ओ मां तुझे सलाम- नए युग की माताओं की नई चुनौतियां
आज अन्तर्राष्ट्रीय मातृ दिवस पर विशेष
इस मातृ दिवस पर हम मां की बात कर रहे हैं, कुछ हट कर, कुछ अलग रूप में, कुछ अलग शैली में। यह बात है वर्तमान समय की मां भाव अकेले वह मां नहीं जो सिर्फ घर की चारदीवारी और बच्चों की देखभाल कर रही है, बल्कि परिवार और वर्तमान समय की मां उसको कहा जा सकता है जो एक ही समय में एक से ज्यादा काम कर रही है। एक से अधिक भूमिकाएं निभा रही है।
अभिप्राय पत्नी, घर की देखभाल करने वाली, कोई नौकरी या कार्य करने वाली, एक दोस्त और सबसे ऊपर एक मां, ये सभी रोल, हर दिन, हर रूप में साथ-साथ निभा रही है यह वर्तमान समय की मां।
अभिलाषी होने के नाते अपने मनपसंद कार्य को पूरा करने के साथ-साथ नए ज़माने के साथ जुड़ कर अपने परिवार का ध्यान रखने वाली मां बच्चों के सुख, आराम का ध्यान रखने और आजकल की नई ज़रूरतें पूरी करने के लिए बहुत मज़बूत, शक्तिशाली मां बनने की कोशिश कर रही है।
वर्तमान समय की मां अपनी सांस्कृतिक विरासत, अपनी पृष्ठभूमि और नए समय के बदलाव के मिश्रण के रास्ते पर चल रही है।
मां को वर्तमान समय की मां होने की उपाधि देना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि आजकल के बच्चों की रफ्तार के साथ चलना कोई आसान काम नहीं है। यह एक सुपर मौम यानी वर्तमान समय की मां ही कर सकती है।
वर्तमान समय की सोच वाला ज़माना इस मां से ज्यादा उम्मीदें लगाता है। घर के सभी काम अच्छे हों, रिश्तेदारों के प्रति ज़िम्मेदारियां पूरी हों, बच्चों की परवरिश में कोई गलती नहीं होनी चाहिए आदि। सम्पूर्ण परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों का ध्यान, नौकरी आदि के दौरान कार्य करने में कोई कमी नहीं होनी चाहिए, ये सब आशाएं वर्तमान समय की महिला से रखी जाती हैं। इन सभी कसौटियों पर पूरा उतरने के लिए एक मां की कड़ी मेहनत लगती है, जोकि अदृश्य होती है।
उम्मीद है कि इन सबके बावजूद मां की इस भूमिका को पहचान मिलती होगी। काम में, कुछ करने की चाह और अपने कार्य के उभरते नए अवसरों और सपनों को पूरा करने की इच्छा के साथ-साथ बच्चों के लिए हर समय उपस्थित रहना मांओं को स्वस्थ, काम और ज़िंदगी का संतुलन सिखा रहा है।
वर्तमान समय की मां के लिए बच्चों में उनकी सांस्कृतिक पहचान कायम रखना, रिवायती रहन-सहन की जानकारी देना और उनको इस पर गर्व महसूस करवाना, जिम्मेदारी ही नहीं, आजकल यह चुनौती भी है।
पीढ़ी-दर पीढ़ी सभ्याचार और विरासत की देखभाल करने में मां की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
वर्तमान समय की मां के लिए एक और अहम चीज़ बन गई है बच्चों में लिंग समानता की भावना कामय रखना, भेदभाव, पक्षपात से बच्चों की सोच को आज़ाद करवाना।
वर्तमान समय की मां अपनी बेटों को धड़ल्लेदार स्वभाव वाले, महिलाओं का सम्मान करने और सहायक जीवन साथी बनने की शिक्षा देती है और बेटियों को पढ़ाई, नौकरी करने के लिए, अपने सपनों को पूरा करने के लिए उत्साहित करती है, इस तरह से वर्तमान समय की मां एक बेहतर और समानता वाले समाज की नींव रखने में कोई कसर नहीं छोड़ती।
