हंता वायरस और मानवीय रोग प्रतिरोधक क्षमता
पश्चिम अफ्रीका के केप वर्डे के पास एक डच क्रूज जहाज़, एमवी होंडियस पर हंता वायरस का भयानक प्रकोप देखा गया है, जो कि दुर्लभ और भयावह है। इस घटना में अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है और 5 अन्य संक्रमित पाये गये हैं। जहाज़ के क्रू में दो भारतीय भी हैं, जिनके बारे में अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य चैनलों से जानकारी यह मिली है कि अभी तक उनमें रोग के लक्षण दिखायी नहीं दिये हैं, लेकिन उन्हें कड़ी निगरानी में रखा जा रहा है, क्योंकि उनके संक्रमित होने की आशंका है। कुल मिलाकर जहाज़ पर 23 देशों के 146 लोग अभी भी सवार हैं, जो कैनरी द्वीप की ओर बढ़ रहा है। वहां पहुंचने पर यात्रियों की मेडिकल जांच की जायेगी और उसके बाद ही उन्हें घर भेजा जायेगा। इस घटना के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 12 देशों में अलर्ट जारी किया है। बहरहाल, भारत के संदर्भ में विशेषज्ञों का कहना है कि अपने देश में हंता वायरस के पहले भी कुछ मामले प्रकाश में आये हैं, लेकिन त्वरित चिंता की आवश्यकता नहीं है। इंडियन जर्नल ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन में एक केस रिपोर्ट है, जिसमें बताया गया है कि मुंबई में एक महिला ने जब अपने बच्चे को जन्म दिया, तो उसके बाद उसमें हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम पाया गया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार डब्ल्यूएचओ के साथ प्रतिक्रिया उपायों पर समन्वय किया जा रहा है, जिनमें डायग्नोस्टिक स्पोर्ट, महामारी मूल्यांकन और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियामकों के तहत सुरक्षा व्यवस्था करना शामिल है। इस स्थिति का जायज़ा लेने के लिए पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर ने आईडीएसपी-एनसीडीसी के तहत समीक्षा बैठक भी की है। पीएसआरआई इंस्टिट्यूट ऑफ पल्मोनरी क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन के प्रमुख डॉ. जीसी खिलनानी का कहना है, ‘कार्डियोपल्मोनरी (हृदय व फेफड़े संबंधी) हंता वायरस रोग में मृत्यु दर 30-50 प्रतिशत तक हो सकती है, लेकिन यह कोविड-19 की तरह अत्यधिक संक्त्रमित रोग नहीं है।’ सर गंगाराम अस्पताल में डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एंड रिसर्च के प्रमुख डॉ. वी.के. गांगुली के अनुसार, कोविड-19 के बाद हेल्थकेयर सिस्टम अधिक तैयार है और अस्पतालों में टेस्टिंग पैनलों के माध्यम से हंता वायरस को पहचानने की क्षमता है।
हंता वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की एक नदी के नाम पर रखा गया है। यह किसी एक बीमारी को नहीं बल्कि वायरसों के एक पूरे परिवार को दर्शाते हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, इन वायरसों की 20 से ज़्यादा अलग-अलग प्रजातियां हैं। इनमें से लगभग सभी का संबंध कुतरने वाले जानवरों से होने वाले संक्रमण से है, जो आमतौर पर चूहों व गिलहरियों की लार, सूखे मल-मूत्र से होता है। इसका अर्थ यह है कि हंता वायरस जूनोटिक है, जानवरों से संबंधित और उनमें व उनसे इंसानों में फैलता है। इसका एक किस्म ‘एंडीज़ वायरस’ के नाम से जाना जाता है और माना जाता है कि यह इंसानों से इंसानों में फैलता है, हालांकि ऐसा बहुत कम होता है। एंडीज़ वायरस मुख्य रूप से अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है। साल 2018 के आखिर में, अर्जेंटीना में इस वायरस का प्रकोप फैला था, जिसका पता उन लोगों से लगाया गया जिन्होंने एक पार्टी में हिस्सा लिया था। वायरस से संक्रमित एक ही व्यक्ति ने अनजाने में 34 लोगों में यह वायरस फैला दिया, जिनमें से 11 लोगों की मौत हो गई थी।
