कहानी - तलाश
गंगा तट का मनोरम किनारा। डूबते सूर्य की लालिमा से सारा वातावरण मन-मोहक लग रहा था। पास ही मंदिर से आती घंटे की ध्वनियां दिल में रोमांच पैदा करती। वह रोज़ शाम के समय गंगा तट पर बैठा अपने शिकार की तलाश करता रहता। अचानक उसके करीब एक गेरूआ वस्त्र पहने एक खूबसूरत युवती आकर बैठ गयी।
‘कितना खूबसूरत नजारा है, प्रकृति के मनोरम दृश्य का।’ वह युवती उसका ध्यान भंग करते हुए बोली।
‘सचमुच बहुत खूबसूरत नजारा है।’ वह उसे एकटक निहारते हुए बोला।
‘आप इस शहर में ही रहते हैं और प्रतिदिन यहां आया करते हैं।’ वह युवती बोली।
‘मैं इस शहर में ही रहता हूं और प्राय: शाम के समय यहां बैठा करता हूं। आप कहां से आयी हैं? ‘उसने प्रश्न किया।
‘मैं लंदन से आयी हूं और इस मंदिर के बारे में बहुत सुनी थी। इसलिए इस मंदिर के दर्शन करने आयी हूं।’ वह युवती बोली।
‘आप विदेशी होने के बावजूद कैसे इतनी अच्छी हिन्दी बोल लेती हैं।’ वह उसकी खूबसूरती को निहारते हुए बोला।
‘मेरा परिवार भारत में ही रहता था। फिर मेरे परिवार के लोग लंदन चले गये। वहां मेरे पिता जी का बहुत बड़ा व्यवसाय है। मेरा पालन-पोषण भारतीय सभ्यता-संस्कृति के अनुरूप हुआ। मेरा परिवार लंदन में जाकर जरूर बस गया लेकिन उनका दिल हमेशा भारत में ही बसता है।’ वह मुस्कुराते हुए बोली।
‘आपको वहां किसी चीज की कमी नहीं है। फिर आप भारत क्या करने आयी हैं?’ उसने उसे घूरते हुए कहा।
‘भारत शांति की खोज में आयी हूं। वहां सबकुछ होने के बावजूद मन की शांति कहां थी? यहां जैसी सभ्यता-संस्कृति वहां कहां है? वहां तो हर आंखों में प्रेम नहीं बल्कि वासना की भूख झलकती है। राम के जीव दर्शन से प्रभावित होकर यहां आयी हूं। मैं अपने राम की खोज में भटक रही है। शायद यहां मेरी तलाश पूरी हो जाए।’ वह उसकी ओर देखते हुए बोली।
‘अभी आपको राम नहीं मिला।’ वह बोला।
‘लंदन में तो हर किसी की आंखों में सच्चा प्रेम झलकता नहीं। राम जैसा जीवन साथी मिलना मुश्किल था। यही सोचकर भारत आ गयी। मुंबई में काफी समय रही। इस दौरान कई टीवी सीरियल में नायिका की भूमिका निभायी। वहां भी हर कोई मुझे अपना जीवन साथी बनाना चाहता था, लेकिन उन आंखों में सच्चा प्रेम कहां झलकता था? उन आंखों में तो दौलत-शौहरत और वासना की भूख झलकती थी। वहां मुझे सबके सब मतलबी प्रतीत हुए। राम के जैसे विचारों वाला कहां कोई था? वहां हर कोई उगते सूर्य को नमस्कार करता है। मैं उस चकाचौंध की दुनिया से ऊब गयी और फिर अपने राम की तलाश में भटकने लगी। इस खोज में यहां आ गयी। शायद भोलेनाथ की कृपा से मेरी तलाश पूरी हो जाए।’ वह युवती बोली।
‘आज के आधुनिक युग में जहां दौलत-शौहरत को हर कोई पूजता है, वहां राम जैसे उच्च विचारों वाला युवक मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। राम जैसे मर्यादा पुरूषोश्रम और सीता जैसी पवित्रता नारी आज के जमाने में अंधेरे में सुई खोजने जैसी बात है। आप अपने देश लौट जाइए और वहीं किसी को अपना जीवन साथी बना अपनी जिंदगी की नयी शुरूआत कीजिए। यहां तो पग-पग पर इंसान की शक्ल में शैतान मिलेंगे, जो मौका मिलते ही तुम्हारी इज्जत को तार-तार करने से जरा भी हिचकेंगे नहीं।’ वह एक कुटिल मुस्कान के साथ बोला।
फिर वह उसकी खूबसूरती को निहारता मन ही मन सोचने लगा- ‘मैं भी कहां पाप-पुण्य में फंस गया? मेरा तो धंधा लूटपाट करना है। आज दिनभर के भाग-दौड़ के बाद यह मिली है। इसके पास ज़रूर बहुत सारा माल होगा। फिर इसकी खूबसूरती भी तो मेरे मन को बेचैन कर रही है। इससे मिलते ही मेरे हृदय में प्रेम का भाव क्यों उमड़ रहा है? मैं अपने कर्म से विमुख क्यों हो रहा हूं?’