आजकल बच्चों को बड़ा करना सवाल नहीं है, सवाल है एक पीढ़ी को बड़ा करना, वह पीढ़ी जो रंग, धर्म, सभी से ऊपर है और समानता तथा प्रमाणिकता की कदर करती है।
ज़िंदगी के पहलुओं का संतुलन बनाते-बनाते खुद कई बार असंतुलित हो जाना बहुत स्वाभाविक है। बहुत तरह का तनाव, चाहे घरेलू हो, बच्चों के काम का हो, सामाजिक चिंताओं का हो, इन सभी से दिमागी बोझ बढ़ना ज़रूरी है।
आजकल सोशल मीडिया का दबाव भी मां के रास्ते में कहीं न कहीं अड़चन बनता है। इन सोशल प्लेटफॉर्मों पर बहुत ही सम्पूर्ण मां-बाप के बने निर्धारित नियम देखकर वर्तमान की मां को अपना-आप अधूरा लगता है कि इतनी मेहनत करने के बावजूद लक्ष्य प्राप्त क्यों नहीं हो रहा।
समाज और सोशल मीडिया का दबाव रहने के कारण, भावुकता, अकेलापन, आज की वर्तमान समय की मां के ऊपर हावी हो सकता है।
दबाव यह भी होता है कि घर और काम दोनों में निपुण होना बहुत ज़रूरी है। कई बार थोड़ा-सा भी कुछ ठीक न होने पर दिमागी तनाव पैदा हो जाता है कि क्यों आज के वर्तमान समय में हम उदाहरण नहीं बन पा रहे।
इस दबाव को अकेले झेलने के नुकसान हो सकते हैं। चाहे बच्चे बहुत छोटे हों, बढ़ती आयु के हों, बड़े हों, मां को इस दबाव में अपने-आप को अकेला महसूस नहीं करना चाहिए, अन्यों के साथ अपने अनुभव साझे करने चाहिएं, मदद के लिए बात करनी चाहिए।
आजकल वर्तमान समय की मां के साथ ज्यादातर वर्तमान पिता भी जिम्मेदारी को बांट रहे हैं। यह बहुत ज़रूरी हो गया है क्योंकि यदि मां को सहारा मिलेगा, दिमागी और स्वास्थ्य के पक्ष से सहायता होगी, तभी दोनों के लिए एकमत होकर बच्चे को पालना आसान होगा, नहीं तो मां अंदर से टूटती ही रहेगी।
वर्तमान समय की मां का स़फर आसान बनता है परिवार के स्पोर्ट ग्रुपों व सामाजिक ग्रुपों की सहायता के साथ क्योंकि आजकल सोशल मीडिया के प्रसार के साथ घर में बैठी कई महिलाएं इस तरह के ग्रुपों का हिस्सा बन जाती हैं। इस तरह का माहौल मां को अपनी भूमिका को नया रूप देने के साथ-साथ सांस्कृतिक रिवायतों और तंदों को संभाल कर रखने और अपने विकास के लिए अवसर पैदा करने में सहायक होता है।
ज़माना बदला है। समाज में बहुत हद तक बदलाव भी आया है। वर्तमान समय की मां एक अलग बदलाव, सभ्याचार को संभालने के ताकतवर एजेंट के रूप में बदलते माहौल के साथ बदलती परवरिश करने में अच्छी साबित हो रही है। वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करते हुए वर्तमान समय की मां नई पीढ़ी को अपनी ताकत, अपनी लचक और बिना घबराये, बिना हिले प्यार से प्रेरित करती रहेगी। ज़रूरत है सिर्फ उसको समझने की और सहारा देने की।
अंत: आओ, मातृ दिवस मनाएं और सम्मान करें उस मां के योगदान का, जो सांस्कृतिक विकास और तरक्की के साथ परिवारों और दुनिया भर के भाईचारे को अपने अंदर के एक वर्तमान समय की मां के छुपे हुनर के जादू से हमेशा और मज़बूत करती रहेगी।





