भाजपा का बढ़ता प्रभाव

पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और देश भर के ज्यादातर मुख्यमंत्रियों और नेताओं की उपस्थिति में सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। इस प्रदेश की जीत को श्री मोदी और भाजपा की ऐतिहासिक जीत कहा जा सकता है। चाहे जनसंघ के पहले प्रमुख नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंगाली मूल के ही थे परन्तु इस प्रदेश में 1950 से ही इस पार्टी की उपस्थिति नाममात्र रही थी। यहां देश के पहले चुनावों में कांग्रेस की सरकार, उसके बाद 34 वर्षों तक मार्क्सवादी पार्टी के नेतृत्व में वामपंथी पार्टियों का शासन रहा, जिसमें ज्यादातर समय ज्योति बसु जैसे प्रभावशाली मार्क्सवादी नेता मुख्यमंत्री बने रहे हैं। उसके बाद 15 वर्ष तक तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी मुख्यमंत्री रहीं। इतने लम्बे चुनाव इतिहास के बाद भाजपा द्वारा राजसत्ता सम्भालना ऐसा बदलाव है, जो शीघ्र कहीं बंगाली मानसिकता के साथ नहीं जुड़ता परन्तु अब हुए चुनावों में 294 विधायकों वाली विधानसभा में 207 सीटें प्राप्त करना पार्टी की बड़ी उपलब्धि है।
चुनाव से पहले भी यहां पार्टी को कड़ी परीक्षा से गुज़रना पड़ा और चुनाव के दौरान भी इसका तृणमूल कांग्रेस के साथ कड़ा मुकाबला दिखाई देता रहा। दोनों पक्षों की इस लड़ाई में वामपंथी और कांग्रेस कहीं दिखाई नहीं दिए। चुनाव परिणाम भी यही कुछ दर्शाते हैं। पिछले वर्षों में भाजपा नेताओं ने यहां बहुत लम्बे-चौड़े वायदे किए। इनकी पूर्ति के लिए नए प्रशासन को कड़ी मेहनत करनी होगी। प्रदेश में अलग-अलग समुदायों को साथ लेकर चलना इसके लिए बेहद कठिन परीक्षा होगी। विगत लम्बी अवधि से यह राज्य मूलभूत ढांचे के निर्माण में बहुत पिछड़ गया दिखाई देता है। इस पर लगातार ऋण का बोझ बढ़ता रहा है, बेरोज़गारी की समस्या बहुत गम्भीर रूप धारण कर चुकी है, ज्यादातर योजनाएं अधर में लटकी दिखाई दे रही हैं। इन्हें पूरा किया जाना बेहद कठिन प्रतीत होता है। इस सब के साथ-साथ नई सरकार की सफलता भाईचारक साझ बनाए रखने में ही मानी जाएगी। पिछले दशक में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने राजनीतिक मंच पर लम्बे कदम उठाए हैं। हरियाणा में कभी यह अपने दम पर शासन करने का सपना ही ले सकती थी परन्तु वहां अब इसने अपनी निरन्तरता बना ली है। महाराष्ट्र में इसका पूरा प्रभाव बन चुका है। उड़ीसा जैसे राज्य में जहां 24 वर्ष तक बीजू जनता दल द्वारा नवीन पटनायक प्रशासन चलाते रहे हैं, वहां पर भी भाजपा का प्रशासन  स्थापित हो चुका है। बिहार में भी नितीश कुमार की 2 दशकों की पारी के बाद भाजपा का मुख्यमंत्री बन गया है। असम में भी इसने तीसरी बार सफलता प्राप्त कर ली है। अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और मणिपुर में भी इसका पूरा उभार दिखाई दे रहा है।
नि:संदेह भाजपा ने पिछले डेढ़ दशक में बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं। राजनीति में ऐसी जीत ने उसकी ज़िम्मेदारियों में भी भारी वृद्धि की है। लोगों द्वारा दिखाए गए विश्वास पर पूरा उतरने के लिए इसकी ओर से संविधान की भावनाओं की पहरेदारी करना और भी ज़रूरी हो जाता है। अब ऐसी ही उम्मीद इस पार्टी और इसके नेतृत्व से देश के लोग करते दिखाई दे रहे हैं।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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