बिहार सरकार का खजाना खाली, कंटिंजेंसी फंड से बार-बार पैसे निकाले जा रहे: CPI

पटना, 1 अक्टूबर (UNI) CPI ने गुरुवार को आरोप लगाया कि राज्य सरकार का खजाना खाली है और वह सैलरी, मानदेय और पेंशन जैसे खर्चों को पूरा करने के लिए कंटिंजेंसी फंड से बार-बार पैसे निकाल रही है।
बिहार राज्य CPI सेक्रेटरी रामनरेश पांडे ने आरोप लगाया कि "डबल इंजन सरकार" के बावजूद, केंद्र बिहार को समय पर उसका बकाया पैसा नहीं दे रहा है, जिससे राज्य सरकार को पैसे की दिक्कत हो रही है। उन्होंने दावा किया कि आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर, आशा वर्कर, मिड-डे मील स्कीम वर्कर और MGNREGA कर्मियों सहित कई स्कीम वर्कर को लगभग एक साल से उनका मानदेय नहीं मिला है।
CPI नेता ने आगे आरोप लगाया कि कॉन्ट्रैक्टर को देने वाले 50,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के बिल पेंडिंग हैं और कहा कि पटना हाई कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है।
उन्होंने दावा किया कि संस्कृत और उर्दू टीचर, कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले टीचर, कॉलेज टीचर और अलग-अलग कॉर्पोरेशन और बोर्ड के कर्मचारियों की सैलरी भी पेंडिंग है। पांडे ने आरोप लगाया कि फंड की कमी से पूरे राज्य में विकास के कामों पर बुरा असर पड़ रहा है।
उन्होंने आगे दावा किया कि केंद्र और राज्य में BJP की सरकार होने के बावजूद केंद्र बिहार को नज़रअंदाज़ कर रहा है, और आरोप लगाया कि सेंट्रल टैक्स में राज्य का हिस्सा और केंद्र द्वारा स्पॉन्सर्ड स्कीम के तहत फंड समय पर जारी नहीं किया जा रहा है।
पांडे के अनुसार, राज्य सरकार को कंटिंजेंसी फंड से पैसे निकालकर और लोन लेकर अपना काम चलाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

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