पंडित नेहरू की विरासत और मोदी
भारत जैसे विशाल और जटिल देश में लम्बी अवधि तक प्रधानमंत्री के पद पर बने रहना बेहद मुश्किल परन्तु शानदार उपलब्धि है। देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसे पद बेहद सुचेत होने की और प्रतिबद्धता की मांग करते हैं। विगत 12 वर्ष से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऐसा करके दिखाया है। वह लम्बे कार्यकाल के पक्ष से भारत के पहले और बेहद लोकप्रिय प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से आगे निकल गए हैं। पंडित जी देश को आज़ादी मिलने के बाद ही प्रधानमंत्री घोषित कर दिए गए थे। संविधान बनाने वाली सभा के अपना कार्य पूर्ण करने के बाद वह 1952 तक पहले चुनाव होने तक प्रधानमंत्री रहे और उसके बाद 1964 तक लगातार इस पद पर बने रहे।
वर्ष 2014 तक लाल बहादुर शास्त्री, श्रीमती इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और कई अन्य प्रधानमंत्री के पद पर रहे। इनके बाद अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की संयुक्त सरकार के प्रधानमंत्री बने। 10 वर्ष कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के डा. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री रहे। चाहे उनके पीछे सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही मुख्य रूप में प्रशासनिक काम करते दिखाई देते थे। वर्ष 2014 में चाहे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने परन्तु उस समय भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा में भारी बहुमत प्राप्त हुआ था। उसके बाद 2019 में हुए चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी को ही भारी समर्थन मिला, परन्तु तीसरी बार वर्ष 2024 में चाहे भाजपा को लोकसभा में अपने तौर पर बहुमत प्राप्त नहीं हुआ था परन्तु राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगियों की सहायता से वह तीसरी बार प्रधानमंत्री बने।
श्री नरेन्द्र मोदी के भारत के पहले प्रधानमंत्री से अधिक समय तक शासन करने की बात देश और विदेश में बड़ी चर्चा का विषय बनी है। अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर श्री मोदी का नाम गूंजता है। इस अवसर पर विश्व के ज्यादातर देशों के प्रमुखों ने इस शानदार उपलब्धि पर उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। इसके साथ ही इन दोनों शख्सियतों के कार्यकाल की उपलब्धियां और रह गईं कमियां भी उजागर हुई हैं। दोनों शख्सियतों की विचारधारा की भी चर्चा हुई है। विचारक तौर पर पंडित जी और श्री मोदी में बड़ा अंतर दिखाई देता है। पंडित नेहरू ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की आज़ादी के आन्दोलन को समर्पित किया था। वह लोकतांत्रिक और समाजवादी विचारधारा को समर्पित थे। उनके विशाल ज्ञान ने उनकी शख्सियत की गुणवत्ता को उजागर किया था। वह धर्म, जाति और समुदायों की सीमा से ऊपर थे। देश के संविधान को बनाने में उनका अहम योगदान था। भारतीय संविधान की भावना को उजागर करके रखने के लिए वह हमेशा प्रतिबद्ध रहे। कांग्रेस की आज़ादी के आन्दोलन में एक बड़ी और अहम भूमिका थी। उस समय संविधान के अनुसार लोकतांत्रिक चुनाव जीतने में कांग्रेस के समक्ष कोई बड़ी रुकावट नहीं थी। चाहे विपक्षी दल और उनके नेता उस समय भी सक्रिय रहे परन्तु वह कांग्रेस के कद-बुत्त के समक्ष हमेशा छोटे दिखाई देते रहे। पंडित नेहरू लोकमत के साथ-साथ अपने साथियों के साथ लम्बा विचार-विमर्श करने के बाद उभरे एकमत के अनुसार ही काम करने को प्राथमिकता देते रहे। उन्होंने न्यायापालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने और निष्पक्ष चुनाव होने की भावना जगाए रखने का यत्न किया। उनके समय भी स. पटेल, डा. बी.