मानसून सत्र: खड़गे की मनुस्मृति वाली टिप्पणी पर संसद में हंगामा
नई दिल्ली, 30 जुलाई - संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को राज्यसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा चल रही है। इस दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा कर लिया है। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति को लेकर भी बयान दिया, जिस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। सरकार की ओर से उनकी बयान को आशांति फैलाने वाला करारा दिया गया है।
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, लेकिन एक को भी सजा नहीं हुई। सरकार क्या कर रही थी, क्या एजेंसियां सो रही थीं? शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं है। शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है। यूनिवर्सिटी में आरएसएस के लोग भरे जा रहे हैं। बजट में छह फीसदी भागीदारी शिक्षा बजट की होनी चाहिए, लेकिन तीन फीसदी से भी कम है।
घटनाएं रोकने के बजाय सिर्फ डैमेज कंट्रोल करती है सरकार: खरगे
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यह सरकार ऐसी घटनाओं को पहले ही रोकने के बजाय सिर्फ डैमेज कंट्रोल और हेडलाइन मैनेजमेंट करती है। खरगे ने कहा कि दोबारा परीक्षा कराना कई गरीब परिवारों पर बोझ डालता है। बार-बार यात्रा का खर्च उठाने में असमर्थ होने के कारण कई छात्र दोबारा परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए, जिससे गरीब छात्रों की परेशानी बढ़ी।
खरगे के मनुस्मृति वाले बायन पर सदन में जोरदार हंगामा
खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका को लेकर भी सरकार को घेरा।उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए, लेकिन अब तक एक भी दोषी को सजा नहीं मिली। खरगे ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार क्या कर रही थी और क्या जांच एजेंसियां सो रही थीं? उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी एक वर्ग का विशेषाधिकार नहीं हो सकती और सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।
खरगे ने आरोप लगाया कि आरएसएस का शिक्षा संस्थानों पर प्रभाव बढ़ रहा है और विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में उसके सहयोगियों की नियुक्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर कुल बजट का छह प्रतिशत खर्च होना चाहिए, लेकिन यह तीन प्रतिशत से भी कम है। साथ ही उन्होंने पाठ्यक्रम में कथित तौर पर शामिल उन विचारों का विरोध किया, जिनमें शूद्रों के वेद सुनने या वैदिक मंत्रों के उच्चारण पर कठोर दंड का उल्लेख है। इन आरोपों के बाद राज्यसभा में जोरदार हंगामा हुआ। इसके बाद नड्डा ने इस बात का विरोध किया। और कहा कि ये इस बात का कोई तथ्य नहीं है और अगर है तो वो प्रमाणित करें।

