एशियाड में बुलन्द हुआ भारतीय खेल-ध्वज
हाल ही में जापान के शहर ऐशी नागोया में सम्पन्न हुए एशियाई महा-कुम्भ में भारत द्वारा अर्जित किये गये पदकों का जलवा बेशक 2023 के चीन में सम्पन्न हुए एशियाड जैसा चमकदार न रहा हो, किन्तु इस महाकुम्भ ने भारत को वर्ष 2036 में होने वाले ओलम्पिक महायज्ञ के आयोजन की दावेदारी करने के बहुत करीब ला खड़ा किया है। जापान में बीसवें एशियाड महाकुम्भ की शुरुआत पिछले महीने 19 सितम्बर को हुई थी और इसका समापन 4 अक्तूबर को हुआ है। इस हेतु भारत सरकार और ओलम्पिक खेल अधिकारियों की नज़रें नि:संदेह जापान पहुंची भिन्न-भिन्न स्पर्धा-खिलाड़ियों की भारतीय टीमों के प्रदर्शन पर टिकी थीं। जापान में खेले गये एशियाड में भारत सरकार ने 501 खिलाड़ियों का शक्तिशाली दल भेजा था, और बेशक भारतीय अधिकारियों एवं देश के करोड़ों खेल-प्रशंसकों और दर्शकों ने भी इस दल से बड़ी उम्मीदें लगा रखी थीं। नि:संदेह वर्ष 2036 के ओलम्पियाड की दावेदारी हेतु मौजूदा एशियाई खेलों और अगले दो वर्ष बाद वर्ष 2028 में होने वाले ओलम्पिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन, उनके द्वारा प्रदर्शित उत्साह और उनके द्वारा प्राप्त किए गए पदकों की गिनती पर बहुत कुछ निर्भर रहेगा।
...और बेशक इस कसौटी पर भारत और भारतीय खिलाड़ी खरा उतरे हैं। इसके प्रमाण-स्वरूप मौजूदा खेल महा-कुम्भ के अंतिम पड़ाव पर भारतीय महिला हॉकी टीम की शानदार जीत को लिया जा सकता है। इस जीत ने जहां भारतीय हाकी को वर्ष 2028 में लॉस एंजिलस में होने वाले ओलम्पिक आयोजन में सीधे भाग लेने वाली पहली टीम बना कर ला खड़ा किया है, वहीं इस विजय ने भारतीय महिला हाकी के विगत 44 वर्ष के स्वर्ण-पदक सूखे को भी समाप्त किया है। वैसे भी, हाकी के अतिरिक्त भारतीय खिलाड़ियों ने इस पूरे आयोजन के दौरान जिस प्रकार के उत्साह और खासकर अनुशासन का प्रदर्शन किया है, उसने भारतीय खिलाड़ियों, खेल प्राधिकरण और भारत सरकार की छवि को बड़ी गरिमा प्रदान की है।
इस आयोजन की शुरुआत में बेशक भारतीय खिलाड़ियों का जलवा थोड़ा मद्धम रहा। भारत को पहले पदक हेतु दो दिन का इंतज़ार करना पड़ा। यहां तक कि देश को पहला स्वर्ण पदक तीसरे दिन जाकर मिला था, किन्तु जैसे-जैसे यह आयोजन आगे बढ़ता गया, भारतीय खिलाड़ियों की पदक-पिटारी लबालब होती चली गई। अंतिम चरण में भारतीय खिलाड़ियों ने एक-एक दिन में पांच-छह तक स्वर्ण पदक जीते। एक ही दिन में 6 स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक जीतना कोई कम उपलब्धि तो कदापि नहीं कही जा सकती। भारतीय क्रिकेट टीम ने अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को एक कड़े मुकाबले में हरा कर न केवल स्वर्ण जीता अपितु विश्व क्रिकेट की इस बड़ी स्पर्धा में पाकिस्तान को शिकस्त देने की अपनी परम्परा को बरकरार रखा। प्रतियोगिता के अंतिम दिन भारतीय खिलाड़ियों ने पुरुष क्रिकेट, पुरुष हाकी, कुश्ती, तीरन्दाज़ी और गोल्फ में स्वर्ण पदक जीते। इससे भारतीय स्वर्ण पदकों की चमक इक्कीसवीं पायदान पर जा चढ़ी। इसी दिन भारतीय दल द्वारा दो रजत और दो कांस्य पदक जीतना बहुत ब़ड़ी प्रसन्नता की बात बनी। देश की कुल पदक संख्या बेशक 85 तक रही, जो 2023 के एशियाड में भारतीय उपलब्धि से कम रही, किन्तु 21 स्वर्ण पदकों की चमक अन्धेरों को चीर कर उड़ते जुगनुओं की मानिंद साबित हुई। देश ने 27 रजत और 37 कांस्य पदक भी जीते। यह भी कि भारत पदक तालिका में 12वें स्थान से ऊपर उठते हुए, चौथी पायदान पर जा पहुंचा। चीन 341 पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा जबकि जापान 269 पदकों के साथ दूसरे और कोरिया 150 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
इस प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों की सामूहिक प्रतिभा में यह एक और मोर-पंख भी जुड़ा कि भारतीय दल ने कई उन स्पर्धाओं में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया जिनका देश में कोई बड़ा रुझान नहीं है। गोल्फ में भारतीय बेटी प्रणवी उर्स स्वर्ण जीत कर इस प्रतिस्पर्धा हेतु पहली महिला स्वर्ण गोल्फर बन गई। देश के लिए यह भी एक बड़ी बात रही कि भारतीय खिलाड़ियों ने तीन-तीन पदक जीतकर पांच हैट्रिक भी लगाईं। 23 अन्य खिलाड़ियों ने दो-दो पदक जीते। हैट्रिक वाले पांच खिलाड़ी कुमकुम तीरन्दाज़ी, नीरू ढांडा शूटिंग, गुलवीर सिंह एथलेटिक्स, रुद्राक्ष शूटिंग और विथ्या रामराज भी एथलेटिक्स में रहे। सोलह दिन तक चले इस महाकुम्भ में कुल मिला कर भारतीय खिलाड़ियों ने जहां कुश्ती, कबड्डी, क्रिकेट और हाकी में अपनी स्वर्ण प्रतिभा को बरकरार रखा, वहीं किसी भी खिलाड़ी ने किसी भी चरण पर अपने खेल में और अपने चेहरे पर निराशा और थकान का अवतरण नहीं होने दिया। भारतीय महिला और पुरुष हाकी में खिलाड़ियों ने शुरू से ही अपना दबदबा अंतिम प्रयास तक बनाये रखा। इस आयोजन की एक और बड़ी विशेषता यह भी रही, कि लड़कों की अपेक्षा लड़कियों ने अपनी प्रतिभा का ध्वजारोहण अधिक ऊंचे से किया। हाकी में पंजाबियत भारी रही, तो अन्य कई प्रतिस्पर्धाओं में हरियाणा का डंका बजता रहा। कुल मिला कर जापान में सम्पन्न हुए इस एशियाई महाकुम्भ ने भारतीय खेलों के गरिमा-ध्वज को और ऊंचाई पर बुलन्द किया है।

