आसान नहीं होगी सुवेंदु अधिकारी की राह

पश्चिम बंगाल की सियासत में एक नया अध्याय जुड़ा गया। सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। वह राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। भाजपा पहली बार सत्ता में आई है। देखा जाए तो सुवेंदु की राह इतनी आसान नहीं होगी। उनके सामने असली पांच चुनौतियां होंगी। बंगाल चुनाव में परिवर्तन का दावा कर सत्ता में आई भाजपा के पास अब बेहतर प्रदर्शन का दबाव होगा। खास बात है कि बंगाल में सबसे बड़ा मुद्दा कानून-व्यवस्था का है।
भाजपा सरकार के आगे सबसे बड़ी चुनौती अमन-कानून की स्थिति बनाए रखने की होगी। बंगाल में चुनाव से पहले और चुनाव के बाद हिंसा का इतिहास रहा है। अभी भी 4 दिन पहले सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक की हत्या कर दी गई। लगातार भाजपा नेताओं को निशाने पर लिया गया। बंगाल में हत्या की वारदात आम हो गई है। महिला अपराध को लेकर बंगाल पहले से ही निशाने पर रहा है। ममता बनर्जी सरकार पर कनून-व्यवस्था ठीक से लागू न करने के आरोप लगते रहे हैं। नई सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाएं अब और न हों। पार्टी के भीतर इस संबंध में एक कड़ा संदेश पहले ही दे दिया गया है लेकिन इसका ज़मीनी स्तर पर पालन करवाना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी।
भाजपा के वादों में पुरानी और मज़बूत ‘सिंडिकेट व्यवस्था’ को खत्म करना, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम शुरू करना, और बंदरगाहों के ज़रिए विकास तथा ‘ब्लू इकॉनमी’ को बढ़ावा देना शामिल था। आधुनिक स्टील प्लांट बनाना, औद्योगिक पार्क स्थापित करना (जिसमें सिंगूर भी शामिल है) और पूरे राज्य में कई औद्योगिक ज़ोन बनाना भी इन वादों का हिस्सा था। हालांकि कुछ आधारभूत चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, खासकर ज़मीन अधिग्रहण को लेकर। बंगाल में ज्यादा आबादी घनत्व और ज़मीन के छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटे होने की वजह से, ज़मीन के बड़े-बड़े हिस्से हासिल करना अब भी एक संवेदनशील और जटिल काम है।
पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 33 प्रतिशत है। हाल ही में हिंदू वोटों का एक साथ आना और घुसपैठियों को लेकर चल रही बयानबाजी से संभावित सांप्रदायिक तनाव की आशंकाएं बढ़ गई हैं। इस बात की भी आशंका है कि भविष्य में असम की तरह नागरिकता सत्यापन जैसे मुद्दे यहां भी उठ सकते हैं। अगर इन मुद्दों को ठीक से नहीं संभाला गयाए तो कानून-व्यवस्था की समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। हालांकि भाजपा के घोषणा-पत्र जारी करते हुए अमित शाह ने कहा था कि भाजपा सरकार आई तो बंगाल में अवैध घुसपैठ रोकी जाएगी। बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाई जाएगी ताकि अवैध घुसपैठ पर रोक लगाई जा सके। पूरी तरह से खुले इतने बड़े एरिया की बाड़ करना आसान नहीं होगा।
भाजपा ने अक्सर बंगाल में उद्योगों के पतन की आलोचना की है। अब उसे अपने वादे को पूरा करके दिखाना होगा। केंद्र और राज्य, दोनों जगहों पर एक ही राजनीतिक दल की सरकार होने से बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने, निवेश आकर्षित करने और रोज़गार के अवसर पैदा करने का एक सुनहरा मौका मिला है। लोगों की उम्मीदें बहुत ज़्यादा हैंए और सरकार के नतीजों पर सबकी पैनी नज़र रहेगी। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया है कि पहली कैबिनेट बैठक में ही ‘आयुष्मान भारत योजना’ को मंज़ूरी दे दी जाएगी। इस योजना को राज्य को मौजूदा योजना ‘स्वास्थ्य साथी’ के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ना बेहद ज़रूरी होगा। केवल घोषणा कर देना ही काफी नहीं होगा। इसका सही ढंग से क्रियान्वयन ही सरकार की विश्वसनीयता तय करेगा। प्रशासनिक कमियों को दूर करना और एक ऐसी नौकरशाही तैयार करना जो विकास कार्यों को समर्पित हो, बेहद ज़रूरी कार्य है। 
इसके अलावा एक और बेहद ज़रूरी मुद्दा है राज्य सरकार के कर्मचारियों का रुका हुआ महंगाई भत्ता। पिछली सरकार इन मांगों को पूरी तरह से पूरा करने में नाकाम रही थी और भाजपा ने वादा किया था कि वह सत्ता में आने पर इन मुद्दों को ज़रूर सुलझाएगी। हालांकि, मौजूदा वित्तीय बाधाओं को देखते हुए इस वादे को पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी। सवाल अब भी यही है कि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करते हुए वित्तीय बोझ को कैसे संभालेगी? बंगाल में भाजपा ने तमाम ऐसे वादे किए हैं जिससे राज्य पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ जाएगा।
राज्य में लंबे समय से विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा ‘कट मनी’ यानी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बदले होने वाली अवैध वसूली ने आम जनता को परेशान कर रखा है। गरीब लोगों तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद का एक हिस्सा मध्यस्थ डकार जाते हैं। इस कमीशनखोरी के कारण राज्य में विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई है और सरकारी खज़ाने को भी भारी नुकसान होता है। भाजपा ने चुनाव के दौरान इस भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने का वादा किया था। सुवेंदु सरकार के लिए इस समस्या का समाधान करना एक कड़ी परीक्षा होगी। अब यह देखना होगा कि नई सरकार इस समस्या से कैसे पार पाती है। (एजेंसी)

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