पंजाब का पुनर्गठन और ऐतिहासिक नाम

प्यारे बच्चो, आज आपको पंजाब के एतिहासिक नाम के बारे में बताएंगे। आप पंजाब की भूगोलिक स्थिति के बारे में छोटी कक्षाओं में पढ़ चुके होंगे। इतिहासकारों के अनुसार पंजाब भारत का महत्वपूर्ण राज्य है। समय समय पर इसके नाम और सीमा में तबदीलियां होती रही हैं। पंजाब प्रदेश ने भारत को ही नहीं बल्कि विश्व के इतिहास को प्रभावित किया है। पंजाब हमारे महान गुरुओं की कर्म-भूमि है। यहां श्री गुरु नानक देव जी ने संसार को मानवता का संदेश दिया है और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने ‘खालसा पंथ’ की स्थापना की है। पंजाब में शूरबीर, देश भक्तों और समाज सुधारकों का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बेमिसाल योगदान है।
प्यारे बच्चो, हम बात करेंगे पंजाब के ऐतिहासिक नामों के बारे में। वैदिक काल में आर्य के प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में पंजाब को ‘सप्त सिंधू’ भाव सात नदियों की धरती कहा गया है। ये सात नदियां हैं जैसे कि सिंधू, वितस्ता (जेहलम), अस्किनी (चिनाब), पुरूष्णी रावी, विपाशा (ब्यास), शतुदरी (सतलुज) और सरस्वती नदी। प्राचीन महाभारत, रामायण और पुराणों में पंजाब को पंचनद कहा गया है। यूनानियों ने पंजाब को पैंटापोटामीयम का नाम दिया है। पंजाब में बहुत सारे कबीलों का शासन रहा, जिस कारण इसको टक्क प्रदेश या टक्की भी कहा गया है।
चीनी यात्री हियून त्सांग ने इस राज्य को सेकीया का नाम दिया। मुगल सम्राट अकबर ने इसको पंजाब का नाम दिया जो कि फारसी भाषा के शब्द ‘पंज और आब’ से मिलकर बना है। पंज का अर्थ है पांच और आब का अर्थ है पानी और इस तरह पंजाब का नाम प्रचलित हो गया और महाराजा रणजीत सिंह के समय इसको लाहौर प्रदेश कहा जाने लगा। प्यारे बच्चो, 1849 में अंग्रेजों ने पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया। इसको पंजाब प्रदेश का नाम दिया। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय पंजाब के दो भाग हो गए। पाकिस्तान में पश्चिमी पंजाब और भारत में पूर्वी पंजाब। प्यारे बच्चो, 1 नवम्बर 1966 को भाषा के आधार पर पुनर्गठन किया गया। पंजाब के विभाजन के कारण हरियाणा, हिमाचल प्रदेश बना दिया गया है।
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