यहां यह बताना भी ज़रूरी है कि हंता वायरस कैसे फैलता है, इसके लक्षण क्या हैं और बचाव के तरीके क्या अपनाये जा सकते हैं? यह वायरस अक्सर चूहों से फैलता है। यह चूहों के मल-मूत्र से हवा में फैल सकता है। चूहे या गिलहरी की लार के सीधे संपर्क में आने से भी यह फैलता है। यह कोई कट लगने से, आंखों के ज़रिये या चूहे के काटने से भी फैल सकता है। सांस के माध्यम से हवा में फैले कणों के संपर्क में आने पर इंसान हंता वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। यह वायरस दो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है—एक, सांस लेने संबंधी समस्याएं व फेफड़ों को नुकसान व सांस लेने में दिक्कत होने लगती हैं। दूसरी, इंटरनल ब्लीडिंग व किडनी खराब होने की शुरुआत फ्लू जैसी लगती है, जो आगे चलकर गुर्दे पर असर डालती है और लो ब्लड प्रेशर, शरीर के अंदर रक्त स्राव व गुर्दे के पूरी तरह फेल होने का कारण बन सकती है। संक्रमित होने पर व्यक्ति में यह लक्षण दिखायी देते हैं—थकान, बुखार, मांसपेशियों में दर्द और फिर इसके बाद सिरदर्द, चक्कर आना, कंपकंपी और पेट की समस्याएं होती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमित मरीज़ों को अलग रखना, नियमित रूप से हाथ थोना, मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंस बनाये रखना, नज़दीकी सम्पर्क का पता लगाना और उन पर नज़र रखना और संक्रमण फैलने को रोकने के उपाय अपनाना, यह सभी इस बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए बहुत अहम हैं। गौरतलब है कि हंता वायरस संक्रमण के लिए कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआती चरण में मिले उपचार से रोगी के ठीक होने की काफी हद तक संभावना रहती है। इसके लिए सुझाये गये उपचारों में ऑक्सीजन थैरेपी, मैकेनिकल वेंटिलेशन और यहां तक कि डायलेसिस भी शामिल हो सकता है। वैसे इसके इलाज के नये तरीकों का ट्रायल भी चल रहा है। अभी इस वायरस से बचने के लिए कोई भी वैक्सीन बड़े पैमाने पर उपलब्ध नहीं है, जबकि चीन व दक्षिण कोरिया में इस वायरस के उन स्ट्रेन के खिलाफ कुछ वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो वहां आम हैं।
सवाल यह है कि क्या एक और महामारी दस्तक दे रही है? शायद नहीं क्योंकि कोविड-19, जो नया वायरस था, के विपरीत हंता वायरस, जोकि अनेक प्रकार का है, के बारे में दुनिया बहुत कुछ जानती है। लेकिन इसके बावजूद एंडीज़ वायरस, जो जहाज़ पर पाया गया, गंभीर चुनौती है, क्योंकि यह इंसान से इंसान में फैल सकता है और इससे संक्रमित होने वालों में मृत्यु दर लगभग 50 प्रतिशत है, जो कोविड-19 की तुलना में बहुत अधिक है। चूंकि संक्रमित व्यक्ति में लक्षण लगभग 8 सप्ताह तक दिखायी नहीं देते, इसलिए सावधानी बरतनी ज़रूरी है। कोविड से जो सबक सीखा था, उसे लागू करने का समय आ गया है। किसी भी महामारी में पहले 100 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, जैसा कि नीति आयोग ने 2024 में कहा था। हम निगरानी के उसी समय में हैं, लेकिन प्रस्तावित पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी मैनेजमेंट एक्ट कब लागू होगा?
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



