देश अहम राजनीतिक और आर्थिक तबदीलियों का गवाह बना

भारत अपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। यह देखना आश्चर्यजनक है कि देश ने इन वर्षों में कई ऐतिहासिक बदलाव देखे हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसे अवसर बहुत कम आए हैं, जब इतनी तेजी के साथ बदलाव देखने को मिले हों। वर्ष 2014 में जब नरेन्द्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली, तब भारतीय निराशा और ठहराव के दौर से गुजर रहे थे। सरकारी तंत्र निर्णयहीनता का शिकार था, भ्रष्टाचार के आरोप सुर्खियों में थे। ऐसा लग रहा था कि आर्थिक मोर्चे पर देश अपनी बढ़त खो रहा है। लोगों को लगने लगा था कि अपार सामर्थ्य होने के बावजूद भारत में अपनी क्षमता को उपलब्धियों में बदलने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है।
लेकिन 12 वर्षों बाद ही भारत की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, इनोवेशन एवं टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली देश बन गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने अपना खोया आत्मविश्वास फिर से हासिल किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जून 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। मोदी सरकार के कार्यकाल में सबसे बड़े बदलावों में से एक राजनीति को केवल अधिकार आधारित दृष्टिकोण से हटकर सशक्तिकरण आधारित शासन व्यवस्था की ओर बढ़ाना है। इसका मूल मंत्र सरल लेकिन प्रभावशाली है। यह पक्का करता है कि विकास के ज़रिए सभी नागरिकों को सीधे और निष्पक्ष रूप से सशक्त बनाया जाए। प्रधानमंत्री जन धन योजना ने करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा और दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांस्फर’ (डीबीटी) की नींव रखी। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता को एक राष्ट्रीय जनआंदोलन में बदल दिया, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना ने लाखों परिवारों का अपने घर का सपना साकार किया। उज्ज्वला योजना के माध्यम से स्वच्छ ईंधन, आयुष्मान भारत के जरिये स्वास्थ्य सुरक्षा और पीएम-किसान के अंतर्गत किसानों को आर्थिक मदद देकर, सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं को नई गति और व्यापकता प्रदान की। इन सभी योजनाओं की विशेषता तकनीक का प्रभावी उपयोग रहा, जिससे सहायता सीधे सही लाभार्थियों तक पहुंची।
‘डिजिटल इंडिया’ नए भारत की सर्वश्रेष्ठ पहचान है। पिछले दशक में भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक ग्लोबल लीडर के रूप में उभरा है। जन धन, आधार और मोबाइल टेक्नोलॉजी के सुमेल ने कल्याणकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने के माध्यम को बदल दिया है, जबकि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) सिस्टम ने लेन-देन की प्रक्रिया को बदलकर देश को डिजिटल लेन-देन में ग्लोबल लीडर बना दिया है।
इसी अवधि में भारत के भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क में भी अभूतपूर्व विस्तार हुआ। सड़कें, एयरपोर्ट, रेलवे, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और पोर्ट्स (बंदरगाह) का तेज़ी से विस्तार हुआ, जिससे देश का आर्थिक भूगोल ही बदल गया। गति शक्ति और भारतमाला जैसी योजनाओं ने न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण किया, बल्कि आर्थिक विकास योजनाओं से जोड़ने का प्रयास भी किया है।
मेक इन इंडिया और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाओं ने मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान की। इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, डिफेंस इक्विपमेंट और सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित कर भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह केवल विश्व का बड़ा उपभोक्ता बाजार बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि ग्लोबल मैन्युफैक्चरर्स और इनोवेटर्स का केंद्र भी बनना चाहता है।
भारत की विकास गाथा किसानों के बिना अधूरी है। इसे ध्यान में रखते हुए, मोदी सरकार ने कृषि को भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रखा है। पीएम-किसान योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में सीधे तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक जमा किए गए हैं, जो उनके लिए आर्थिक स्थिरता का अहम ज़रिया बना। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने जलवायु संबंधी जोखिमों से सुरक्षा प्रदान कर किसानों की चिंता कम की है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कृषि में टेक्नोलॉजी और कृषि के आधुनिकीकरण ने खेती की क्षमता को बढ़ाया है। बागवानी, डेयरी, मछली पालन और जैविक खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय के नए स्रोत विकसित किए गए हैं। रिकॉर्ड अनाज उत्पादन और ई-एनएएम का बढ़ता उपयोग भारतीय कृषि की बढ़ती क्षमता और भविष्य की तैयारियों को दर्शाता है। विगत वर्षों में भारत की सफलता में सुधारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसे सुधारों ने देश की टैक्स व्यवस्था में एकरूपता लाने और एक सिंगल घरेलू बाज़ार बनाने में मदद की, जबकि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) और कॉर्पोरेट टैक्स सुधारों ने कार्यक्षमता को बढ़ाने की कोशिश की है। भारत की विकास यात्रा में डिजिटल बदलाव ने भी ज़बरदस्त मदद की है। देश में 55 करोड़ से ज्यादा जन धन खाते तथा यूपीआई के ज़रिए हर महीने करोड़ों डिजिटल ट्रांज़ैक्शन होते हैं। स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत दुनिया के सबसे बड़े इकोसिस्टम में से एक है।
भारत का बढ़ता आत्मविश्वास केवल देश के भीतर नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नज़र आता है। जी20 की सफल अध्यक्षता से लेकर जलवायु परिवर्तन के मुद्दों में अग्रणी रहने, रणनीतिक साझेदारी बनाने और ‘ग्लोबल साउथ’ का प्रतिनिधित्व करने तक ये सभी आज के भारत की नई पहचान हैं। वहीं सांस्कृतिक विरासत कम संरक्षण, विरासत स्थलों का जीर्णोद्धार और अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा यह दर्शाती है कि भारत विकास और संस्कृति को साथ लेकर आगे बढ़ने में विश्वास रखता है। आज़ादी के 100 साल पूरे होने के करीब बढ़ते हुए ‘विकसित भारत’ अब सिर्फ एक महत्वाकांक्षी सोच नहीं, बल्कि एक ऐसी हकीकत है जो वास्तव में आकार ले रही है। अंतत: नेताओं को उनके वादों के लिए नहीं, बल्कि उनकी उपलब्धियों के लिए याद किया जाता है। इस कसौटी पर परखें तो, भारत के लोकतांत्रिक अनुभव के लिहाज़ से पिछला दशक बहुत महत्वपूर्ण रहा है। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वाकई लम्बा और उल्लेखनीय सफर तय किया है।  

सांसद, राज्यसभा

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