तीसरा ढेर

एक राजा बहुत दिनों से पुत्र की प्राप्ति के लिये आशा लगाए बैठा था, पर पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। उसके सलाहकारों ने तांत्रिकों से मिलने की सलाह दी। तांत्रिकों ने सुझाव दिया कि किसी बच्चे की बलि दे दी जाए तो पुत्र प्राप्ति हो जायेगी। राजा ने राज्य में ये बात फैलाई कि जो अपना बच्चा देगा उसे बहुत सारा धन दिया जाएगा। एक परिवार में कई बच्चे थे, गरीबी भी बहुत थी। एक ऐसा बच्चा भी था जिसकी सद्गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा थी। वो हर रोज अभ्यास से मन को स्वांसों की धुन में लीन रखता था। परिवार को लगा कि इसे ही राजा को दे दिया जाए क्योंकि ये कुछ काम भी नहीं करता है और हमारे किसी काम का भी नहीं है। इससे राजा भी प्रसन्न होकर बहुत सारा धन देगा। ऐसा ही किया गया-बच्चा राजा को देने के लिए राज-दरबार में उसके पिता पहुंचे। तांत्रिकों द्वारा बच्चे की बलि की तैयारी हो गई और राजा को बुलाया गया। बच्चे से पूछा-तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है? क्योंकि आज तुम्हारे जीवन का अन्तिम दिन है। बच्चे ने कहा-ठीक है मेरे लिये रेत मगवां दी जाए। रेत आ गई और बच्चे ने रेत से चार ढ़ेर बनाए। एक-एक करके रेत के तीन ढ़ेर को तोड़ दिया। चौथे के सामने हाथ जोड़कर बैठ गया और बोला-अब जो करना है करो। 
यह सब देखकर तांत्रिक डर गये और बोला-यह तुमने क्या किया है, पहले बताओ। राजा ने भी पूछा तो बच्चे ने कहा-पहला ढ़ेर मेरे माता-पिता का था। मेरी रक्षा करना उनका कर्तव्य था पर उन्होंने पैसे के लिये मुझे बेच दिया। इसलिये मैनें यह ढ़ेर तोड़ दिया। दूसरा ढ़ेर मेरे बड़े भाईयों व सगे-सम्बन्धियों का था। उन्होंने भी ऐसा न करने के लिए समझाने की कोशिश नहीं की तो यह भी मैनें तोड़ दिया। तीसरा ढ़ेर आपका था राजा साहब। राज्य के सभी इंसानों की रक्षा करना राजा का ही कर्तव्य होता है पर राजा ही मेरी बलि देना चाह रहा है तो ये ढ़ेर भी मैंने तोड़ दिया। अब सिर्फ मुझे मेरे सद्गुरु पर ही मेरी सच्ची श्रद्धा है। इसलिये यह एक ढ़ेर मैंने छोड़ दिया है। परम दयालु गुरु महाराज सभी के लिए अच्छा करते हैं तो मेरे लिए भी जो करेंगे, अच्छा ही करेंगे। 
राजा ने सोचा कि पता नहीं बच्चे की बलि के बाद भी पुत्र प्राप्त हो या न हो क्यों नहीं इस बच्चे को ही अपना पुत्र बना लें। इतना समझदार और आत्मज्ञानी बच्चा है। इससे अच्छा बच्चा कहां मिलेगा? राजा ने उस बच्चे को अपना बेटा बना लिया और राजकुमार घोषित कर दिया। (सुमन सागर)

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