औषधीय गुणाें और पौष्टिकता से भरपूर है नारियल
नारियल सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों में ही काम आने वाला पवित्र फल हैं अपितु नारियल अपने विशिष्ट गुणों के कारण समूची सृष्टि में सर्वाधिक उपयोग में लाया जाता हैं। धार्मिक कार्यों के अलावा भी यह फल मान-सम्मान के लिए प्रयुक्त किया जाता हैं। यह रिद्धि-सिद्धि दायक फल हैं इसलिए इसे ‘श्रीफल’ भी कहा जाता हैं।
संस्कृत में इसे नारिकेल के नाम से जाना जाता हैं, जबकि हिन्दी भाषा में नारियल व नरियाल, नालिएर, नारल, टेकोंचा, तेगा, तेगिनमर, तेगाई इत्यादि अन्य प्रांतों में नाना प्रकार से पुकारते हैं। नारियल की तासीर ठंडी होती हैं। नारियल बाहर से कठोर होता हैं लेकिन, अंदर का भाग सेहत व स्वास्थ की दृष्टि से उपयोगी होता हैं। नारियल उष्ण व आद्र प्रदेशों में बहुतायत से होता हैं। विशेषकर समुद्री व नदी के किनारे इसके वृक्ष खूब फलते हैं। नारियल का फल कठोर होने के कारण इसे ‘द्रढ़फल’ भी कहते हैं। बारहो महीने लगने वाले इस फल को सदाफल भी कहते हैं। नारियल स्वास्थ्यरक्षक व रोगनिवारक भी माना जाता हैं। इसका प्रत्येक भाग उपयोगी होता हैं इसलिए यह ‘जीवनतरु’ भी कहलाता हैं। नारियल के फल का भीतरी भाग गूदा या गरी देर से पचने वाला, वातशोधक, पुष्टिकारक, बलवृद्धक तथा पित्त,दाह, रक्तविकार नाशक माना जाता हैं। कच्चे नारियल का पानी शीतल हृदय रोग नाशक, शुक्रवर्धक, मधुर स्वादिष्ट व वस्टिशोधक व प्यास बुझानेवाला होता हैं।
नारियल के पानी की शर्करा का शरीर मे शीघ्र ही शोषण हो जाता हैं। डाभ का पानी जीवाणु मुक्त व प्राकृतिक रूप से स्टरलाइज्ड व पौष्टिक होने के साथ-साथ इसमे पौटेशियम और क्लोरिन होता हैं इसके अलावा भी नारियल में प्रोटीन, चर्बी, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आइरन व विटामिन ए,बी,सी व डी प्रचुर मात्रा में होता हैं। नारियल का पानी यकृत रोग एवं किडनी रोग मे पीना लाभप्रद हैं। हैजें, उल्टी व दस्त के कारण शरीर में पानी और क्षारीय तत्वाें की कमी होने पर नारियल के पानी का उपयोग रामबाण साबित होता हैं। नारियल का पानी माता के दूध के सम्मान अमृत तुल्य हैं, इसके सेवन से गर्भवती स्त्रियों व बच्चाें का स्वास्थ अच्छा रहता हैं व उनका विकास भी सुचारुरूप से होता हैं।
शरीर में डीहाईड्रेशइन होने पर नारियल का पानी सोडियम व पौटेशियम की तुरंत पूर्ति करता हैं। सोते समय नारियल का पानी से क्षुब्ध नाड़ी संस्थान को आराम मिलता हैं व अच्छी नींद आती हैं। नारियल के औषधीय प्रयोग यदि बुखार, खांसीव शरीर में खुजली होने पर इसके तेल की मालिश करे। आंतों में कीड़े पड़ गए हो तो रोज़ाना नारियल का पानी पिये व गिरि खाये, लेकिन खाली पेट। कब्जी होने पर नारियल का पानी सेवन करे, यह मूत्राशय को भी शुद्ध करता हैं। आयुर्वेद में नारियल के पानी व इसके तेल की उपयोगिता का जिक्र मिलता हैं, जिसमें इसका उपयोग नेत्र व चर्मरोग मे लाभदायक माना जाता हैं। आधाशीश सिरदर्द की शिकायत हो तो नारियल के पानी की नाक मे पांच-चार बुंदे डालने से तुरंत आराम मिलता हैं। हां इस बात का ख्याल रखे की यदि बायीं ओर दर्द हैं तो दायीं नाक में ओर दायीं ओर दर्द हैं तो बायीं नाक में डाले। आग या गरम पानी से जल जाने पर नारियल के तेल मे तुलसी के पत्ते का रस मिलाकर लगाए, जलन दूर हो जाएगी। (सुमन सागर)