आर. अम्बेदकर और मौलाना आज़ाद जैसे ऊंचे कद के नेता कैबिनेट में शामिल थे। डा. राजेन्द्र प्रसाद जैसे परिपक्व नेता उनके साथी थे, चाहे देश नया ही आज़ाद हुआ था, परन्तु उन्होंने उस समय भी किसी बाहरी प्रभाव को न स्वीकार करते हुए स्वतंत्र रूप से देश की नीतियां निर्धारित करने को प्राथमिकता दी थी। चाहे उस समय के शक्तिशाली देश अमरीका का पाकिस्तान की ओर झुकाव था, परन्तु पंडित जी ने गुट-निरपेक्ष नीति को महत्त्व दिया। उस समय सोवियत यूनियन ने बड़े प्रोजैक्ट लाकर भारत की बहुत सहायता की थी। पंडित नेहरू ने ही देश को आधुनिक मार्ग पर चलाने का काम शुरू किया था।
आज की अंतरिक्ष उपलब्धियों के लिए उन्हें संस्थापक माना जाता है। उन्होंने देश में जातियों, बिरादरियों और धर्म से ऊपर उठ कर सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का यत्न किया था। देश समय के बदलावों के अनुसार आगे बढ़ता रहा है। इसके निर्माण में हमारे संविधान निर्माताओं ने अहम योगदान डाल कर इसकी नींव को मज़बूत किया है, जिन पर अब तक का निर्माण हुआ है। ज्यादातर कमियों के बावजूद भी देश अपनी चाल से आगे बढ़ता जा रहा है। चाहे इसे शुरू से ही साम्प्रदायिक दंगों का सामना करना पड़ा। आर्थिक कठिनाइयों में से गुज़रना पड़ा और ज्यादातर मामले अब तक भी इसके मार्ग में खड़े दिखाई देते रहे, परन्तु देश के निर्माण में अनेकानेक सीमाओं के बावजूद सरकारें अपना-अपना योगदान डालती रहीं।
पिछले 12 वर्ष से श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई पक्षों से बड़े कदम उठाए हैं। अनेक उपलब्धियों की ओर कदम बढ़ाया है। अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर अपना बड़ा प्रभाव बनाया है। श्री मोदी के नेतृत्व में ही भाजपा ने देश भर में अपने पांव पसारे हैं। श्री मोदी की सरकारों ने डिजीटल क्रांति में बड़ा योगदान डाला है। समाज कल्याण की योजनाओं को सीधी सहायता द्वारा लोगों तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है और तेज़ विकास को गति दी है और इससे भी ऊपर भारत को आत्म-निर्भर बनाने के लिए बड़े यत्न किए हैं।
आज भारत विश्व की बड़ी आर्थिकता माना जाने लगा है। चाहे सरकार ने लगातार यह दावा किया है कि उसने देश के 25 करोड़ लोगों को ़गरीबी रेखा से ऊपर उठाया है परन्तु इसके साथ ही बेरोज़गारों की संख्या को बढ़ने से रोकने और गरीबी को खत्म करने के लिए अभी भी बड़े यत्नों की ज़रूरत होगी। चाहे लोकतांत्रिक ढंग से सरकारें चलाने की बात की जाती है, परन्तु पिछले कई दशकों में जातिवाद और साम्प्रदायिकता बढ़ने से देश में नकारात्मक भावनाओं को बड़ा संरक्षण मिला है। भारत जैसा देश जातियों, बिरादरियों और संकीर्ण धार्मिक मान्यताओं के बढ़ने के कारण तेज़ी से विकास नहीं कर सकता और न ही अपनी स्वस्थ परम्पराओं पर पहरा दे सकता है। हम नरेन्द्र मोदी जैसी प्रभावशाली शख्सियत से यह उम्मीद ज़रूरत करते हैं कि आगामी समय में वह देश को संकीर्ण विचारधारक गलियों से निकाल कर स्वस्थ मार्ग पर ले जाने का यत्न करेंगे, ताकि देशवासियों को और भी बड़ा और सुखद संदेश दिया जा सके, क्योंकि आधुनिक भारत की यह इमारत देश के लिए तैयार की जाने वाली मज़बूत नींव पर ही खड़ी हो सकती है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

