ऐतिहासिक कार्यकाल तथा परिवर्तनकारी नेतृत्व

भारत ने 10 जून, 2026 को अपने लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय दर्ज किया। इस दिन श्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में निर्बाध सेवा के 4,399 दिन पूरे कर लिए। इसके साथ ही वह भारत के लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए। यह ऐतिहासिक उपलब्धि सिर्फ  राष्ट्र निर्माण के लिए उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता को ही नहीं दिखाती, अपितु यह उनके दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के लोगों के अडिग विश्वास और आस्था को भी प्रतिबिंबित करती है। यह उनके दूरदर्शी नेतृत्व, राष्ट्रीय विकास के लिए अथक प्रतिबद्धता तथा भारत की अवाम के कल्याण और आकांक्षाओं प्रति अटूट निष्ठा को प्रतिबिंबित करती है। 
परिवर्तनकारी नेतृत्व : श्री नरेंद्र मोद ने राष्ट्र के प्रधान सेवक के रूप में भारत में सुशासन और राष्ट्र प्रथम के सिद्धांतों पर आधारित अभूतपूर्व परिवर्तन के युग की शुरुआत की है। इतिहास अब्राहम लिंकन को मानव दासता का अभिशाप खत्म कर लाखों लोगों की गरिमा बहाल करने में उनके अडिग नेतृत्व के लिए उनका आदर करता है। इसी तरह आने वाली पीढ़ियां 25 करोड़ से ज्यादा गरीबों को पूर्ण निर्धनता से बाहर निकालने के लिए श्री नरेंद्र मोदी को याद करेंगी। उनकी दृष्टि, अथक प्रयासों और परिवर्तनकारी शासन ने अनगिनत परिवारों को अवसर, गरिमा और उम्मीद देकर सशक्त बनाया है तथा वे आर्थिक स्वतंत्रता और बेहतर भविष्य के आश्वासन को अपनाने में समर्थ बने हैं। उनका योगदान मानवता की सेवा में एक युगांतरकारी उपलब्धि के रूप में इतिहास में दर्ज रहेगा।
इतना ही नहीं, उनकी परिवर्तनकारी पहलकदमियों ने शिक्षा, आवासन, स्वच्छता, स्वास्थ्यसेवा और खाद्य निश्चितता के माध्यम से करोड़ों लोगों की गरिमा और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। विश्व के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक आयुष्मान भारत योजना के जरिए 44 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान की गई है। जल जीवन मिशन ने 12 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों में सुरक्षित पेयजल पहुंचा कर अनगिनत परिवारों को गरिमा प्रदान की और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया है। नि:शुल्क खाद्यान्न के 2020 से जारी प्रावधान से लगभग 80 करोड़ लोगों की खाद्य सुरक्षा निश्चित की है। इसके अतिरिक्त 4 करोड़ से ज्यादा परिवारों का सुरक्षित और स्थाई घर का मालिक बनने का सपना पूरा हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण ने समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाया है—चाहे वे महिलाएं हों, युवा हों, किसान हों या वंचित वर्ग के लोग। 3 करोड़ से ज़्यादा ‘लखपति दीदियों’ का सामने आना महिला नेतृत्व में विकास के उनके दृष्टिकोण का एक सशक्त प्रमाण है, जबकि ‘नारी शक्ति’ के तहत शुरू की गई पहलों ने महिलाओं को देश के निर्माण में और भी अहम भूमिका निभाने में सक्षम बनाया है।  साथ ही भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व  क्रांति देखी है। वंदे भारत ट्रेनों, हवाई अड्डों, राजमार्गों और रेलवे स्टेशनों के तेज़ी से विस्तार से लेकर दूर-दराज़ के इलाकों तक सम्पर्क को बेहतर बनाने वाली परियोजनाओं तक, उनके नेतृत्व में एक आधुनिक भारत की नींव रखी है। 
भारत डिजिटल नवाचार, सेमी-कंडक्टर, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, वैक्सीन बनाने और मोबाइल उत्पादन के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरा है। समकालीन नेताओं में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को जो बात सबसे अलग और अनूठी बनाती है, वह है उनका यह दृढ़ विश्वास कि विकास और परम्परा कोई परस्पर विरोधी विचार नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। ‘विकास भी, विरासत भी’ की अपनी दूरदर्शी सोच के ज़रिए उन्होंने यह दिखाया है कि कोई देश अपनी सभ्यतागत विरासत से जुड़े रहते हुए भी तेज़ी से आधुनिकीकरण की राह पर आगे बढ़ सकता है।
इस सोच का सबसे ज़्यादा फायदा तमिलनाडु और दुनिया भर में फैले तमिल समुदाय को मिला है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उनकी समृद्ध भाषाई, सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को अभूतपूर्व पहचान, सम्मान और समर्थन मिला है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चलाई जा रही परिवर्तनकारी पहलों से तमिलनाडु को बहुत लाभ हुआ है, जिनमें चेन्नई मेट्रो रेल का विस्तार, चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे, तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक गलियारा, बंदरगाहों और हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार, रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास और नया पाम्बन रेल पुल शामिल हैं। भारत के पहले वर्टिकल-लिफ्ट सी-ब्रिज, नए पाम्बन रेल पुल का उद्घाटन एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो रामेश्वरम के लिए कनेक्टिविटी को बेहतर बनाता है और भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रतीक है। आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के निरंतर और दृढ़ प्रयास के कारण तमिलनाडु इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और आईफोन मैन्युफैक्चरिंग  के लिए एक प्रमुख केंद्र के तौर पर भी उभरा है।
पूर्व के किसी भी प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा, संस्कृति और विरासत को उस निरंतरता, प्रमुखता और वैश्विक स्तर पर बढ़ावा नहीं दिया जैसा नरेंद्र मोदी ने दिया है, उन्होंने तमिल सभ्यता को एक नई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। भारत और विदेशों में तमिल की प्राचीनता और साहित्यिक समृद्धि का उनके द्वारा लगातार किया गया गौरवगान दुनिया भर के तमिलों के दिलों को गहराई से छू गया है। इस गहरे संदेश को वैश्विक मंच पर लाकर, उन्होंने दुनिया को तमिल संस्कृति में निहित शाश्वत मानवीय मूल्यों और उसकी समृद्ध सभ्यतागत विरासत से परिचित कराया। मानवता को यह एहसास हुआ कि कार्ल मार्क्स से सदियों पहले ही तमिलों ने ‘एक मानवता’ के नेक विचार को अपनाया था। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की पहल भी इसी दर्शन पर आधारित है। प्रधानमंत्री मोदी की गंगईकोंडा चोलपुरम की यात्रा चोल वंश की विरासत को उजागर करती है। साथ हीए विदेशों से बेशकीमती कलाकृतियों और प्राचीन वस्तुओं को वापस लाने की व्यापक रूप से सराहना की गई हैए इनमें हाल ही में अनाईमंगलम से मिली चोल-युगीन तांबे के ताम्रपत्र भी शामिल हैं। 
अपने परिवर्तनकारी नेतृत्व, राष्ट्रीय विकास के प्रति प्रतिबद्धता और जनता की अथक सेवा के माध्यम से वह समकालीन भारत के एक सच्चे ‘युग पुरुष’ के रूप में उभरे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उनका कुशल नेतृत्व राष्ट्र को ‘विकसित भारत-2047’ की ओर ले जाएगा।

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