं। इस लम्बी और दु:ख भरी वार्ता के दोनों देशों में करोड़ों ही गवाह हैं, जो किसी न किसी रूप में इस दुखांत को भोग चुके हैं।
इसी क्रम में पिछले वर्ष 22 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान के प्रशिक्षित आतंकवादियों ने पहलगाम की खूनी घटना को अंजाम दिया था, जिसमें 25 पर्यटकों और एक गाइड की गोलियां मार कर हत्या कर दी गई थी। भारत के सामने एक बार फिर इस मोर्चे पर यह गम्भीर चुनौती आ खड़ी हुई थी, जिसका जवाब उसने कुछ दिनों बाद ही 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम पर दिया था। इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप पाकिस्तान के साथ प्रत्यक्ष लड़ाई लड़ने के स्थान पर भारतीय वायु सेना ने सीमा पार पाकिस्तानी कब्ज़े वाले कश्मीर और वहां के पंजाब में 9 आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए गए थे। बहुत ही योजनाबद्ध ढंग के साथ मिसाइलों से यह हमले किए थे, जिनमें आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। तीन दिन तक यह कार्रवाई जारी रही थी, जिसमें मुज़फराबाद, कोटली, बहावलपुर, मुरीद के और कुछ अन्य स्थानों पर आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया गया था। तीन दिन बाद ही अभिप्राय 10 मई को पाकिस्तान की ओर से लड़ाई बंद करने का संदेश आ गया था। 
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को बेहद योजनाबद्ध ढंग से और पहले ही लक्ष्य निर्धारित करके सफल बनाया गया था। इस प्रकार की कार्रवाई से पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया था, परन्तु इस दौरान भारत ने दृढ़ता और दलेरी का सबूत दिया था। ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष बाद भारतीय जरनैलों द्वारा अब यह संदेश दिया गया है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए इसी तरह पूरी दृढ़ता के साथ कदम उठाता रहेगा। पाकिस्तान में कोई भी आतंकवादी ठिकाना सुरक्षित नहीं है और यह मिशन की एक शुरुआत है, परन्तु वर्ष व्यतीत होने के बाद ही यह अहसास ज़रूर होता है कि पाकिस्तान के भारत प्रति इरादों में अभी भी कोई बदलाव नहीं आया, जिससे इस टकराव के और भी लम्बे होने की सम्भावना बन चुकी है, इसलिए भारत को इस पक्ष से लगातार सचेत और पूरी तरह से तैयार रहने की ज़रूरत होगी।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

#लम्बी होती दुश्मनी की दास्तान