खतरनाक मोड़ पर पहुंचे संबंध
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों में कई बार युद्ध भी हो चुका है। चाहे कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्ज़े में है परन्तु इसके बावजूद उसने पूरे कश्मीर पर कब्ज़े के लिए दशकों से भारत के साथ अपनी दुश्मनी जारी रखी हुई है। इसको आधार बनाकर उसने भारत की प्रभुसत्ता को लगातार ललकारा है। उसके पोषित जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा सहित दर्जनों आतंकी संगठन प्रतिदिन पाकिस्तानी सेना की मदद से भारत में घुसपैठ करके इसको लहूलुहान करते आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर तो इस हिंसा का बड़े स्तर पर शिकार बना रहा है परन्तु इसके साथ-साथ मुम्बई में पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा दिन-दहाड़े सैकड़ों ही लोगों को मार देना, यहां के महत्वपूर्ण स्थानों पर हमले करना, राजधानी दिल्ली में देश की संसद पर हमला करके भारत की प्रभुसत्ता को चुनौती दी, पठानकोट सहित भारतीय सेना के अन्य अड्डों पर योजनाबद्ध ढंग से हमला करना आदि अनेकानेक ऐसी घटनाएं हैं, जो देश के लिए चुनौती पैदा करती रही हैं।
पाकिस्तानी पोषित इन आतंकी संगठनों के नेता वहां भारत को लगातार धमकियां देते रहे हैं और सेना जरनैलों ने भी लगातार धमकियों का सिलसिला जारी रखा हुआ है। इस पक्ष से आज मुनीर नियाज़ी भी पहली कतार में खड़ा दिखाई दे रहा है। पाक अधिकृत कश्मीर की धरती से प्रतिदिन आतंकियों को भारत में भेजना जारी है। इसी कड़ी में पिछले वर्ष पहलगाम में इन आतंकी संगठनों ने योजनाबंदी से दिन-दहाड़े 26 भारतीय पर्यटकों को गोलियां मार दी थीं। आज आतंकवादियों से भरी उस धरती पर ऐसे ही कई संगठन पाकिस्तान की सरकार के लिए भी खतरा बन चुके हैं। इनमें तहरीक-ए-तालिबान (पाकिस्तान) एक ऐसा संगठन है, जिसने वहां पूरे देश में दहशत और खून-खराबे वाला माहौल बना दिया है। आज यही संगठन वहां की सरकार को मात देने की धमकियां दे रहे हैं। अफगानिस्तान की सीमा के साथ लगते खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तानी तालिबान की एक तरह से पाकिस्तानी सेना के साथ जंग जारी है। अब अफगानिस्तान भी पाकिस्तान के विरुद्ध इस जंग में शामिल हो गया है। दूसरे बड़े प्रांत बलोचिस्तान में भी ऐसा ही रक्त रंजित माहौल बना दिखाई दे रहा है, जिसने एक तरह से पाकिस्तान के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में सरकार के खिलाफ वर्षों से हो रही बगावत अब आग की लपटों में बदल गई प्रतीत होती है।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने वर्ष 1960 में दोनों देशों के बीच हुई सिंधु जल संधि को निलम्बित करने की घोषणा कर दी थी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट शब्दों में यह कहा था, ‘पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।’ इसके साथ ही केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत पाकिस्तान में सक्रिय 23 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित कर दिया गया है। इनमें लश्कर-ए-तैयबा तथा जैश-ए-मुहम्मद से संबंधित आतंकवादियों के नाम भी शामिल हैं। ये संगठन लगातार ड्रोन के ज़रिये हथियारों तथा नशीले पदार्थों की भारत में तस्करी करवा रहे हैं। इनमें जमात-उल-दावा के आतंकी भी शामिल हैं। हालात ये बन गए हैं कि यदि पाकिस्तान की सरकार इनको नकेल डालना भी चाहे तो यह कार्य उसके लिए असम्भव प्रतीत होता है। पाकिस्तानी सेना ने भारत को रक्त रंजित करने संबंधी अपने रवैये में कोई बदलाव नहीं किया।
अब सिंधु जल संधि के भारत द्वारा निलम्बित किए जाने के बाद पाकिस्तान में बेहद चिन्ता का माहौल पैदा हो गया है, जिसके लिए वहां की विभिन्न पार्टियों के नेता भारत को धमकियां देने पर आमादा हो गए हैं। इससे बड़ी चिन्ता की बात यह है कि दोनों परमाणु बम वाले देशों में लड़ाई शुरू होने का खतरा बढ़ रहा है। पिछले दिनों दोनों देशों के बुद्धिजीवियों, पूर्व कूटनीतिज्ञों तथा प्रमुख शख्सियतों ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को हर हाल में अपने संबंध सुधारने के लिए कोई मार्ग तलाशने हेतु प्रेरित किया है। पाकिस्तान के पास इस समय शक्तिशाली चीन का सहारा अवश्य है, परन्तु जहां तक यह बात पहुंच चुकी है, अब यह ज़रूरी हो गया प्रतीत होता है कि पाकिस्तान को हर हाल में भारत में रक्त बहाने की अपनी नीति को बंद करना होगा। यदि वह ऐसा नहीं कर सकता तो दोनों देशों के संबंध जो पहले ही खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुके हैं, दक्षिण एशिया के इस क्षेत्र में बड़ी तबाही का कारण बन सकते हैं।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

