एस.एस. बोर्ड भर्ती घोटाले में तत्कालीन चेयरमैन और कंप्यूटर एजेंसी मालिक बरी

एस.ए.एस. नगर (मोहाली), 16 सितंबर (कपिल वधवा)- पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (पी.एस.एस.एस.बी.) की 2006 की शिक्षक भर्ती से संबंधित मामले में मोहाली की विशेष अदालत ने आज अहम फैसला सुनाया है। विशेष जज हरदीप सिंह की अदालत ने तत्कालीन चेयरमैन एवं सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर चरणजीव सिंह हरिका और कंप्यूटर एजेंसी के मालिक गुरपाल सिंह को बरी कर दिया, जबकि बोर्ड के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट बलवंत सिंह को दोषी करार दिया है। अदालत ने बलवंत सिंह को धारा 420 आई.पी.सी. के तहत 2 साल की सख्त कैद और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसी तरह भ्रष्टाचार रोकू कानून की धारा 13(2) के तहत भी 2 साल की सख्त कैद और 5 हजार रुपये जुर्माना किया गया है।

65 हजार उम्मीदवारों ने किया था आवेदन

अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2006 में पी.एस.एस.एस.बी. की ओर से विभिन्न विषयों के मास्टर/मिस्ट्रेस की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए गए थे और करीब 65 हजार उम्मीदवारों ने आवेदन किए थे। जांच के दौरान मेरिट सूचियों और चयन प्रक्रिया में कई अनियमितताएं सामने आने की बात रिकॉर्ड में दर्ज है।

इस मामले में सरकारी पक्ष की ओर से जिला अटॉर्नी मनजीत सिंह ने पैरवी की। तत्कालीन चेयरमैन चरणजीव सिंह हरिका की ओर से बचाव की पैरवी वरिष्ठ वकील एच.एस. धनौआ ने की। वहीं कंप्यूटर एजेंसी मालिक गुरपाल सिंह और दोषी करार दिए गए बलवंत सिंह की ओर से क्रमशः वकील जी.सी. क्लेर और एच.एस. पाल पेश हुए।

मेरिट में हेराफेरी के आरोप

विजिलेंस जांच के मुताबिक, कुछ अधिक मेरिट वाले उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी की सूची में शामिल न करने और कम मेरिट वाले उम्मीदवारों का चयन करने के आरोप लगे थे। रिकॉर्ड में 52 उम्मीदवारों के शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता प्रमाणपत्रों के अंकों में हेराफेरी, 86 कम मेरिट वाले या मेरिट सूची के लिए अयोग्य उम्मीदवारों के चयन और आरक्षित श्रेणी के 167 अधिक मेरिट वाले उम्मीदवारों को संयुक्त सूची में शामिल न करने सहित अन्य अनियमितताओं का भी उल्लेख है।

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