ब्रिक्स समिट: 'कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहींं', ओपन सेशन में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की बड़ी बातें
नई दिल्ली, 13 सितंबर - ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत की अध्यक्षता में हमने सभी प्रयास 'सतर्कता, नवाचार, सहयोग, स्थिरता' इन चार स्तंभों पर क्रिएट किए हैं। मुझे खुशी है कि आप सभी के सहयोग और समर्थन से हम अपने साझा विजन को भिन्न-भिन्न सहयोग में बदल सके। आज विश्व में तनावों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सामान्य मानवी के जीवन पर उसका बहुत ही नकारात्मक व व्यापक प्रभाव हो रहा है। महामारियां, जलवायु आपदा और सप्लाई चेन में रुकावट ने दिखाया है कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए हमने ब्रिक्स समूह में रेजिलिएंस बढ़ाने पर विशेष बल दिया है। चुनौतियों को तुरंत पहचानना, उनके लिए तैयार होना और तुरंत कार्रवाई करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के साथ इंफेक्शियस डिसीज के प्रिवेंशन(संक्रामक बीमारियों की रोकथाम) और रिस्पॉन्स के लिए ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम पर सहमति बनी है। डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए अर्ली वॉर्निंग डेटा इंटिग्रिशन गाइडलाइन तैयार की गई है। ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन का ऑपरेशन फ्रेमवर्क हमारी सप्लाई चेन को अधिक रिलायबल और रेजिलियंट बनाने में सहायक होगा।
इनोवेशन (नवाचार) के अंतर्गत ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क हमारे स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर को आपस में जोड़ेगा। इनोवेटिव और स्केलेबल सॉल्यूशन्स को बढ़ावा देने के लिए हमने BRICS स्टार्टअप इनोवेशन फंड का प्रस्ताव रखा है। ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर, किसानों के लिए नई संभावनाएं तैयार करेगा। इसके माध्यम से AI, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं के साथ जोड़ा जाएगा। टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स का वेपनाइजेसन हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है इसलिए हमने टेक्नोलॉजी को अपनाने में सबको साथ लेकर चलने पर बल दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत ने ब्रिक्स के मंच से मित्रता, सहभागिता और सहयोग को आगे बढ़ाया है। हमारा प्रयास रहा है कि ब्रिक्स सहयोग केवल सरकारों तक सीमित ना रहे, हमारे एंटरप्रेन्योर, किसान, रिसर्चर्स, महिलाएं, युवा और सामान्य नागरिक भी इसके सक्रिय भागीदार बनें। हमने ब्रिक्स कनेक्ट के माध्यम से कौशल, रोज़गार-क्षमता, कार्यबल में महिलाएं, सामाजिक सुरक्षा और क्षमता निर्माण। छोटे उद्यमों को नॉलेज, फाइनांस और नए मार्केट के साथ जोड़ने के लिए ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग पोर्टल की पहल ली गई है। भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। सदियों से हमारी मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं बल्कि पूरक हैं। ब्रिक्स में भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया है। यही वहनीयता का आधार है और आगामी पीढ़ी के प्रति हमारा दायित्व भी है। इस दिशा में हमने कई पहलूओं पर प्रगति की है। हमने स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज के लिए 'ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस' स्थापित किया है, जो हमारे स्वच्छ ऊर्जा सिस्टम को अधिक विश्वसनीय, कुशल और सुलभ बनाने में मदद करेगा। एग्रो-इकोलॉजी और रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर (पुनर्योजी कृषि) के लिए बने सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ेंगे।
BRICS समिट 2026 के दूसरे दिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं मेरे निजी अनुभव के साथ कह सकता हूं कि ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है क्योंकि ब्रिक्स में उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभव का सम्मान होता है और समाधान न केवल उनके लिए बल्कि उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं। ब्रिक्स की शक्ति हमारी विविधता और सहयोग में है। भले ही हम अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़े हों, लेकिन सहयोग के ज़रिए हम साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं और मानवता के लिए फलते-फूलते हैं। हमारी विविधता ही हमारी पहचान बनी रहे, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी तरक्की से पूरी मानवता का भला हो।

