कांग्रेस की खानाजंगी

पंजाब विधानसभा चुनाव निकट हैं, परन्तु जिस तरह अब प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के भीतर खानाजंगी शुरू हो गई है, उसने न सिर्फ इस समय पार्टी की चुनावी तैयारियों पर ही प्रश्न-चिन्ह लगा दिया है, अपितु आगामी कुछ महीनों में होने जा रहे चुनाव में पार्टी की सम्भावनाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला है। पंजाब में कांग्रेस का बड़ा आधार रहा है। प्रदेश की रानजीति में इसका अक्सर एक ताकतवर पार्टी के रूप में उभार बना रहा है। विगत दशकों में कुछ ऐसे घटनाचक्र घटित हुए हैं, जिनसे ऐसे प्रतीत होने लगा था कि इस पार्टी का भविष्य धूमिल हो गया है, परन्तु इसके बावजूद रजनीति में यह बार-बार उभर कर सामने आती रही है। इसके साथ-साथ पार्टी कतारों में अक्सर बड़ी दरारें भी दिखाई देती रही हैं, जिस कारण इसकी इमारत डावांडोल भी होती रही है। अब पुन: ऐसे ब़गावती चक्र को उभरने में समय नहीं लगा। 
बात वर्ष 2017 की करें तो कांग्रेस ने उस समय अकाली दल को पीछे छोड़ कर तथा आम आदमी पार्टी के उभार को रोक कर अपनी सरकार बनाई थी। 117 सीटों में से इसने 77 सीटों पर जीत प्राप्त की थी, परन्तु इसी सरकार की पारी के खत्म होने से कुछ माह पहले ही सितम्बर 2021 में पार्टी  हाईकमान ने कैप्टन अमरेन्द्र सिंह से त्याग-पत्र लेकर चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया था। इस बदलाव तथा पार्टी की भीतरी फूट के कारण यह आम आदमी पार्टी के मुकाबले में अगामी चुनाव में बुरी तरह पिछड़ गई थी। अब जबकि प्रदेश के अगले चुनाव में मात्र 6 से 7 माह का समय ही शेष रह गया है और कांग्रेस के इन चुनावों में एक बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की सम्भावनाएं बन गई थीं, तो इसके भीतर पैदा हुई फूट ने एक बार फिर इसे कमज़ोर अवश्य कर दिया है। आगामी चुनाव किस तरह लड़े जाएंगे, इसकी योजनाबंदी करने में ही पार्टी ने लम्बा समय लगा दिया, जबकि इसके मुकाबले में अन्य कुछ पार्टियां अपनी चुनाव तैयारी में अब तक बहुत आगे निकल गई दिखाई देती हैं। इस देरी का कारण यही माना जा रहा था कि प्रदेश के कांग्रेसियों के भीतर नेतृत्व को लेकर एक-स्वर नहीं बन सका था।
कुछ नेता मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष को हटा कर स्वयं यह पद लेने के इच्छुक दिखाई देते थे। हाईकमान ने इस दुविधा को दूर करने के लिए पंजाब के नेताओं के साथ इकट्ठे भी और अलग-अलग अहम विस्तारपूर्वक बैठकें की हैं। अंतत: इसके लिए कुछ परिपक्व कांग्रेसी नेताओं की समिति बना कर ज़मीनी स्तर पर उतर कर भिन्न-भिन्न पक्षों के साथ सम्पर्क बना कर किस फैसले पर पहुंचने का मार्ग धारण किया गया। विगत दिवस हाईकमान द्वारा पंजाब के चुनाव मैदान में उतरने के लिए भिन्न-भिन्न विंग बना कर ज्यादातर नेताओं को अच्छे पद देकर जो घोषणा की गई, उसके बाद कांग्रेसी गलियारों में जिस तरह की असन्तोष वाली स्थिति का प्रकटावा हुआ, उससे यह ज़रूर सिद्ध हो गया है कि अपने बड़े यत्नों के बावजूद पार्टी हाईकमान इन अलग-अलग गुटों को सन्तुष्ट करने में विफल सिद्ध हुआ है। फिलहाल बड़ा विवाद अध्यक्ष पद को लेकर खड़ा हो गया है, जिसका प्रकटावा विगत दिवस पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा बुलाई गई बैठक में भी हुआ देखा गया है। इस बैठक में पार्टी के भिन्न-भिन्न उच्च पदों पर बैठे लगभग पांच दर्जन नेताओं द्वारा भाग लिया गया। इस बैठक में इकट्ठे हुए नेताओं ने अपने असन्तोष की भावनाओं को हाईकमान के समक्ष पहुंचाने के लिए एक समिति बनाई है और हाईकमान को मिलकर अपनी बात उसके समक्ष रखने का फैसला किया गया है। आगामी दिनों में हाईकमान इस घटनाक्रम के प्रति क्या फैसला लेता है, यह तो अभी देखने वाली बात होगी, परन्तु इस घटना ने पार्टी की लगाम और भी ढीली होने का प्रभाव ज़रूर दिया है जिसका चुनाव मैदान में उतरी अन्य पार्टियां आगामी समय में पूरा लाभ उठाने का यत्न ज़रूर करेंगी।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

#कांग्रेस की खानाजंगी