बम की अफवाहें किसी बड़ी साज़िश का हिस्सा तो नहीं ?
पूरा देश बम धमाके की झूठी अफवाहों से भयभीत हो रहा है। राजस्थान की विधानसभा, बॉम्बे स्टाक एक्सचेंज, हरियाणा सचिवालय, दिल्ली विधानसभा, मेट्रो रेल, देश के दूसरे हाईकोर्ट को बमों से उड़ा देंगे। हजारों धमकियां ऐसी जिसमें स्कूलों को बम से उड़ाने की अफवाहें और हवाई उड़ानों को बाधित करने की धमकियां ऐसे दी जा रही हैं। दो साल से अधिक होने के बाद भी इन धमकियों की गति कम नहीं हुई है। ऐसा लगने लगा है कि ये किसी बड़ी घटना का मॉक ड्रिल हैं, जो अगर हो गई तो हालात गंभीर हो सकते हैं।
बम विस्फोट की गंभीरता ऐसे समझिए कि राजस्थान में वर्ष 2008 में 13 मई को जब सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, तो पूरा भारत कांप गया था। आस्थाधाम मंदिरों के बाहर इन्हें बिना किसी धमकी के अंजाम दिया गया। तब 70 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और कम से कम 170 लोग घायल हुए थे।
राजस्थान में तो विधानसभा को उड़ा देने की अब तक तीन बार धमकियां मिल चुकी हैं। दिल्ली में संसद पर हमला सभी को पता है, हालांकि वह बम से उड़ा देने वाली घटना नहीं थी, परन्तु थी बहुत ही गंभीर। साइबर सेल अत्यंत गोपनीयता से काम कर रहे हैं और मेल आदि का असली श्रोत क्या है, यह एक चुनौती की तरह लिया जा रहा है।
पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों को तलाश कर भारत ने खत्म किया है। सर्जिकल स्ट्राइक से डरे आतंकवादी लंबे समय तक उठ नहीं पाए और फिर ऑपरेशन सिंदूर ने सारा काम पूरा कर दिया। मगर बम विस्फोट करने की धमकियां कहां से आ रही हैं? कौन दे रहा है, इसके पीछे कौन है जिनकी ताकत से धमकियां देने वाले लोगों को डरा रहे हैं? इसके बाद क्या कहने को बचता है कि जिनके कंधों पर प्रदेश को चलाने का बोझ है, वह भी धमकियं देने वालों का पता नहीं लगा पा रहे हैं। एक अनुमान के आधार पर देशभर में पिछले कुछ महीनों में अभी तक कम से कम तीन हज़ार से अधिक धमकियां मिल चुकी हैं। सर्वाधिक आर्थिक नुकसान हवाई कारोबार का हुआ है। धमकी मिलते ही या तो उड़ाने रद्द करनी पड़ी या रास्ते बदले गए या फिर इमरजेंसी लैंडिंग करके यात्रियों को सुरक्षित किया गया। तीनों एयरलाइंस को कोई 300 से अधिक धमकियां पिछले कुछ महीनों में मिल चुकी हैं। विमानन उद्योग के विशेषज्ञों की मानें तो उड़ान इमरजेंसी में रद्द करने से एक हज़ार करोड़ से ऊपर का नुकसान हो चुका है और उड़ान आदि को सुरक्षित करने के ऑपरेशन, जिसमें जांच आदि शामिल हैं, में भी इससे दो गुना अधिक राशि खर्च हो चुकी है।
झूठी धमकियां जहां पर मिलती है, वहां पर स्पेशल जांच विंग के साथ ही डॉग स्क्वॉयड, फायर ब्रिगेड आदि का जो समय खराब होता है, वह देश के दूसरे अपराधों को रोकने या फिर उनकी जांच में खर्च हो सकता है। मगर जब एक साथ सैंकड़ों लोगों की जान की बात आती है, तो उसे प्राथमिकता से देखा जाता है। यूं भारत ही नहीं दुनिया के कई अन्य देशों में भी धमकियों की सूचनाएं प्रसारित होती हैं। अमरीका, सिंगापुर जैसे देशों में भी इनका खौफ है। यहां के एयरपोर्ट या दूसरे स्थान सुरक्षा के मामले में भारत से कई गुना आगे हैं। खैर, प्रश्न यह है कि झूठी धमकियों पर हो क्या रहा है? दरअसल पुलिस या उसके जैसे दूसरे सुरक्षा बलों को जब कोई विस्फोट की धमकी मिलती है, तो वे जांच करते हैं और पता चलता है कि यह किसी ऐसी फर्जी मेल से आया है जिसका उपयोग डराने के लिए ही किया गया है। इसे डार्क वेब का भी प्रोडक्ट कह सकते हैं। जहां तक देश की बड़ी सुरक्षा एजेंसिंयों की बात है, तो वह इसे अभी भी किसी बड़ी साज़िश का हिस्सा ही मान रही हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि यह किसी की मज़ाकिया साज़िश है। दिल्ली हाईकोर्ट के जज के मामले में पता चला था कि किसी बेरोज़गार ने ऐसा किया। बाद में उसे मानसिक रोगी बताया गया। एक व्यक्ति और 1100 धमकियों का जनक, यह बात सुनने में भले ही मज़ाक वाली लगे, परन्तु कहीं न कहीं कोई मामला तो है। यदि यह मान लिया जाए कि यह काम कोई बेरोज़गार या मानसिक रोगी कर रहा है तो धमकियों से पहले उसने क्या-क्या किया और उसका समाज में क्या व्यवहार रहा है, इस पर क्या जानकारी आयी?
अपराधियों ने ऐसी झूठी अफवाहों को अपना हथियार बना लिया है क्या? यह प्रश्न महत्वपूर्ण है? कारण सीधा-सा है कि वह धमकियां देकर कहीं यह, तो नहीं देख रहे कि ज़रा ढील मिले और वह अपना काम अंजाम दे दें? क्या इसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश या उनके जैसे किसी सहयोगी देश का हाथ है, जो भारत में धमकियों के माध्यम से एक आतंक का माहौल कायम रख अपनी किसी बड़ी आतंकवादी घटना को अंजाम देने को तैयार हो रहे हैं? कोई ऐसा देश जो भारत को साइबर के क्षेत्र में मदद कर रहा हो और भारत ने कितनी तरक्की कर ली है, यह जांच रहा है? कौन है वह?
एक बात यह भी है कि जब हम इन धमकियां देने वालों का ही पता नहीं लगा पर रहे तो कोई घटना हो जाने पर क्या करेंगे? क्या पता चल पाएगा कि धमकी न होकर यह सही बात थी? और विधानसभा, हाईकोर्ट, बड़े स्कूल, मंदिर जहां पर देश के वीवीआईपी हमेशा आते-रहते हैं, वहां पर ऐसा होने पर क्या सुरक्षा प्लान है, अभी तक इसका मॉक ड्रिल हुआ है, यह नहीं लगता। हां, जांच के नाम पर डॉग स्क्वॉयड के साथ सुरक्षा बल खोजबीन करके लौट आते हैं और फिर वहीं रिपोर्ट—यह झूठी अफवाह महज डराने के लिए दी गई प्रतीत होती है या जांच चल रही है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