‘आप कहां खो गये? आपकी बात सही है कि यहां पग-पग पर रावण हैं, जो मौका मिलते ही मेरी इज्जत को सारे आम नीलाम कर देंगे, लेकिन जहां बुराई है, वहां अच्छाई भी है। इस देश में राम जैसे उच्च विचारों वाले युवक होंगे। मैं वापस नहीं जाऊंगी। यहां अपने राम के साथ सीता बनकर जीवन का आनंद उठाऊंगी। मैं दौलत-शौहरत को त्याग चुकी हूं और अपने राम को खोज कर ही रहूंगी।’ वह उसका ध्यान भंग करते हुए बोली।
‘बात बहुत हो गयी, लेकिन आपने अपना नाम नहीं बताया।’ वह उसकी ओर देखते हुए बोला।
वह मुस्कुराते हुए बोली- ‘हेली और तुम्हारा नाम क्या है?’
‘अमन।’ वह बोला।
‘आपका घर किस मोहल्ले में है।’ वह बोली।
‘गणेश नगर में रहता हूं। आप कहां ठहरी हैं?’ उसने कहा।
‘मैं होटल विरंची विहार में रूकी हूं। अब हम दोनों की रोज मुलाकात होगी। ‘वह बोली।
‘रात होने वाली है। यहां का माहौल ठीक नहीं है। यहां शाम ढलते ही चोर-उचक्कों का जमावड़ा लग जाता है। अब यहां से चलना चाहिए।’ वह उठते हुए बोला।
‘ठीक कहा। रात होने वाली है। यहां ज्यादा देर रूकना खतरे से खाली नहीं है। चलिये! मैं आपको आपके घर तक छोड़ दूंगी। मैं एक गाड़ी भाड़े पर ले रखी हूं। ‘वह उसका पकड़कर बोली।
उसके स्पर्श मात्र से उसका सारा शरीर रोमांचित हो उठा। उसे लगा जैसे वह उसके संगमरमरी हाथों को चूम लें, लेकिन अगले ही पल वह अपने मन को नियंत्रित कर लिया।
वह उसका हाथ पकड़े गाड़ी की ओर बढ़ गयी। वह उसे गाड़ी के भीतर बैठने का इशारा की। वह गाड़ी के भीतर बैठ गया। वह भी उसके करीब जाकर बैठ गयी। उसके शरीर से निकलने वाली खुशबू उसे मदहोश करने लगी। उसका दिल मचलने लगा। उसके गुलाबी होंठ उसे अपनी ओर आकर्षित करने लगे। उसके गुलाबी गालों को चूमना चाहता था, लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी।
‘आप कहां खो गये? ‘वह उसके हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोली।
‘मैं सोच रहा था कि जिसकी ज़िंदगी में दौलत-शौहरत कदम चूम रही हो वह युवती ऐशों-आराम की दुनिया छोड़ अपने राम की तलाश में भटक रही है।’ वह उसकी ओर देखते हुए बोला।
‘मैं अपने राम की सीता बनूंगी। मेरा राम मुझे ज़रूर मिलेगा। खैर छोड़ो इन बातों को आप कहां उतरेंगे?’ हेली उसे प्रेमभरी निगाहों से देखते हुए बोली। (क्रमश:)



